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साप्ताहिक आम दर्शन समारोह के अवसर पर सन्त पापा फ्राँसिस- 26.02.2020 साप्ताहिक आम दर्शन समारोह के अवसर पर सन्त पापा फ्राँसिस- 26.02.2020  

बेहतर विश्व के लिये ख़तरों का सामना करने को तत्पर रहें युवा

विश्व युवा दिवस 2020 के उपलक्ष्य में जारी अपने सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने युवाओं का आह्वान किया है कि विश्व को एक बेहतर स्थल बनाने हेतु वे ख़तरों का सामना करने के लिये भी तैयार रहें।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 6 मार्च 2020 (रेई, वाटिकन रेडियो): विश्व युवा दिवस 2020 के उपलक्ष्य में जारी अपने सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस ने युवाओं का आह्वान किया है कि विश्व को एक बेहतर स्थल बनाने हेतु वे ख़तरों का सामना करने के लिये भी तैयार रहें।

सम्पूर्ण विश्व में धर्मप्रान्तीय स्तर पर प्रति दूसरे वर्ष मनाये जानेवाले विश्व युवा दिवस का विषय इस वर्ष, सन्त लूकस रचित सुसमाचार से लिया गया प्रभु येसु का उदबोधन है: "युवा व्यक्ति मैं तुमसे कहता हूँ, उठो!"

"उठो!" 2020

2020 के युवा सन्देश के विषय पर ध्यान आकर्षित कराते हुए सन्त पापा फ्राँसिस कहते हैं कि उस युवा व्यक्ति के लिये भी आशा बरकरार है जो अपनी जीवन शक्ति, सपने, आशा और उत्साह खो चुका है। उन्होंने कहा कि इस आशा का स्रोत हैं, प्रभु येसु ख्रीस्त जो अपने पुनरुत्थान की शक्ति के साथ वैसे ही हमारे समक्ष खड़े रहते हैं जैसे वे मृतक बेटे की माँ के समक्ष खड़े थे। वे आज भी युवाओं को उसी तरह सम्बोधित कर रहे हैं जैसे उन्होंने मृतक युवा से उठने को कहा था, ''युवक, मैं तुमसे कहता हूँ  उठो।'' 

पीड़ा और मृत्यु

सन्देश में सन्त पापा फ्राँसिस "पीड़ा और मृत्यु को देखने की येसु  की क्षमता" पर चिन्तन करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रभु येसु जनसमुदाय के बीच भी एक माँ की पीड़ा को देख पाये, जबकि आज के विश्व में हम ख़ुद कितनी बार अन्यों की पीड़ा से रुबरू होते हैं किन्तु पीड़ा को उबारने के लिये कुछ नहीं करते। दुर्भाग्यवश, उन्होंने कहा, "हमारी पहली प्रतिक्रिया अपने सेल फोन से एक तस्वीर लेने की होती है, जबकि पीड़ित व्यक्ति की आँखों में देखने की हमें चिन्ता नहीं रहती।"

सन्त पापा ने कहा, "अनेक युवा व्यक्ति अपने आप को मृत महसूस करते हैं, इसलिये कि उन्होंने आशा को खो दिया है। कुछ वैसे भी हैं जो फिज़ूल की बातों एवं बेकार की चीज़ों में अपना जीवन गँवा रहे हैं, वे इस भ्रम में पड़े हैं कि वे जी रहे हैं जबकि आन्तरिक रूप से वे कब के मर चुके हैं।"

विफलताओं से डरें नहीं

सन्त पापा ने युवाओं का आह्वान किया कि वे नकारात्मक परिस्थितियों का सामना करें तथा साहस के साथ उन्हें पार करने का प्रयास करें। विफलताओं से डरें नहीं क्योंकि विफलताएँ मानव जीवन का अभिन्न अंग हैं, जिनपर विजय पाने के लिये ईश कृपा की ज़रूरत है।

उन्होंने कहा कि युवाओं को येसु की तरह ही दया करना सीखना होगा, अन्यों की पीड़ा के प्रति संवेदनशीलता रखनी होगी, जो विलाप करते हैं, उनका साथ विलाप करना और उन्हें सान्तवना देना सीखना होगा तब ही वे विश्व में आशा के स्रोत एवं बेहतर विश्व के निर्माण में सक्षम बन सकेंगे।

06 March 2020, 11:19