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सिमोन वेसेन्थाल सेंटर का एक प्रतिनिधिमंडल और संत पापा सिमोन वेसेन्थाल सेंटर का एक प्रतिनिधिमंडल और संत पापा   (ANSA)

सिमोन वेसेन्थाल सेंटर के एक प्रतिनिधिमंडल को संत पापा का संबोधन

संत पापा फ्राँसिस ने सिमोन वेसेन्थाल सेंटर एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और ऑशविट्ज़-बिरकेन यातना शिविर की अपनी यात्रा को याद करते हुए, असामाजिकता और नस्लवाद की निंदा की।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार,20 जनवरी 2020 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 20 जनवरी को वाटिकन के कार्डिनल मंडल भवन में सिमोन वेसेन्थाल सेंटर के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। संत पापा ने वाटिकन में उनका स्वागत करते हुए खुशी प्रकट की, कि उनका सेंटर, दुनिया भर में अल्पसंख्यकों के प्रति सभी प्रकार की असामाजिकता, नस्लवाद और घृणा का मुकाबला करने में सक्रिय है।

मानवीय गरिमा का सम्मान

संत पापा ने कहा, “आप ने दुनिया में मानव गरिमा के संबंध में एक बेहतर जगह बनाने की साझा इच्छा में, दशकों से परमाध्यक्षों के साथ संपर्क बनाए रखा है। हर व्यक्ति को सम्मान और गरिमा मिले, चाहे उसकी जातीय उत्पत्ति, धर्म या सामाजिक स्थिति कुछ भी हो। सहिष्णुता, आपसी समझ, धर्म की स्वतंत्रता और समाज के भीतर शांति को बढ़ावा देना सिखाना आवश्यक है।”

होलोकोस्ट की स्मृति

संत पापा ने कहा कि उनकी संस्था विशेष रुप से होलोकोस्ट की स्मृति को जीवित रखने में मदद करती है। 27 जनवरी, ऑशविट्ज़-बिरकेन यातना शिविर से मुक्ति की पचहत्तरवीं वर्षगांठ को चिह्नित करेगा। संत पापा ने 2016 में उस यातना शिविर का दौरा करते हुए वहाँ चिंतन और मौन प्रार्थना की थी। उन्होंने कहा, “हमारी तेज रफ्तार से आगे बढ़ती दुनिया की गतिविधियों के बीच, पीड़ित मानवता की दलील को मौन होकर सुनना और देखना तथा आत्मपरख करना कितना मुश्किल है। हमारा उपभोक्तावादी समाज शब्दों को भी तोड़-मरोड़ देता है: कितने अनकहे शब्द बोले जाते हैं। अनावश्यक बहस करने, आरोप लगाने, अपमान करने और चिल्लाने में कितना समय बर्बाद होता है। दूसरी ओर, मौन, स्मृति को जीवित रखने में मदद करता है। यदि हम होलोकोस्ट की स्मृति को खो देते हैं, तो हम अपने भविष्य को नष्ट कर देते हैं। मानवता द्वारा मानवता पर की गई निर्दयतापूर्ण क्रूरता की पचहत्तरवीं वर्षगांठ, हमें स्मृति को जीवित रखने में मदद करती है। हमें ऐसा करने की जरूरत है, ऐसा न हो कि हम उदासीन हो जाएंगे।

असामाजिकता की दृढ़ता से निंदा

संत पापा ने दुनिया के कई हिस्सों में, स्वार्थ और उदासीनता में वृद्धि, दूसरों के लिए चिंता की कमी और बढ़ती असामाजिकता की दृढ़ता से निंदा की। लोगों के लिए जीवन तब तक अच्छा है जब तक यह उनके लिए अच्छा है और जब चीजें गलत हो जाती हैं, तो क्रोध द्वेष शुरु हो जाता है। जल्द ही गुटबाजी और नफरत फैलने लगती है। इन आसामाजिक तत्वों और समस्याओं से निपटने के लिए, हमें खुद उस मिट्टी को छोड़ने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए जिसमें नफरत बढ़ती है और इसके बजाय ऐसी जमीन तैयार करनी चाहिए जहाँ शांति की बुवाई की जा सके। जब हम एकीकरण के माध्यम से दूसरों को समझने की कोशिश करते हैं तो हम खुद को अधिक प्रभावी ढंग से सुरक्षित करते हैं। इसलिए जो लोग हाशिए पर हैं, उन तक पहुंचाना, संसाधनों या धन की कमी की अनदेखी करने वालों का समर्थन करना और असहिष्णुता एवं भेदभाव के शिकार लोगों की सहायता करना अत्यावश्यक है।

शांति का बीज

संत पापा ने अपने संवाद के अंत में पुनः उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया और उन्हें सबसे कमजोर भाइयों और बहनों की रक्षा में सहयोग करना जारी रखने हेतु प्रेरित किया। “पिता ईश्वर हमें एक-दूसरे का सम्मान करने और एक-दूसरे को प्यार करने और शांति के बीज बोते हुए पृथ्वी को एक बेहतर स्थान बनाने में हमारी मदद करें। शलोम!”  

20 January 2020, 16:37