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संत पेत्रुस महागिरजाघर में विश्वासियों के साथ संध्या वंदना, आराधना और ते-देयुम करते हुए संत पापा संत पेत्रुस महागिरजाघर में विश्वासियों के साथ संध्या वंदना, आराधना और ते-देयुम करते हुए संत पापा  (AFP or licensors)

ईश्वर नगन्य लोगों द्वारा हमारे बीच आते हैं, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने वर्ष 2019 को शाम की प्रार्थना और ते देउम (धन्यवाद) के गायन के साथ बंद किया और अपने प्रवचन में हमसे सहायता की गुहार करने वालों में ईश्वर की उपस्थिति पर विचार करने का आग्रह किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार 1 जनवरी 2020 ( वाटिकन न्यूज) : कैलेंडर वर्ष 2019 के अंत में,  संत पापा फ्राँसिस ने वर्ष भर में मिले कृपा दानों के लिए ईश्वर को धन्यवाद देने हेतु संत पेत्रुस महागिरजाघर में विश्वासियों के साथ मिलकर संध्या वंदना, आराधना और ते-देयुम (विशेष धन्यवाद) प्रार्थना की अगुवाई की।

अपने प्रवचन में, संत पापा ने चिंतन किया कि कैसे ईश्वर समाज के हाशिये पर स्थित सबसे छोटे शहर का चुनाव कर हमारे पास आते हैं।

उन्होंने कहा, "ईश्वर का निर्णय स्पष्ट है, अपने प्यार को प्रकट करने के लिए, उसने एक छोटा और तिरस्कृत शहर को चुना और जब वे येरूशलेम पहुंचते हैं, तो वे पापियों और परित्यक्त लोगों के समूह में शामिल होते हैं।"

ईश्वर की उपस्थिति

संत पापा ने कहा कि येसु का जन्म और प्रारंभिक छुपा हुआ जीवन,हमें  हमारे शहरों के भीतर गरीबों और नगन्य लोगों में उनकी उपस्थिति को "उजागर" करने का निमंत्रण है, क्योंकि प्रभु येसु ने उन्हें कभी नहीं छोड़ा।

"हम ईश्वर से नई आँख, विश्वास की आँख की कृपा मांगे जिससे कि हम अपने घरों, पड़ोस और चौकों में ईश्वर की उपस्थिति को पहचान सकें। ईश्वर हमारे बाच रहते हैं हमारे साथ चलते हैं हमें बस चिंतनशील नजर और विश्वास की निगाह चाहिए।

महिला के गर्भ में मुक्ति की शुरुआत

संत पापा ने कहा कि ईश्वर ने "एक छोटी, गरीब महिला के गर्भ में" लोगों के उद्धार का काम शुरू किया, न कि मंदिर की महानता में।

उन्होंने कहा, "ईश्वर की यह पसंद असाधारण है!" "वे नागर और धार्मिक संस्थानों में शक्तिशाली पुरुषों के माध्यम से इतिहास नहीं बदलते, लेकिन समाज के हाशिये की महिलाओं जैसे मरियम "के साथ इसकी शुरुआत करते हैं ।

संत पापा ने कहा, हमारी प्रतिक्रिया, शांति के लिए काम करना चाहिए और जरूरतमंद लोगों की मदद करना चाहिए।

"ईश्वर यह देखकर आनन्दित होते हैं कि प्रत्येक दिन कितने भलाई के काम पूरे होते हैं। भाईचारे और एकजुटता को बढ़ावा देने में हम कितने समर्पण और शक्ति के साथ काम करते हैं।

शहरी जटिलता

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि रोम एक जटिल शहर है - "समस्याओं, असमानताओं, भ्रष्टाचार और सामाजिक तनावों" के साथ-साथ, एक ऐसी जगह है जहां "ईश्वर हमें अपना वचन देते हैं जिससे कि हम विश्वास, आशा और प्यार से प्रेरित होकर सबकी भलाई के लिए काम करें।”

उन्होंने कई लोगों से मुलाकात की, जो रोम के धड़कते हुए हृदय का प्रतिनिधित्व करते हैं। संत पापा उन्हें "आत्मा के जीवित जल के नक्षत्र" कहते हैं।

उन्होंने कहा, "वास्तव में, ईश्वर ने कभी भी नगण्य और गरीबों के माध्यम से हमारे शहर के इतिहास और चेहरे को बदलना बंद नहीं किया है, वे उन्हें चुनते हैं, उन्हें कार्रवाई के लिए प्रेरित करते हैं, उन्हें एकजुट करते हैं पुलों और दीवारों का निर्माण करने हेतु माध्यम बनाते हैं।

जरुरतमंदों में ईश्वर को पहचानना

अंत में, संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि ईश्वर रोम की कलीसिया को "दूसरों के साथ जुड़ने और जरुरतमंदों की पीड़ा को सुनने के लिए प्रेरित करते हैं।"

उन्होंने कहा कि सुनने के माध्यम से हम दूसरों को प्यार करते हैं। यह अपने आस-पास के लोगों में ईश्वर के कार्य और उपस्थिति को पहचानने का एक तरीका है।

01 January 2020, 16:15