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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस   (ANSA)

गपशप कोविद -19 से भी ज्यादा भयानक महामारी

सुसमाचार पाठ (मती. 18,15-20) मती रचित सुसमाचार में येसु के चौथे उपदेश से लिया गया है। जिसको समुदायिक या कलीसियाई उपदेश के रूप में जाना जाता है। पाठ भाईचारापूर्ण सुधार के बारे बोलता है और ख्रीस्तीय जीवन के दोहरे आयाम, सामुदायिक एवं व्यक्तिगत आयामों पर चिंतन करने हेतु प्रेरित करता है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 7 सितम्बर 20 (रेई)- वाटिकन स्थित संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में रविवार 6 सितम्बर को संत पापा फ्राँसिस ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। देवदूत प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

इस रविवार का सुसमाचार पाठ (मती. 18,15-20) मती रचित सुसमाचार में येसु के चौथे उपदेश से लिया गया है। जिसको समुदायिक या कलीसियाई उपदेश के रूप में जाना जाता है। आज का पाठ भाईचारापूर्ण सुधार के बारे बोलता है और ख्रीस्तीय जीवन के दोहरे आयाम, सामुदायिक एवं व्यक्तिगत पर चिंतन करने हेतु प्रेरित करता है। सामुदायिक जो सुरक्षित एकता की मांग करता है, यह कलीसिया की एकता है और व्यक्तिगत जो हर व्यक्ति के अंतःकरण के लिए ध्यान और सम्मान हेतु बाध्य करता है।

भाई के सुधार के लिए तीन चरण

भाई जिसने गलती की है उसके सुधार के लिए, येसु सुधार का उपाय बतलाते हैं। येसु हमेशा सुधार लाना और बचाना चाहते हैं। सुधार के तीन चरण हैं, पहला चरण कहता है :  उसे अकेले में समझाओ (15) अर्थात् उसकी गलती को लोगों के सामने नहीं लाना। इसका अर्थ है कि अपने भाई के पास विवेक से जाना, उसका न्याय करने के लिए नहीं बल्कि उसने जो किया है उसे महसूस करने में मदद करने के लिए।

पहला चरण

संत पापा ने कहा, "हमने कितनी बार ऐसा अनुभव किया होगा, जब किसी ने आकर कहा, 'सुनो, तुमने गलती की है। तुम्हें इसमें कुछ सुधार करना होगा।' शायद शुरू में हमें गुस्सा आया होगा, किन्तु बाद में हमने धन्यवाद दिया क्योंकि यह भ्रातृत्व, एकता, मदद करने और सुधार लाने का चिन्ह था।"  

संत पापा ने कहा, "येसु की इस शिक्षा का पालन करना कई कारणों से आसान नहीं है। एक भय होता है कि वह भाई अथवा बहन बुरी प्रतिक्रिया व्यक्त करेगा, कई बार हमें उनपर पर्याप्त विश्वास नहीं होता... किन्तु हर बार जब हम ऐसा करते हैं हमें महसूस होता है कि यही प्रभु का रास्ता था।

दूसरा चरण

हालांकि ऐसा हो सकता है कि, मेरे अच्छे मतलबों के बावजूद पहला प्रयास असफल हो जाए। ऐसी स्थिति में छोड़ देना और यह कहना अच्छा नहीं है, खुद जानो, मैं इससे अपना हाथ धो लेता हूँ। संत पापा ने कहा कि यह ख्रीस्तीय होने का चिन्ह नहीं है। छोड़ देना नहीं चाहिए लेकिन कुछ अन्य भाई-बहनों के समर्थन की खोज करनी चाहिए। येसु कहते हैं, यदि वह तुम्हारी बात नहीं मानता, तो और दो-एक व्यक्तियों को साथ ले जाओ ताकि दो या तीन गवाहों के सहारे सब कुछ प्रमाणित हो जाए। (पद. 16).

यह मूसा का नियम है यद्यपि यह अभियुक्त के लिए आहत होने के समान लग सकता है किन्तु यह उसे गलत अभियोगियों से बचा सकता है। येसु इससे भी आगे बढ़ते हैं। वे कहते हैं कि दो गवाह दोष लगाने अथवा न्याय करने के लिए नहीं बल्कि मदद करने के लिए बुलाये जाते हैं। हम और आप सहमत होकर उस स्त्री अथवा पुरूष के पास जाएँ जिसने गलती की है जो बुरा प्रभाव डाल रहा है। यही मनोभाव येसु हमसे चाहते हैं। वास्तव में, येसु बताते हैं कि यह दृष्टिकोण - गवाहों के साथ दूसरा दृष्टिकोण भी - असफल हो सकता है। यह मूसा के नियम के विपरीत है, जिसके लिए दो या तीन गवाहों की गवाही दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त थी।  

तीसरा चरण

निश्चय ही, दो या उससे अधिक भाई बहनों का प्रेम उसके लिए अपर्याप्त हो सकता है क्योंकि वह स्त्री या पुरूष कठोर है। इस हालात में येसु कहते हैं, इसे कलीसिया को, समुदाय को बताओ। कुछ परिस्थितियों में पूरा समुदाय ही इसमें शामिल होता है। कुछ ऐसी चीजें हैं जो दूसरे भाई बहनों पर असर डालती हैं। इसके लिए अधिक प्रेम की जरूत होती है किन्तु कभी-कभी यह भी पर्याप्त नहीं होता है और येसु कहते हैं यदि वह कलीसिया को भी मानने से इन्कार कर दे तो उसे गैर-यहूदी और नाकेदार जैसा समझो।

संत पापा ने कहा कि यह कहना, अत्यन्त तिरस्कारपूर्ण है और वास्तव में हमें निमंत्रण देता है कि हम उसे ईश्वर के हाथों छोड़ दें। सभी भाई-बहनों के प्रेम से बढ़कर सिर्फ पिता प्रेम दिखा सकते हैं।

येसु की शिक्षा

येसु की यह शिक्षा हमें अच्छा व्यवहार करना सिखलाती है। जबकि उदाहरण के लिए - जब हम किसी भाई बहन में कोई गलती, कोई त्रुटि अथवा फिसलन देखते हैं तो साधारणतयः सबसे पहले दूसरों के पास जाकर उसके बारे बातें करते हैं। शिकायत, समुदाय का हृदय बंद कर देता है, कलीसिया की एकता को तोड़ देता है। सबसे बड़ा शिकायत करनेवाला है शैतान, जो हमेशा दूसरों की चुगली करता है क्योंकि वह झूठा है जो कलीसिया को बांटना चाहता है ताकि भाई-बहनों को दूर कर सके और समुदाय का निर्माण न हो।

चुप रहें और प्रार्थना करें

संत पापा ने सभी विश्वासियों का आह्वान करते हुए कहा, "भाइयो एवं बहनो, हम शिकायत नहीं करने का प्रयास करें। शिकायत (गपशप) कोविड-19 से अधिक खतरनाक महामारी है। आइये, हम चुगली नहीं करने का प्रयास करें। येसु के प्रेम ने चुंगी जमा करनेवाले एवं गैर-यहूदी जो उस समय के कलंक थे उनका आलिंगन किया।"

संत पापा ने आह्वान किया कि कभी-कभी हमारे मानवीय प्रयास विफल हो सकते हैं, और केवल ईश्वर के सामने लाकर ही भाई को उसके अंतःकरण और कार्यों के लिए जिम्मेदार होने में मदद कर सकते हैं। यदि यह उपाय काम नहीं करता है, तो गलती करनेवाले भाई या बहन के लिए चुप रहें और प्रार्थना करें, लेकिन कभी भी गपशप न करें।  

धन्य कुँवारी मरियम हमें भ्रातृत्व पूर्ण सुधार, एक स्वस्थ व्यवहार करने में मदद दे ताकि हमारे समुदायों में भाईचारापूर्ण संबंध बना रहे, जो क्षमाशीलता पर स्थापित हो और सबसे बढ़कर ईश्वर की करुणा के अजेय शक्ति को स्थापित किया जा सके।

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

07 September 2020, 15:39