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प्रभु प्रकाश मिस्सा समारोह प्रभु प्रकाश मिस्सा समारोह   (ANSA)

प्रभु प्रकाश के युखरिस्तीय समारोह के अनुष्ठाता संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने 6 जनवरी सोमवार को प्रभु प्रकाश के महोत्सव पर पवित्र युखरिस्तीय समारोह का अनुष्ठान किया। अपने प्रवचन में विश्वसियों से कहा कि "आराधना के माध्यम से हम इस बात का पता लगाते हैं कि ख्रीस्तीय जीवन ईश्वर के साथ एक प्रेम कहानी है।

माग्रेट सुनीता मिंज–वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 6 जनवरी 2020 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने 6 जनवरी सोमवार को वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघऱ में प्रभु प्रकाश का महोत्सव मनाने के लिए देश विदेश से एकत्रित ख्रीस्तिय़ों के साथ पवित्र युखरिस्तीय समारोह का अनुष्ठान किया।

संत पापा ने समारोह के लिए चयनित संत मत्ती के सुसमाचार के उस खंड पर मनन चिंतन किया जहाँ पूर्व की ओर से यात्रा करते तीन ज्ञानी यहूदियों के नवजात राजा की खोज करने आये थे। तीन ज्ञानी पूरब से तारा को देखते हुए आगे बढ़े।

नवजात राजा की आराधना

संत पापा ने दो तरह की यात्रा का उल्लेख किया पहला तीन ज्ञानियों की यात्रा और दूसरी राजा हेरोद की यात्रा। ज्ञानियों की यात्रा का लक्ष्य था यहूदियों के नवजात राजा की आराधना करना। परंतु हेरोद की यात्रा खुद की ओर यात्रा था।राजा हेरोद खुद से अपने नाम और शोहरत से प्यार था। राजा हेरोद ज्ञानियों द्वारा यहूदियों के नवजात राजा का पता लगाना चाहते थे। आराधना के लिए नहीं लेकिन नवजात शिशु की हत्या करवाकर अपनी गद्दी को बचाना चाहते थे। संत पापा ने कहा हेरोद आराधना का गलत तरह से प्रयोग करना चाहता था। उसी तरह कितने लोग हैं जो धर्म के नाम पर खुद का फायदा उठाते हैं। वे ख्रीस्तीय जीवन का लक्ष्य खो देते हैं। ज्ञानियों की तरह हमारा लक्ष्य ईश्वर की आराधना होनी चाहिए। हमारी यात्रा खुद की ओर नहीं परंतु ईश्वर की ओर होनी चाहिए।

ख्रीस्तीय जीवन का केद्र

संत पापा ने कहा कि मसीह के आने और यूदा के बेथलेहेम में जन्म लेने की खबर याजकों और सदुकियों को थी। वे जानते था कि उन्हें कहाँ जाना है पर वे वहाँ नहीं गये। हम ख्रीस्तियों के लिए ज्ञान या जानना काफी नहीं है परंतु इसे हमें काम में परिणत करना है। और इसके लिए हमें सबसे पहले अपने आप से, अपने आराम जीवन से बाहर निकलना होगा। हमें ज्ञानियों के समान नीचे झुकना और बालक येसु को सजदा करना होगा। हमें अपने आप को नम्र बनाना होगा। एक बार जब हम आराधना करते हैं, तो हमें यह पता चलता है कि विश्वास केवल सिद्धांतों का एक सेट नहीं है, बल्कि एक जीवित व्यक्ति के साथ एक रिश्ता है जिसे हम प्यार कहते हैं। आराधना के माध्यम से, हमें पता चलता है कि ख्रीस्तीय जीवन ईश्वर के साथ एक प्रेम कहानी है, जहाँ हम ईश्वर को अपने जीवन का केद्र बनाते हैं और उनसे प्यार करते हैं।

आराधना, प्रेम का कार्य

संत पापा ने इस वर्ष के शुरु में सभी लोगों के अपने विश्वास को नवीकृत करने के लिए कहा। जब हम प्रभु के सामने अपने घुटनों पर होते हैं तो हम अपनी सभी परीक्षाओं और कमजोरियों को अपने वश में कर सकते हैं। हमारा नाम, पद शक्ति सभी सभी अपने स्थान पर रहती है हम धन का सही प्रयोग दूसरों की भलाइ के लिए करते हैं। इस तरह आराधना में हम ईश्वर को अपने केंद्र में रखते हैं अपने आप को नहीं। संत पापा ने कहा कि प्रभु की आराधना करना एक प्रेम का कार्य है जो जीवन को बदल देता है। प्रभु को सोना चढ़ाने का मतलब है कि हमारे लिए प्रभु से कीमती और मूल्यवान कोई दूसरी वस्तु हो ही नहीं सकती। बान चढ़ाने के द्वारा हम उनके साथ स्वर्ग के सहभागी बनते हैं और गंधरस चढ़ाने दवारा हम यह प्रकट करते हैं कि हम अपने लाचार और पीड़ित पड़ोसियों को राहत पहुँचाने के लिए तैयार हैं क्योंकि प्रभु खुद इन लाचारों और पीड़ितों में मौजूद रहते हैं।

हम प्रभु के कृपा मांगे कि हम सही अर्थ में प्रभु की आराधना कर सकें। प्रभु की आराधना सिर्फ मेरे जबान से नहीं वरन् मेरे कार्यों द्वारा हो। तीन ज्ञानियों की तरह आराधना करते हुए हम भी, अपनी जीवन यात्रा के अर्थ को खोज पायेंगे और "एक महान आनंद" का अनुभव करेंगे।

06 January 2020, 17:07