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पूर्वी रीति की कलीसियाओं की राहत एजन्सियों के प्रतिनिधियों के साथ पूर्वी रीति की कलीसियाओं की राहत एजन्सियों के प्रतिनिधियों के साथ  (Vatican Media)

युवा ऑरथोडोक्स पुरोहितों से सन्त पापा फ्राँसिस

सन्त पापा फ्राँसिस ने ऑरथोडोक्स महाधर्माध्यक्ष बेरसामियान तथा धर्माध्यक्ष एल-सोरियानी के नेतृत्व में रोम आये युवा ऑरथोडोक्स पुरोहितों एवं मठवासियों का अभिवादन किया तथा पूर्वी रीति की कलीसियाओं के धर्माधिपतियों के प्रति इस मुलाकात के लिये धन्यवाद ज्ञापित किया।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 21 फरवरी 2020 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन में शुक्रवार को सन्त पापा फ्राँसिस ने पूर्वी रीति की कलीसियाओं के युवा ऑरथोडोक्स पुरोहितों एवं मठवासियों से साक्षात्कार कर उन्हें अपना सन्देश दिया।

सन्त पापा फ्राँसिस ने ऑरथोडोक्स महाधर्माध्यक्ष बेरसामियान तथा धर्माध्यक्ष एल-सोरियानी के नेतृत्व में रोम आये युवा ऑरथोडोक्स पुरोहितों एवं मठवासियों का अभिवादन किया तथा पूर्वी रीति की कलीसियाओं के धर्माधिपतियों के प्रति इस मुलाकात के लिये धन्यवाद ज्ञापित किया।  

वरदानों का आदान-प्रदान

सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, "प्रत्येक साक्षात्कार और भेंट का अर्थ होता है वरदानों का आदान-प्रदान। जब ईश्वर की माता ने एलीज़ाबेथ की भेंट की थी, तब उन्होंने ईश्वर से मिले वरदान में उन्हें भी भागीदार बनाया था। इसी प्रकार मरियम को देखकर एलीज़ाबेथ को भी लगा कि उनकी कोख में पल रहा बच्चा उछल पड़ा हो और वे पवित्रआत्मा से परिपूर्ण होकर मरियम को आशीर्वाद देने लगी थी।"

सन्त पापा ने कहा, "मरियम एवं एलीज़ाबेथ के सदृश ही कलीसिया भी अपने आपमें पवित्रआत्मा के वरदानों को समेटे हुए है ताकि वह सबके लाभ के लिये उसे बाँट सके। अस्तु, जब हम ख्रीस्तीय प्रभु येसु के नाम पर एक दूसरे की भेंट करते हैं, तब हम वरदानों के आदान-प्रदान में सक्षम बनते हैं। आपकी भेंट आपके लिये ज्ञान में विकसित होने का ही एक अवसर नहीं है, अपितु हम काथलिकों के लिये भी पवित्रआत्मा के वरदान को ग्रहण करने का सुअवसर है।"

कठिनाई के बावजूद साक्ष्य

पूर्वी रीति की कलीसियाओं द्वारा कठिनाइयों के क्षणों में भी सुसमाचार का साक्ष्य देते रहने के लिये सन्त पापा ने ईश्वर के प्रति हार्दिक धन्यवाद दिया और कहा कि ऑरथोडोक्स कलीसियाओं ने हिंसा और युद्ध के घावों के बावजूद येसु ख्रीस्त में अपने विश्वास को बनाये रखा है जो केवल ईश कृपा का ही फल है।  

सन्त पापा ने आशा व्यक्त की युवा ऑरथोडोक्स पुरोहितों एवं मठवासियों की रोम यात्रा, ईश्वर की महिमा के लिये, काथलिकों एवं ऑरथोडोक्स ख्रीस्तीयों के बीच पूर्ण एकता एवं सहभागिता के मार्ग को प्रशस्त करेगी, जिसकी अभिलाषा स्वयं प्रभु येसु ख्रीस्त करते हैं।

           

21 February 2020, 11:08