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धर्मशिक्षा देते संत पापा फ्राँसिस धर्मशिक्षा देते संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

चंगाई पर संत पापा फ्रांसिस की धर्मशिक्षा

संत पापा फ्रांसिस ने जुलाई महीने में ग्रीष्मकालीन अवकाश के उपरांत पुनः अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह की शुरूआत की और महामारी के इस समय में विश्वासियों को चंगाई पर धर्मशिक्षा दी।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 05 अगस्त 2020 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने जुलाई महीने के अवकाश उपरान्त 05 अगस्त को पुनः अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह की शुरूआत की। इस उपलक्ष्य में उन्होंने वाटिकन प्रेरितिक निवास के पुस्तकालय से सभी का अभिवादन करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो सुप्रभात।

महामारी का दंश हमारी संवेदनशीलता को उभारते हुए अब भी गहरे रुप में हमें चोटिल कर रहा है। हर महादेश में बहुत से लोग मारे गये हैं और बहुत से लोग बीमार हैं। बहुत से लोग और परिवार अनिश्चितता की स्थिति में जीवनयापन कर रहे हैं क्योंकि यह सामाजिक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है जिसके शिकार विशेष रुप से अति गरीब हुए हैं।

विश्वास, भरोसा एवं प्रेम द्वारा चंगाई

महामारी की इस परिस्थिति में हम अपनी निगाहें येसु की ओर टिकाये रखते हुए विश्वास में बने रहते मुक्ति की आशा करते हैं जिसे स्वयं येसु ख्रीस्त हमारे लिए लेकर आते हैं (मार.1.5, मती.4.17, सीसीसी 2816)। संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि चंगाई और मुक्ति का राज्य हमारे बीच उपस्थित है (लूका.10.11)। न्याय और शांति का राज्य हमारे लिए करूणा के कार्यों में परिलक्षित होते हैं जिसके फलस्वरुप हम विश्वास और आशा में बढ़ते हैं (1कुरू. 13.13) विश्वास, भरोसा और प्रेम ख्रीस्तीय रीति के अनुरूप अपने में भावनाओं या मनोभावों से कहीं बढ़कर हैं। ये हमारे लिए पवित्र आत्मा की ओर से प्रेषित कृपाएं हैं, वे कृपाएं जिसके द्वारा हम चंगाई प्राप्त करते और दूसरों को चंगाई प्राप्त करने में मदद करते हैं। यह नई क्षीतिज को हमारे लिए खोलती है यद्यपि हम अपने जीवन में कठिन परिस्थिति से होकर गुजर रहे होते हैं।

विश्वास, भरोसा और प्रेम का नवीकृत सुसमाचार हमें पुनः इस बात हेतु निमंत्रण देता है कि हम अपने को ईश्वरीय कृपा में नवीन करें। इस भांति हम अपनी शारीरिक बीमारी और विध्वंसकारी शक्ति की जड़ों में परिवर्तन ला सकेंगे जो हमें एक-दूसरे से अलग करती, मानव परिवार और हमारी पृथ्वी को भयभीत करती है।

शारीरिक, सामाजिक और आध्यात्मिक चंगाई

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि येसु ख्रीस्त के प्रेरितिक कार्य हमें चंगाई के बहुत से उदाहरण प्रस्तुत करते हैं- वे बीमारों को चंगाई प्रदान करते (मर.1.29-34), कोढ़ी को शुद्ध करते (मर.1.40-45),अर्द्धांगरोगी को चंगा करते (मर.2.1-12), अंधे को दृष्टि प्रदान करते हैं (मर.8.22-26,यो.9.1-7)। वे वास्तव में न केवल शारीरिक बुराई को दूर करते वरन् सम्पूर्ण व्यक्ति को चंगाई प्रदान करते हैं। इस भांति वे व्यक्ति को समुदाय से संयुक्त करते और व्यक्ति को अकेलेपन की गुलामी से मुक्ति प्रदान करते हैं।

आइए, हम कफरनाहूम में येसु द्वारा अर्द्धांगरोगी की चंगाई, एक सुन्दर वृतांत पर विचार करें (मार.2.1-12)। येसु घर के प्रवेश द्वार से शिक्षा दे रहे होते हैं चार व्यक्ति अपने एक कोढ़ग्रस्त व्यक्ति को येसु के पास लेकर आते हैं। लोगों की भारी भीड़ के कारण वे येसु के निकट नहीं पहुंच सकते, अतः वे घर की छत को खोलते और येसु के सामने उस व्यक्ति की चारपाई को उतारते हैं। “उनके विश्वास को देख कर येसु उस कोढ़ग्रस्त व्यक्ति से कहते हैं, बेटा, तुम्हारे पाप क्षमा हो गये हैं” और इसके साथ ही वे इसे दृश्यमान निशानी बनाते और कहते हैं, उठो, अपनी चारपाई उठाओ, और घर जाओ”।

विश्वास चंगाई का मार्ग

संत पापा ने कहा कि हम कितने आश्चर्यजनक चंगाई को देखते हैं। येसु के कार्य सीधे तौर पर उन लोगों के विश्वास का प्रत्युत्तर है, जिसे वे येसु के ऊपर प्रकट करते हैं, जिसे वे अपने प्रेम स्वरुप एक दूसरे के लिए व्यक्त करते हैं। येसु चंगाई प्रदान करते और वे केवल साधारण रुप में कोढ़ग्रस्त को चंगाई प्रदान नहीं करते अपितु उसके पापों को क्षमा करते हैं। वे कोढ़ग्रस्त व्यक्ति और उसके मित्रों को नया जीवन देते हैं। यह शारीरिक और आध्यात्मिक चंगाई है जहाँ हम व्यक्तिगत और सामाजिक संपर्क को पाते हैं। हम यहाँ इस बात पर विचार करें कि किस भांति उनकी मित्रता और वहाँ उपस्थित लोगों के विश्वास में बढ़ोतरी हुई होगी, हम येसु ख्रीस्त के कार्यों हेतु कृतज्ञता प्रकट करते हैं, उस चंगाई द्वारा येसु का साक्षात्कार लोगों से हुआ।

संत पापा ने कहा कि हम अपने आप से पूछ सकते हैं, हम किस तरह हमारी दुनिया को चंगाई प्रदान कर सकते हैंॽ येसु ख्रीस्त के शिष्यों स्वरुप, शरीर और आत्मा के चिकित्सकों की भांति हम उनकी “चंगाई और मुक्ति के कार्यों” को शारीरिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रुप में आगे बढ़ाने हेतु बुलाये गये हैं।

 धर्मसिद्धांतों में कलीसियाई गुण 

यद्यपि कलीसिया ख्रीस्त के चंगाई रूपी कृपा को संस्कारों के माध्यम संचालित करती है और तथापि वह अपने कार्यों को स्वास्थ्य सेवा के रुप में पृथ्वी के सुदूर स्थानों में करती, वह अपने में महामारी की रोकथाम या उसकी चंगाई हेतु कोई विशेषज्ञ नहीं है। वह बीमारों की सेवा करती लेकिन वह अपने में कोई सिद्धहस्त नहीं है। यह कार्य राजनीति और सामाजिक नेताओं का है। फिर भी, सदियों से सुसमाचार के प्रकाश में, कलीसिया ने कई मूलभूत सामाजिक सिद्धांतों की खोज की है, वे सिद्धांत जो हमें जरूरत की स्थिति में भविष्य में आगे बढ़ने को मदद करते हैं। संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि यहाँ मैं मुख्य रुप से कुछके का जिक्र करना चाहूँगा जो हमारे जीवन के अंग हैं, मानव सम्मान, जनसामान्य हित, गरीबों हेतु विकल्प, वस्तुओं की सार्वभौमिक उपलब्धता, एकात्मकता, आर्थिक सहायता, हमारे सामान्य गृह की सुरक्षा इत्यादि। ये सारे सिद्धांत हमारे संचालकों, समाज के प्रति उत्तरदायी लोगों को महामारी के समय में व्यक्तिगत और सामाजिक रुप में, चंगाई प्राप्ति हेतु हमारी मदद करने में सहायक होते हैं। ये सारे सिद्धांतों में हम विश्वास, भरोसा और प्रेम को गुणों को व्यक्त होता पाते हैं।

संत पापा ने कहा कि मैं आने वालों सप्ताहों में आप को इस बात हेतु निमतंत्र देता हूँ कि आप महामारी से उठे सवालों, सामाजिक बीमारियों का सामना एक साथ मिलकर करें। हम सुसमाचार के आलोक में, ईशशास्त्रीय गुणों और कलीसियाई सामाजिक शिक्षा के सिद्धांतो के अनुरूप ऐसा करें। ऐसे करने के द्वारा हम यह जान पायेंगे कि कलीसिया की सामाजिक रीति द्वारा मानव परिवार दुनिया में व्याप्त गंभीर बीमारियों की चंगाई में किस भांति कगार सिद्ध होती है। उन्होंने कहा कि मेरी चाह यही है कि हम इस बात का चिंतन करते हुए एक साथ मिलकर कार्य करें, ख्रीस्त के अनुयायियों के रुप में हम एक बेहतर दुनिया का निर्माण करें, भविष्य की पीढ़ी हेतु नई आशा को बनाये रखें।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्रांसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और हे पिता हमारे प्रार्थना का पाठ करते हुए सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

05 August 2020, 13:06