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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (AFP or licensors)

येसु के साथ मिशन में, 'पिता के मिशनरी', संत पापा फ्राँसिस

पेंतेकोस्त रविवार को, संत पापा फ्राँसिस ने विश्व मिशन रविवार के लिए वार्षिक संदेश जारी किया, जिसमें वर्तमान कोरोना वायरस महामारी के संदर्भ में मिशन रखा गया है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 01 जून 2020 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने विश्व मिशन रविवार 2020 के लिए अपना वार्षिक संदेश पेंतेकोस्त रविवार को जारी किया। जिसका विषय वस्तु इशायाह के ग्रंथ से लिया गया है: "मैं प्रस्तुत हूँ, मुझको भेज।" (6:8)। विश्व मिशन रविवार 18 अक्टूबर को 2020 में मनाया जाएगा।

वर्तमान संकट में मिशन

संत पापा ने 27 मार्च को प्रार्थना के असाधारण क्षण के अवसर पर व्यक्त किए गए शब्दों को याद करते हुए अपना संदेश शुरू किया। संत पापा फ्रांसिस कहते हैं वर्तामान के अंतरराष्ट्रीय संकट और भय के समय में, प्रभु हमसे पूछना जारी रखे हुए हैं,"मैं किसे भेजूं?" यहाँ तक कि हम अपनी पीड़ा और मृत्यु का सामना कर रहे होते हैं, तब भी हम “जीवन के लिए अपनी गहरी इच्छा और बुराई से मुक्ति” की याद करते हैं। यही वह जगह है जहां "ईश्वर और पड़ोसी के प्यार के लिए खुद से बाहर निकलने के निमंत्रण" के रूप में सेवा और प्रार्थना के माध्यम से हमारा मिशन उभरता है।"

मिशनरी येसु के साथ मिशनरीगण

संत पापा फ्राँसिस ने आगे कहा, कि येसु ने क्रूस पर मरते हुए अपने मिशन को पूरा किया, “जब हम खुद को निस्वार्थ भाव से दुसरों की सेवा में समर्पित करते हैं तो हम खुद को ठीक येसु की तरह पाते हैं”, हमारा मिशन, हमारा आह्वान, हमारी स्वेच्छा से भेजे जाने की उनकी इच्छा "पिता के मिशनरी" के रूप में है। "हमारा व्यक्तिगत बुलावा" इस तथ्य में निहित है कि हम कलीसिया में ईश्वर के बेटे और बेटियां हैं।"

मिशनरी के रूप में कलीसिया

संत पापा फ्राँसिस बताते हैं कि कलीसिया विशेष रूप से "येसु के मिशन को जारी रखती है।" इस प्रकार कलीसिया में बपतिस्मा प्राप्त सदस्य कलीसिया के नाम पर मिशन को आगे बढ़ाने के लिए भेजे जाते हैं। हमारे साक्ष्य और सुसमाचार की घोषणा के माध्यम से, ईश्वर "अपने प्रेम को प्रकट करना" जारी रखते हैं। इस तरह वे हर जगह और समय में "आत्मा, मन, शरीर, समाज और संस्कृतियों को छूने और बदलने में सक्षम हैं।"

एक रिश्ते का जवाब

"मिशन ईश्वर के बुलावे का एक स्वतंत्र और सचेत प्रतिक्रिया है," संत पापा हमें याद दिलाते हैं कि ईश्वर के मिशन के बुलावे पर हम तभी विचार कर सकते हैं जब हमारा कलीसिया में मौजूद येसु के साथ व्यक्तिगत रुप से प्रेम का संबंध है।" जब हम अपने जीवन में पवित्र आत्मा की उपस्थिति का अनुभव करते हैं और उसकी प्रेरणा से अपने आप को दूसरों के लिए खोलते हैं तो हम अपने आप को कलीसिया के मिशन कार्य के लिए तैयार करते हैं। यह मिशनरी कार्य विवाहित जोड़ों, धर्मसंघियों के जीवन के रोज़मर्रा के कार्यक्रमों में शामिल रहता है। एक अन्य प्रश्न संत पापा खुद से पूछने के लिए कहते हैं कि क्या हम "किसी भी समय या स्थान पर अपने विश्वास का साक्ष्य देने हेतु भेजे जाने के इच्छुक हैं?" और पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के साथ संबंध बनाये रखने के लिए तैयार हैं? और आखिरी प्रश्न यह है कि क्या हम ईश्वर की इच्छा की सेवा में पूरी तरह से अपने को समर्पित करने के लिए तैयार हैं, जैसा कि माता मरियम ने किया था?"

मिशन-जीवन के प्रति प्रतिक्रिया

कलीसिया के मिशन के लिए अभी चुनौती यह है कि "इस महामारी के समय में हमें यह समझना होगा कि हमसे ईश्वर क्या कराना चाहते हैं।" इस महामारी में लोग अकेले मर रहे हैं या घऱ पर अकेले छोड़ दिए जाते हैं, बहुतों ने अपनी नौकरी खो दी, सोशल डिस्टेंसिग के साथ जीना पड़ रहा है। संत पापा करते हैं कि इन परिस्थितियों में हमें फिर से समाजिक रिश्तों के साथ-साथ ईश्वर के साथ हमारे सांप्रदायिक संबंधों को पुनःखोजने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि यह स्थिति दूसरों के साथ संबंध स्थापित करने की हमारी जागरूकता को बढ़ा सकती है। प्रार्थना के माध्यम से ईश्वर हमारे दिल को छूते हैं और हम दूसरों की जरूरतों को देख पाते और उनकी मदद में आगे बढ़ते हैं। संत पापा ने कहा कि इस महामारी के समय हममें से जो लोग कलीसिया के धर्म-विधि और मिस्सा समारोहों में भाग नहीं ले पाए हैं वे अब "उन कई ईसाई समुदायों के अनुभवों को समझ सकते हैं जिन्हें हर रविवार पवितिर मिस्सा में भाग लेने का अवसर नहीं मिलता है।"

मैं किसे भेजूं?

संत पापा ने कहा कि नबी इशायाह द्वारा व्यक्त ईश्वर का प्रश्न "मैं किसे भेजूं?" एक बार फिर हमें संबोधित किया गया है और एक उदार और आश्वस्त प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है: "मैं प्रस्तुत हूँ, मुझको भेज!"(6:8)।संत पापा फ्राँसिस अपने संदेश को समाप्त करते हुए कहा कि विश्व मिशन रविवार एक ऐसा दिन होगा जिस दिन हम प्रार्थना, चिंतन और दान चंदा के माध्यम से पुन: पुष्टि करने में सक्षम होंगे, जो उनके कलीसिया में येसु के मिशन में सक्रिय रुप से भाग लेते हैं। संत पापा फ्रांसिस ने बताया कि 18 अक्टूबर को लिया गया दान संग्रह "दुनिया भर में लोगों के उद्धार और कलीसियाओं की आध्यात्मिक और भौतिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पोंटिफिकल मिशन सोसाइटी द्वारा संत पापा के नाम पर किए गए मिशनरी कार्यों का समर्थन करेगा।"  

01 June 2020, 17:33