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Vatican News
रोबोट रोबोट  (ANSA)

सार्वजनिक हित पर कलीसिया की सामाजिक शिक्षा

संत पापा फ्राँसिस ने "अच्छा एल्गोरिथम" कृत्रिम बुद्धि ˸ नैतिकता, कानून, स्वास्थ्य" शीर्षक पर आयोजित कार्याशाला के प्रतिभागियों को संदेश भेजा। कार्याशाला का आयोजन वाटिकन में जीवन के लिए गठित परमधर्मपीठीय की अकादमी द्वारा 26 से 28 फरवरी को किया गया था।
उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 29 फरवरी 20 (वीएन)˸ एल्गोरिथम के नैतिक विकास या अलगोर-नीति के नए उभरते अनुशासन में, कलीसिया के सामाजिक शिक्षा के सिद्धांतों द्वारा, खासकर, व्यक्ति की प्रतिष्ठा, न्याय, प्रतिस्थापन एवं एकात्मता को महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

संत पापा फ्राँसिस के संदेश को शुक्रवार को "अच्छा एल्गोरिथम" कृत्रिम बुद्धि ˸ नैतिकता, कानून, स्वास्थ्य" शीर्षक पर आयोजित कार्याशाला के प्रतिभागियों के सामने प्रस्तुत किया गया।

नैतिक ढांचा एवं मानव अधिकार

अपने संदेश में संत पापा फ्राँसिस ने गौर किया है कि तकनीकी जगत की जटिलता हमसे एक स्पष्ट नैतिक ढांचा की मांग करती है जिससे कि हम अपने समर्पण द्वारा सभी लोगों की सेवा, बिना भेदभाव अथवा बहिष्कार के, उनकी संपूर्णता से कर सकें।

उन्होंने कहा कि अलगोर नीति एक सेतु बनकर उन सिद्धांतों को सक्षम करने के लिए, डिजिटल तकनीकी में प्रभावी सह-अनुशासनात्मक संवाद के माध्यम से शुरू सकता है। हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि विश्व के विभिन्न दर्शनों के बीच मुलाकात में, सामान्य तर्क पर मानव अधिकार ही, एक साथ आने के महत्वपूर्ण बिन्दू हैं।

उन्होंने कहा, "इस क्षेत्र में अधिकार एवं कर्तव्य पर नवीकृत चिंतन हेतु अच्छे एल्गोरिथम की आवश्यकता है।"  

चुनौतियाँ एवं खतरे

संत पापा ने कहा कि डिजिटल युग के परिवर्तनों ने वास्तव में अप्रत्याशित समस्याएं एवं स्थितियाँ उत्पन्न की हैं जो हमारे व्यक्तिगत एवं सामूहिक लोकाचार को चुनौती देता है। व्यक्तिगत स्तर पर डिजिटल युग, जगह, समय और शरीर के दृष्टिकोण में बदलाव लाया है तथा सामाजिक स्तर पर यूजर्स को केवल उपभोक्ता, व्यक्तिगत लाभ पर केंद्रित कुछ ही लोगों के हाथों के शिकार के रूप में आंका जाता है। एल्गोरिथम अब ऐसे आंकड़े निकालेगा, जो वाणिज्यिक या राजनीतिक के मकसद से, अक्सर हमारे ज्ञान के बिना, मानसिक और संबंधपरक आदतों को नियंत्रित करते हैं।

29 February 2020, 18:02