खोज

Vatican News
संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

संत पापा ने इतालवी टीवी शो को आश्चर्यचकित कर दिया

संत पापा फ्राँसिस ने इतालवी टीवी शो, "अ सूआ इमाजिने" के दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया। संत पापा दूसरों की मदद करने के लिए अपना जीवन अर्पित करने वालों के प्रति अपनी निकटता प्रकट की।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 11 अप्रैल 2020 (वाटिकन न्यूज) : एक इटालियन टेलीविज़न शो "अ सुआ इमाजिने" (उनकी छवि में) की होस्ट लोरेना बियांकेत्ती ने फोन करने वाले की आवाज़ को तुरंत पहचान लिया और कहा, "संत पापा फ्राँसिस! कार्यक्रम में आपका स्वागत है।"

संत पापा ने उत्तर दिया, "आपने मेरी आवाज़ को पहचाना!"

लोरेना ने संत पापा को फोन करने के लिए धन्यवाद दिया, साथ ही उन्होंने संत पापा के पिता तुल्य प्रेम और इस कष्ट की घड़ी को धैर्य के साथ सामना करने हेतु प्रेरित करने के लिए धन्यहाद दिया। फिर, किसी भी अन्य मेजबान के रूप में उन्होंने संत पापा से पूछा, "संत पापा", "आप इन दिनों कैसे जीवन व्यतीत कर रहे हैं?"

आज का "क्रूस"

संत पापा ने कहा,"मैं क्रूस पर चढ़ाए गए प्रभु और इतिहास के क्रूस की कई कहानियों में से, आज की इस महामारी के बारे में के बारे में सोच रहा हूँ।" फिर संत पापा ने उन लोगों को सूचीबद्ध किया जिनका वे अक्सर उल्लेख करते रहे हैं: चिकित्सक, नर्स, पुरोहितगण और धर्मबहनें जिन्होंने सैनिकों की तरह, अपने प्राणों को न्यौछावर कर दिया। दूसरों की सेवा करते हुए उनकी मृत्यु हो गई। संत पापा ने उनकी तुलना क्रूस के नीचे खड़ी माता मरिया से किया। उन्होंने क्रूस अपने समुदायों में, अस्पतालों में, बीमारों का इलाज करते हुए पाया। वे "आज सूली पर चढ़े हुए हैं, प्यार से अपना जीवन अर्पित कर रहे हैं।”

आशा

संत पापा ने इस बात को रेखांकित किया कि वे उन लोगों के निकट हैं जो पीड़ित हैं, खासकर महामारी के कारण। हालाँकि, वे आशा के साथ आगे की ओर देख रहे है, क्योंकि आशा कभी भी किसा को निराश नहीं करती है। हालंकि यह दर्द को दूर नहीं करती है, लेकिन यह किसी को निराश भी नहीं करती। ”

अंतिम शब्दः प्रेम

लोरेना ने फिर एक और सवाल पूछा: "तो, संत पापा, एक बार फिर, सब कुछ के बावजूद, यह पुनरुत्थान का ईस्टर होगा, शांति का ईस्टर?"

संत पापा ने कहा, "ईस्टर हमेशा पुनरुत्थान और शांति में समाप्त होता है", इसका मतलब यह नहीं है कि "सुखद अंत", "लेकिन एक प्रेमपूर्ण प्रतिबद्धता जो आपको कठिन रास्ते में आगे बढ़ाती है। हमारे प्रभु ने कठिन रास्ते की चढ़ाई पूरी कर ली है। यह हमें आराम देता है और हमें आगे बढ़ने की ताकत देता है।”

11 April 2020, 17:38