खोज

Vatican News
24 नवम्बर 2019 को संत पापा हिरोशिमा के मेमोरियल पार्क पर प्रार्थना करते हुए 24 नवम्बर 2019 को संत पापा हिरोशिमा के मेमोरियल पार्क पर प्रार्थना करते हुए  (AFP or licensors)

संत पापा द्वारा परमाणु हथियार मुक्त दुनिया की अपील

रविवार को संत पापा फ्राँसिस ने दुनिया को परमाणु हथियारों से मुक्त करने के लिए प्रार्थना और प्रतिबद्धता का आग्रह किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 10 अगस्त,2020 (वाटिकन न्यूज) : जापान पर परमाणु हमलों की पचहत्तरवीं सालगिरह पर, संत पापा फ्राँसिस ने एक बार फिर "पूरी तरह से परमाणु हथियारों से मुक्त दुनिया के लिए प्रार्थना और प्रतिबद्धता" का आग्रह किया।

संत पापा ने बार-बार परमाणु निरस्त्रीकरण और परमाणु हथियारों के भंडार को खत्म करने का आह्वान किया है। संत पापा ने रविवार को संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में देवदूत प्रार्थना का पाठ करने के उपरांत विशेष रूप से 2019 में अपनी हिरोशिमा और नागासाकी यात्रा को "गहरी भावना और कृतज्ञता के साथ" याद किया।

हिरोशिमा: परमाणु हथियारों का उपयोग और कब्ज़ा अनैतिक है

संत पापा फ्राँसिस ने पिछले साल हिरोशिमा में, पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की और परमाणु बम हमलों से जीवित बचने वालों  की ताकत और मरिमा को स्वीकार करते हुए कहा, “हम आज भी उन लोगों के रोने की आवाज़ सुनते हैं जो अब नहीं हैं। वे अलग-अलग जगहों से आए, उनके अलग-अलग नाम थे और कुछ ने अलग-अलग भाषाएँ बोलीं। फिर भी सभी एक ही समय में भयानक घटना का शिकार हुए, जिसने न केवल इस देश के इतिहास पर, बल्कि मानवता के चेहरे पर हमेशा के लिए अपनी छाप छोड़ी।”

संत पापा ने दोहराया उस समय से कहीं अधिक आज "युद्ध के उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा का उपयोग  न केवल मानव की गरिमा के खिलाफ है, बल्कि हमारे आम घर के लिए किसी भी संभावित भविष्य के खिलाफ एक अपराध है। युद्ध के उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा का उपयोग अनैतिक है, जैसे परमाणु हथियारों को जमा करना अनैतिक है।"

उन्होंने कहा, "हमें इस पर आंका जाएगा,"

नागासाकी: परमाणु हथियार के बिना दुनिया संभव है

संत पापा फ्राँसिस ने नागासाकी का दौरा किया। वहाँ भी उन्होंने परमाणु हथियारों के बिना दुनिया के लिए अपनी पुकार दोहराई। उन्होंने कहा, "जैसा कि मैं जानता हूँ कि परमाणु हथियारों के बिना एक दुनिया संभव और आवश्यक है," मैंने राजनीतिक नेताओं से कहा कि वे यह न भूलें कि ये हथियार हमें राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मौजूदा खतरों से नहीं बचा सकते हैं। हमें उनकी तैनाती के भयावह प्रभाव को समझने की जरूरत है, विशेष रूप से मानवीय और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से  भय, अविश्वास और परमाणु सिद्धांतों द्वारा उत्पन्न शत्रुता के बढ़ते माहौल को अस्वीकार करना है।”

10 August 2020, 14:34