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महामारी के दौरान संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण से विशेष उर्बी एत ओर्बी आशीष महामारी के दौरान संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण से विशेष उर्बी एत ओर्बी आशीष  (Vatican Media)

कोविद -19 महामारी में आशा पर किताब के लिए पोप की प्रस्तावना

संत पापा फ्राँसिस ने "एकता और आशा" शीर्षक की एक नई किताब के लिए प्रस्तावना लिखी तथा सभी लोगों को प्रोत्साहन दिया है कि वे कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप के बीच एकात्मता की खोज करें।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 28 जुलाई 2020 (रेई)- सोमवार को प्रकाशित किताब की प्रस्तावना में संत पापा ने चिंतन किया है कि ख्रीस्तियों ने महामारी से क्या सीखा।

"एकता एवं विश्वास" को कार्डिनल वाल्टर कास्पर और फादर जॉर्ज अगुस्टीन ने तैयार किया था जिसमें "कोरोनावायरस के समय में विश्वास के साक्ष्य" पर कई लेखकों के ईशशास्त्रीय चिंतन थे।  

संत पापा ने लिखा, "कोरोनोवायरस संकट ने अचानक तूफान की तरह हम सभी को आश्चर्यचकित कर दिया, हमारे परिवार, काम और सार्वजनिक जीवन को एक पल में और दुनिया के हर जगह बदल दिया है।"

उन्होंने दुःख व्यक्त किया कि अनेक लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया और साथ ही साथ, अपनी नौकरी एवं आर्थिक स्थायित्व को गवाँ दिया है। कई जगहों में लोग पास्का पर्व को असामान्य रूप से अकेले मनाया एवं संस्कारों से सांत्वना पाने में भी असमर्थ रहे।  

आनन्द का स्रोत खोजना

संत पापा ने प्रस्तावना में लिखा, "इस नाटकीय स्थिति ने मानवता की दुर्बलता, असंगतता, और मुक्ति की आवश्यकता की सीमा को उजागर किया है।"

महामारी ने हमारी खुशी के स्रोत पर सवाल करने के लिए भी मजबूर किया है तथा हमारे ख्रीस्तीय विश्वास के खजाने को खोजने के लिए प्रेरित किया है।

"यह हमें स्मरण दिलाता है कि हमने जीवन में कई महत्वपूर्ण चीजों को नजरांदाज किया है और हमें चिंतन के लिए प्रेरित किया है कि क्या वास्तव में महत्वपूर्ण और आवश्यक है एवं क्या कम आवश्यक है अथवा दिखावा मात्र है।"

परीक्षा की घड़ी में एकात्मता

संत पापा ने इसे "एक परीक्षा एवं चुनाव की घड़ी" कहा है जिसने हमारे जीवन को ईश्वर की ओर अभिमुख होने का अवसर दिया है।

संकट ने हमें दिखलाया है कि आपातकालीन परिस्थिति में हम दूसरों की एकात्मता पर निर्भर रहते हैं और उनकी सेवा नये तरीके से करने के लिए प्रेरित होते हैं। गरीबों और हमारा ग्रह जो गंभीर रूप से बीमार है उसके रोने की आवाज़ को सुनने के लिए वैश्विक अन्याय हमें झकझोर दी है।”

मौत पर पास्का विजय

संत पापा ने एक खास पास्का के अर्थ पर चिंतन किया है जिसको अनेक ख्रीस्तियों ने मजबूरन अकेले मनाया। मौत पर ख्रीस्त के विजय का पास्का संदेश दिखलाता है कि हम महामारी का सामना लकवाग्रस्त होकर नहीं कर सकते।

"पास्का हमें आशा और साहस प्रदान करता है। यह हमें एकात्मता में बलिष्ठ बनाता है। हमें बीती प्रतिद्वंद्विता से बाहर निकालता और पहचान दिलाता है कि हम सभी वृहद मानव परिवार के सदस्य हैं जो प्रत्येक सीमा के पारे जाता और जिसमें प्रत्येक व्यक्ति दूसरों के बोझ को वहन करता है।"

प्रेम का संक्रमण?

वायरस से संक्रमित होने का खतरा हमें सीख दे कि प्रेम का संक्रमण किस तरह एक हृदय से दूसरे हृदय में पार होता है।

संत पापा ने कहा, "मैं स्वास्थ्यकर्मियों, डॉक्टरों और पुरोहितों की सहज मदद और उनके वीरतापूर्ण कार्यों के लिए आभारी हूँ।"

यूखरिस्त से वंचित

संत पापा ने प्रस्तावना के लिए अपने चिंतन में याद किया है कि महामारी के पहले चरण में सरकार ने सार्वजनिक ख्रीस्तयाग पर प्रतिबंध लगायी थी जिसके कारण कई ख्रीस्तीयों को यूखरिस्त से वंचित होने के दुखद समय से गुजरना पड़ा।

अनेक लोगों ने प्रभु के नाम पर दो या दो से अधिक लोगों के एकत्रित होने में प्रभु की उपस्थिति का एहसास किया। इस तरह ऑनलाईन ख्रीस्तयाग एक आवश्यक समाधान था जिसके लिए बहुत सारे लोगों ने अपना आभार प्रकट किया है, पर वर्चुवल ख्रीस्तयाग, यूरखरिस्त के अनुष्ठान में प्रभु की सच्ची उपस्थिति का स्थान नहीं ले सकता।

संत पापा ने अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में विश्वासी सामान्य धर्मविधि के जीवन में वापस लौट गये हैं।

"ईश वचन और यूखरिस्त में पुनर्जीवित प्रभु की उपस्थिति हमें संकट के बाद हमारी प्रतीक्षा कर रही कठिन समस्याओं का सामना करने की शक्ति देती है।"

आशा और एकात्मता का नवीनीकरण

पोप फ्रांसिस ने अपनी उम्मीदों को व्यक्त करते हुए प्रस्तावना का निष्कर्ष निकाला है कि पुस्तक लोगों को "नई उम्मीद और नए सिरे से एकजुटता" की खोज करने में मदद करेगी।

"प्रभु अपने वचन एवं यूखरिस्त में रोटी तोड़ने के द्वारा, यात्रा में हमारा साथ देंगे और कहेंगे, "डरो मत। मैंने मौत को मात दे दी है।''

किताब के संबंध में

"एकता एवं विश्वास" शीर्षक की किताब जून में मूल भाषा जर्मनी के साथ, वाटिकन पब्लिशिंग हाऊस से प्रकाशित की गई थी। उसकी इताली संस्करण पिछले सप्ताह प्रकाशित हुई। कार्डिनल वाल्टर कास्पर, ख्रीस्तीय एकता को प्रोत्साहन देने हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति के अध्यक्ष हैं।

2005 में फादर अगस्टीन ने वाल्टर कास्पर संस्थान की स्थापना की है जो कि वलेंडर के दर्शनशास्त्रीय-ईशशास्त्रीय विश्वविद्यालय का हिस्सा है।

28 July 2020, 18:11