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 संत पापा फ्राँसिस कार्डिनल लदारिया के संग संत पापा फ्राँसिस कार्डिनल लदारिया के संग  (Vatican Media)

समाज सभ्य है यदि यह नष्ट करने की संस्कृति का सामना करे

संत पापा फ्राँसिस ने बृहस्पतिवार 30 जनवरी को विश्वास के सिद्धांत के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के तत्वधान में आयोजित सभा के प्रतिभागियों से मुलाकात की तथा विश्वास एवं नैतिकता पर काथलिक सिद्धांत की अखंडता को बढ़ावा देने और उसकी रक्षा करने के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 30 जनवरी 2020 (रेई)˸ संत पापा ने ख्रीस्तीय धर्मसिद्धांत के बारे कहा कि यह अपने आप में कठोर और बंद सिद्धांत नहीं है बल्कि यह एक विचारधारा है जो मौसम बदलने के साथ बदलता है। यह एक गतिशील वास्तविकता है जो अपने मूल के साथ विश्वस्त बना रहता है जो हर पीढ़ी में नवीकृत होता रहता है और जो एक चेहरा, एक शरीर और एक नाम में सम्माहित है वह है, पुनर्जीवित ख्रीस्त।

पुनर्जीवित ख्रीस्त में विश्वास हमें दूसरों के लिए खोलता है और हम उनकी आवश्यकताओं को पहचानते हैं। अतः विश्वास के हस्तांतरण के लिए जरूरी है कि इसके ग्राहकों पर भी ध्यान दिया जाए उन्हें पहचाना और प्रेम किया जाए। संत पापा ने कहा कि इस दृष्टिकोण से ‘जीवन के महत्वपूर्ण और अंतिम चरणों में लोगों की देखभाल’ विषय पर चिंतन के लिए प्रतिबद्ध होना महत्वपूर्ण है। वर्तमान सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्टभूमि उस जागरूकता को मिटा रहा है जो मानव जीवन को मूल्यवान बनाता है। यह उस हद तक भी देखा जा रहा है जहाँ जीवन का तिरस्कार किया जाता एवं उसे अयोग्य माना जाता है। सच्चे मूल्य को खो देने की इस परिस्थिति में, एकात्मता एवं मानवीय तथा ख्रीस्तीय भाईचारा की भावना भी असफल हो रही है।

संत पापा ने कहा कि बीमार व्यक्ति को सेवा, स्नेह, सहानुभूति एवं देखभाल की आवश्यकता होती है जैसा कि सुसमाचार में भले समारी के दृष्टांत में हम पाते हैं।

सम्मेलन की विषयवस्तु पर प्रकाश डालते हुए संत पापा ने कहा कि बीमारी, कठिनाई एवं जीवन के अंतिम पड़ाव की स्थिति कलीसिया से आह्वान करती है कि वह पीड़ित व्यक्तियों की देखभाल करे। भला समारी का उदाहरण हमें सिखलाता है कि हम हृदय परिवर्तन करें। लोग कई बार देख नहीं सकते हैं क्योंकि हृदय में दया की भावना नहीं होती। जबकि जिस व्यक्ति में दया की भावना होती है वे उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रहते हैं वे उसके दुःख में दुःखी होते एवं उसकी सहायता करते हैं।  

बीमार व्यक्ति के आस-पास एक मानवीय संबंधों का वातावरण तैयार किया जाए ताकि जब चिकित्सा को बढ़ावा देने के साथ साथ आशा भी उत्पन्न की जा सके, खासकर, उन परिस्थितियों में जहाँ शारीरिक बीमारी के साथ भावनात्मक एवं आध्यात्मिक बेचैनी होती है। मानव जीवन अपने अनन्त लक्ष्य के कारण, अनिश्चितता और नाजुक स्थिति में भी मूल्यों एवं प्रतिष्ठा को बनाये रखता है।  

कोलकाता की संत मदर तेरेसा ने मानव प्रतिष्ठा के प्रति सम्मान एवं पहचान देने के लिए लोगों के करीब रहने और उदारता का रास्ता अपनाया तथा उन्हें मानवीय ढंग से मरने में मदद दी। उनका कहना था कि "जिसने किसी के जीवन की राह पर केवल एक मशाल जलाया है, उसका जीवन व्यर्थ नहीं होगा।"

संत पापा ने अस्पतालों में सेवा देने वाले सभी कर्मचारियों को अच्छी सेवा देने की सलाह दी ताकि असाध्य बीमारी से ग्रसित व्यक्ति भी सम्मान के साथ जी सके तथा जीवन के अंतिम क्षणों में प्रियजनों के स्नेह को महसूस कर सके।

उन्होंने कहा, "मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि इस कार्य को जारी रखें।" संत पापा ने विश्वास के सिद्धांत के लिए गठित धर्मसंघ के साथ सहयोग करने वाले सभी सदस्यों को भी उनकी सेवा के लिए धन्यवाद दिया तथा उनपर ईश्वर के प्रचुर आशीष की कामना की।  

30 January 2020, 17:01