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लोम्बार्दी के डाक्टरों, धर्माध्यक्षों, और पुरोहितों के साथ संत पापा लोम्बार्दी के डाक्टरों, धर्माध्यक्षों, और पुरोहितों के साथ संत पापा  (ANSA)

संत पापा द्वारा स्वास्थ्यकर्मियों की साहसपूर्ण सेवा हेतु आभार

संत पापा फ्राँसिस ने इटली में कोविद -19 महामारी से ग्रसित उत्तरी लोम्बार्डी क्षेत्र से आये धर्मसंघियों, नागर अधिकारियों एवं डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्य सुरक्षा कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात की। लॉकडाउन के बाद यह उनका पहला आम दर्शन है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 22 जून 2020 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 20 जून को वाटिकन में उत्तरी लोम्बार्डी क्षेत्र से आये डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्य सुरक्षा कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल एवं धर्मसंघियों और नागर अधिकारियों के साथ मुलाकात कर उनके साहसपूर्ण कार्यों और सेवाओं के लिए अपना आभार प्रकट किया।

उत्तरी इटली में लोम्बार्डी प्रांत औद्योगिक और उत्पादक क्षेत्र है। देश में पहला कोविद-19 संक्रमण 21 फरवरी को लोम्बार्डी के कोडोग्नो शहर में सामने आया। लोम्बार्डी और वेनेतो प्रांत में कोडोग्नो और नौ अन्य शहरों को बंद कर दिया गया था और अंततः पूरे देश में मार्च की शुरुआत में लॉकडाउन किया गया लगा। महामारी शुरू होने के बाद से, इटली में कोविद -19 से अबतक 34,000 से अधिक लोग मारे गए हैं।

महामारी की अग्रिम पंक्तियों पर डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्य देखभाल और नागर सुरक्षा कर्मचारियों की सेना है, उन्होंने बीमारी के खिलाफ आपात स्थिति से निपटने का जोखिम उठाया और बहुतों ने बीमारों की देखभाल करते हुए खुद अपने प्राणों को अर्पित कर दिया। बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए बहुतों को एकांत में रखा गया। मृतकों के परिवारों को पुरोहितों ने सांत्वना देने की पूरी कोशिष की। इसी के क्रम में अनेक संक्रमित हो गये और उनकी भी मृत्यु हो गई। लॉकडाउन के कारण परिवार के लोग अंतिम संस्कार में भाग नहीं ले पाने के दुःख से उबर नहीं पा रहे हैं।

ये वे लोग हैं जिन्हें संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन में आयोजित पहले आम दर्शन में उनकी वीरतापूर्ण कार्य के लिए धन्यवाद दिया। इटली में 8 मार्च से तालाबंदी शुरु होते ही वाटिकन में भी आम दर्शन समारोह को बंद कर दिया गया था।

संत पापा के साथ मुलाकात करने वालों में लोम्बार्डी क्षेत्र के अध्यक्ष, मिलान महाधर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष, महामारी से बुरी तरह प्रभावित धर्मप्रांतों के धर्माध्यक्ष, पल्ली पुरोहित, धर्मसंघी, स्वास्थ्यकर्मियों के प्रतिनिधि डॉक्टर्स और सुरक्षा कर्मियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।  संत  पापा फ्राँसिस ने कहा कि उनका अभिवादन उन सभी को जाता है जिन लोगों ने खुद को महामारी की अग्रिम पंक्तियों पर पाया है, उनमें रोम के "स्पाल्नजानी" अस्पताल के शोधकर्ता भी शामिल हैं जिन्होंने वायरस का मुकाबला करने के लिए बहुत कुछ किया है। संत पापा ने कहा कि  उनका विचार इतालवी समाज  की ओर जाता हैं, जिन्होंने इन परेशान महीनों के दौरान उदारता और प्रतिबद्धता के साथ स्वास्थ्य आपातकाल का सामना करने का प्रयास किया है।

मानवता का एक दर्शनीय संकेत

संत पापा ने कहा,ʺपहले से कहीं अधिक हम डॉक्टरों, नर्सों और सभी स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ताओं के लिए आभार महसूस करते हैं, क्योंकि वे कुशलता और साहस के साथ मरीजों की सेवा करते हैं। वे मानवता का एक दृश्य संकेत है जो दिल को गर्मी प्रदान करता है।ʺ

संत पापा ने कहा, “उनमें से कई डॉक्टर बीमार पड़ गए और कुछ दुर्भाग्य से अपना काम करते हुए मर गए। हम उन्हें बहुत कृतज्ञता के साथ प्रार्थना में याद करते हैं।“

उन्होंने कहा कि इस अप्रत्याशित भयानक महामारी के बवंडर में, चिकित्साकर्मियों और पारामेडिकल स्टाफ की उपस्थिति और उदार सेवा निश्चित रूप से बीमार लोगों के लिए आराम देने वाली थी, साथ ही उनके परिवार के सदस्यों के लिए एक बहुत ही खास तरीके का संदर्भ था, जो अपने प्रियजनों के पास जा नहीं सकते थे। आप लोगों ने अपने परिवार के सदस्य के समान उनकी देखभाल की।

बीमार की बगल में दूत

मरीजों ने कहा, अक्सर उन्हें लगता था कि उनके पास "स्वर्गदूत थे जो उनके स्वास्थ्य को ठीक करने में मदद करते थे और साथ ही,उन्हें आराम, समर्थन और कभी-कभी प्रभु के साथ अंतिम मुलाकात की दहलीज तक ले जाते थे।"

उन्होंने कहा, “ये स्वास्थ्य कार्यकर्ता, अस्पताल के चैपलिन पुरोहितों की उपस्थिति में, पीड़ित लोगों के लिए प्रार्थना और ईश्वर की निकटता के साक्षी हैं। वे निकटता और कोमलता की संस्कृति के मूक शिल्पकार रहे हैं। ” संत पापा फ्रांसिस ने बड़े और छोटे कार्यों में उनकी देखभाल और रचनात्मकता को याद किया, जैसे वे अपने व्यक्तिगत सेल फोन से परिवार के सदस्यों को बुलाते हैं ताकि मरने वाले अपने प्रियजनों को अलविदा कह सकें। यह निकटता और कोमलता का चिन्ह है।”

पुरोहितों के प्रति आभार

संत पापा फ्राँसिस ने अपने संदेश के अंत में सभी याजकों को याद करते हुए कहा कि इन महीनों के दौरान, लोग पहले की तरह पवित्र मिस्सा समारोहों में भाग लेने में सक्षम नहीं हैं, लेकिन वे सामुदायिक भावना को महसूस करना बंद नहीं किया।

"उन्होंने व्यक्तिगत रूप से या एक परिवार में प्रार्थना करते हुए आध्यात्मिक रुप से एकजुटता का अनुभव किया। इस कार्य में उनसाही पुरोहितों ने रचनात्मक तरीकों से समुदाय को एकजुट करने और विश्वास को बढ़ाने में, उनके भय और पीड़ा को कम करने का प्रयास किया, जिसमें मीडिया भी शामिल है।पुरोहितों और धर्मसंघियों ने अपने प्रियजनों को खोने की पीड़ा सह रहे परिवारों का साथ दिया।  वे ईश्वर की उपस्थिति और सांत्वना का संकेत थे और उन्होंने कठिनाई की चरम स्थिति से निपटने में उनकी रचनात्मकता और परिपक्वता पर ध्यान दिया। संत पापा फ्राँसिस ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने लोगों को साहस और प्यार दिया है। संत पापा ने उन लोगों के लिए ईश्वर का शुक्रिया अदा किया जो चंगे हो गये हैं।

22 June 2020, 15:27