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ब्राजील के लोगों के साथ संत पापा फ्राँसिस ब्राजील के लोगों के साथ संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

ब्राजील के चालीसा भ्रातृत्व आंदोलन के लिए संत पापा की सराहना

संत पापा फ्राँसिस ने ब्राजीलियाई कलीसिया के भ्रातृ संघ को चालीसा काल के अवसर पर एक संदेश भेजा तथा काथलिकों को प्रोत्साहन दिया कि वे मन–परिवर्तन एवं सेवा को एक साथ लें।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 26 फरवरी 2020 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने संदेश में लिखा, "हम चालीसा काल शुरू कर रहे हैं, जो प्रार्थना एवं मन-परिवर्तन का एक विशेष समय है जिसमें हम प्रभु के महान रहस्य को मनाने की तैयारी करते हैं।" 

आंदोलन का समापन खजूर रविवार को दान संग्रह के द्वारा किया जाता है जिसकी राशि स्थानीय धर्मप्रांत को समाज सेवा योजनाओं की मदद हेतु भेजी जाती है।

मन-परिवर्तन एवं सेवा

चालीस दिनों तक हम जीवन के गहरे अर्थ पर चिंतन करने के लिए बुलाये गये हैं, यह जानने के लिए कि केवल ख्रीस्त में एवं ख्रीस्त के साथ हम पीड़ा एवं मृत्यु के रहस्य का उत्तर पा सकते हैं। हम मृत्यु के लिए नहीं बल्कि जीवन के लिए बनाये गये थे, परिपूर्ण एवं अनन्त जीवन प्राप्त करने के लिए।(यो. 10:10)

संत पापा ने लिखा, "मैं खुश हूँ कि पाँच दशकों से भी अधिक, ब्राजीलियाई कलीसिया ने चालीसा काल में भ्रातृत्व आंदोलन को जारी रखा है और भाई-बहनों की सेवा एवं मन-परिवर्तन को अलग नहीं करने का प्रचार किया है, विशेषकर, उन लोगों के लिए जो सबसे अधिक जरूरतमंद हैं।"

चालीसा काल को बेहतर तरीके से जीना

इस साल आंदोलन की विषयवस्तु जीवन के मूल्य एवं इसकी देखभाल करने के लिए हमारी जिम्मेदारी पर जोर देता है क्योंकि जीवन एक वरदान है, यह ईश्वर का प्रेमपूर्ण उपहार है जिसकी हमें लगातार देखरेख करनी है, विशेषकर, कई तरह की पीड़ाओं के बीच जो चारों ओर बढ़ रहे हैं। पृथ्वी की आवाज जो दुनिया के वंचित लोगों की आवाज के साथ एक होकर पुकार रही है वह शोकित होकर दूसरी दिशा की मांग कर रही है। अतः हम समारितानी कलीसिया बनने के लिए बुलाये जा रहे हैं। (अपारेचिदा दस्तावेज, 26)

हम यह जान लें कि उदासीनता के वैश्विकरण से ऊपर उठना तभी संभव होगा ˸ जब हम भले समारी के अनुसरण करने के लिए तत्पर होंगे।  (लूक. 10, 25-37) यह दृष्टांत जो हमें चालीसा काल को बेहतर तरीके से जीने के लिए प्रेरित करता है, तीन आधारभूत मनोभवों को प्रस्तुत करता है ˸ देखना, करुणा से भर जाना और सेवा करना। ईश्वर के समान बनना जो मदद के लिए पीड़ितों की पुकार सुनते हैं, हमें अपना मन और हृदय खोलना है कि हम जरूरतमंद भाई-बहनों की आवाज सुन सकें।  

सहानुभूति करुणा में बदल जाती है

संत पापा ने कहा है कि चालीसा काल एक उपयुक्त समय है कि हम ईश वचन को सुनें जो हमें मन-परिवर्तन का आह्वान देता है, कि हम करुणा से भर कर, पीड़ित लोगों की आवाज सुनें और उनकी मदद करें। यह एक ऐसा समय है जब करुणा को एकात्मता और सेवा में प्रकट किया जा सकता है। "धन्य हैं वे जो दयालु हैं उन पर दया की जायेगी।"

संत पापा ने संत दोलचे दोस पोब्रेस की मध्यस्थता द्वारा प्रार्थना की जिन्होंने दूसरों का दुःख देखा, करुणा की भावना से प्रेरित हुईं एवं उनकी सेवा की, करुणावान ईश्वर से प्रार्थना करें कि इस चालीसा काल में भ्रातृत्व आंदोलन द्वारा जीवन के मूल्य को सुदृढ़ किया जा सके एवं उसे एक उपहार के रूप में देखा जा सके। उन्होंने अंत में सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

26 February 2020, 15:44