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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

आत्मकेंद्रित जीवन आनन्द की ओर नहीं लेता, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 10 मई को वाटिकन की लाईब्रेरी से लाईव प्रसारण के माध्यम से स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया। स्वर्ग की रानी प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासों को सम्बोधित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार, 11 मई 2020 (रेई)- संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 10 मई को वाटिकन की लाईब्रेरी से लाईव प्रसारण के माध्यम से स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया। स्वर्ग की रानी प्रार्थना के पूर्व उन्होंने विश्वासों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनों, सुप्रभात।

आज के सुसमाचार पाठ में (यो.14,1-12) तथाकथित येसु के "विदाई भाषण" के आरम्भ को सुनते हैं। ये वे शब्द हैं जिनको येसु ने अंतिम व्यारी के अंत में, दुःखभोग के ठीक पहले अपने शिष्यों से कहा था। इस नाटकीय समय में, येसु यह कहते हुए शुरू करते हैं, "तुम्हारा जी घबराये नहीं" (पद.1) संत पापा ने कहा कि हमारे जीवन के कठिन पल में वे हमसे भी यही कहते हैं। परन्तु, हमें क्या करना चाहिए कि हमारा हृदय नहीं घबराये? हृदय क्यों घबराता है?

मुझमें विश्वास करो

प्रभु घबराहट के समय में दो उपाय बतलाते हैं। पहला उपाय है -कि येसु कहते हैं, "मुझमें विश्वास करो" जो एक सैद्धांतिक, अस्पष्ट सलाह के समान लगता है, जबकि येसु ठोस रूप से कहना चाहते हैं। वे जानते हैं कि जीवन में अधिक अशांति और परेशानी, नहीं कर पाने, एकाकी महसूस करने एवं संदर्भ के अभाव में होती है। यह पीड़ा जिसमें कठिनाई, परेशानी बढ़ा देती है, इससे अकेले निपटा नहीं जा सकता। हमें येसु के सहारे की जरूरत है, इसीलिए हमें उनपर भरोसा रखना है। अर्थात् अपने आप पर भरोसा नहीं करना बल्कि अपना उनपर भार डालना है क्योंकि अशांति से मुक्त होने लिए भरोसा से पार होना पड़ता है। अतः येसु पर भरोसा रखते हुए हम छलांग लगायें। यह अशांति से मुक्ति है। येसु जी उठे हैं और जीवित हैं ताकि हमेशा हमारी बगल में रहें। इसलिए हम उनसे कह सकते हैं, येसु मैं विश्वास करता हूँ कि आप जी उठे हैं और मेरी बगल में रहते हैं, विश्वास करता हूँ कि आप मुझे सुनते हैं। मैं उन चीजों को आपके पास लाता हूँ जो मुझे अशांत और चिंतित करते। मैं आप पर विश्वास करता और अपने आपको तुझे सौंपता हूँ।

मेरे पिता के यहाँ बहुत सारे निवास स्थान हैं

संत पापा ने घबराहट का दूसरा उपाय बतलाया, जिसको येसु इस प्रकार व्यक्त करते हैं- "मेरे पिता के यहाँ बहुत सारे निवास स्थान हैं।" मैं तुम्हारे लिए जगह तैयार करने जाता हूँ। संत पापा ने कहा कि यही येसु ने हमारे लिए किया। उन्होंने स्वर्ग में हमारे लिए जगह रखा है। उन्होंने हमारी मानवता को अपने ऊपर लिया ताकि उसे मृत्यु के परे ले सकें, एक नयी जगह पर, स्वर्ग में, ताकि जहाँ वे हैं वहाँ हम भी हो सकें। यह निश्चित है जो हमें सांत्वना देता है कि हम प्रत्येक के लिए एक स्थान सुरक्षित है। मेरे लिए भी एक जगह है। हम हरेक जन कह सकते हैं –एक जगह मेरे लिए भी है।

हम इंतजार कर रहे हैं, हम मूल्यवान हैं। ईश्वर हमसे प्रेम करते हैं, हम उनके पुत्र-पुत्रियाँ हैं और उन्होंने हमारे लिए एक सुन्दर और योग्य स्थान : स्वर्ग, सुनिश्चित किया है। हम न भूलें कि स्वर्ग में वह स्थान हमारी प्रतीक्षा कर रहा है। हम यहाँ एक यात्री हैं। हम स्वर्ग के लिए बनाये गये हैं, अनन्त जीवन के लिए, हमेशा जीने के लिए और उसके लिए जिसकी कल्पना हम अभी नहीं कर सकते, किन्तु उसकी कल्पना करना और भी अधिक सुखद है कि ईश्वर के साथ एवं दूसरों के साथ संयुक्त होकर सब कुछ आनन्दमय हो जायेगा, आँसू नहीं रह जायेगा, न शिकायत होगी, न विभाजन और न ही परेशानियाँ।

येसु मार्ग हैं

संत पापा ने कहा किन्तु हम किस तरह स्वर्ग पहुँच सकते हैं? इसके लिए कौन सा रास्ता है? येसु का निर्णायक वाक्यांश यहाँ है, "आज मैं तुमसे कहता हूँ, मैं मार्ग हूँ।" (पद.6) स्वर्ग चढ़ने के लिए येसु मार्ग हैं। यदि उनके साथ अच्छा संबंध रखना है तो प्रेम से उनका अनुसरण करना है एवं उनके बताये मार्ग पर चलना है। संत पापा ने कहा, "मैं ख्रीस्तीय हूँ, आप ख्रीस्तीय हैं, हम सभी ख्रीस्तीय हैं, हम अपने आप से एक सवाल कर सकते हैं, मैं किस रास्ते पर चल रहा हूँ?" ऐसे भी रास्ते हैं जो स्वर्ग नहीं पहुँचाते, वे रास्ते हैं दुनियादारी के, अपने आप पर भरोसा रखने, सत्ता एवं अहम के रास्ते।

येसु के रास्ते

येसु के रास्ते हैं- विनम्रता, प्रेम, प्रार्थना, दीनता, भरोसा, एवं दूसरों की सेवा। अपने आपको नहीं बल्कि येसु को नायक मानने का रास्ता और प्रतिदिन यह प्रश्न करते हुए आगे बढ़ना, "येसु आप मेरे इस चुनाव को क्या सोचते हैं? इस परिस्थिति में मुझे, इन लोगों के साथ क्या करना चाहिए? येसु से ये सवाल करना अच्छा है जो मार्ग हैं, स्वर्ग की ओर रास्ता दिखलाने वाले हैं। मरिया, स्वर्ग की रानी, हमें येसु का अनुसरण करने में मदद दे, जिन्होंने हमारे लिए स्वर्ग को खोल दिया है।"  

इतना कहने के बाद संत पापा ने स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

11 May 2020, 14:46