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बाद 27 जनवरी औशविट्ज़-बिरकेनौ मौत शिविर की मुक्ति की 75 वीं वर्षगांठ बाद 27 जनवरी औशविट्ज़-बिरकेनौ मौत शिविर की मुक्ति की 75 वीं वर्षगांठ  (ANSA)

उदासीनता स्वीकार्य नहीं, स्मृति जरूरी है, संत पापा

संत पापा ने औशविट्ज़-बिरकेनौ मौत शिविर की मुक्ति की 75 वीं वर्षगांठ होलोकॉस्ट की याद कराते हुए कुछ समय प्रार्थना में बिताने और अपने आप से कहने के लिए प्रेरित किया कि इस तरह की त्रासदी और फिर कभी न होने पाये।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 27 जनवरी, 2020 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 26 जनवरी संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में उपस्थित विश्वासियों और तीर्थयात्रियों के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ करने के बाद 27 जनवरी औशविट्ज़-बिरकेनौ मौत शिविर की मुक्ति की 75 वीं वर्षगांठ होलोकॉस्ट की याद कराते हुए कहा, "इस विशाल अत्याचार की त्रासदी के सामने, उदासीनता स्वीकार्य नहीं है और स्मृति जरूरी है। कल हम सभी इसका स्मरण कर एक पल प्रार्थना में बिताएँ और हर व्यक्ति अपने दिल में कहे, इस तरह की त्रासदी फिर कभी नहीं, फिर कभी भी नहीं!”

ट्वीट संदेश

संत पापा ने 27 जनवरी को पोलैंड के ऑशविट्ज़ स्मारक स्थल की 75 वीं वर्षगांठ पर ट्वीट संदेश में लिखा, “यदि हम अपनी स्मृति खो देते हैं, तो हम अपने भविष्य को नष्ट कर देते हैं। हॉलोकोस्ट (बलिदान) की 75 वीं वर्षगांठ, मानवता पर हुई अकथनीय क्रूरता की याद दिलाती है। हमें इसपर चिंतन करने की जरूरत है, ऐसा न हो कि हम उदासीन हो जाएंगे।”

औशविट्ज़-बिरकेनौ का दौरा

संत पापा फ्रांसिस ने अपने पूर्ववर्ती परमाध्यक्षों के नक्शेकदम पर चलते हुए अगस्त 2016 में पोलैंड में विश्व परिवार सम्मेलन के दौरान ओशविट्ज़-बिरकेनौ संग्रहालय और स्मारक का दौरा किया। संत पापा ने स्मारक पर मौन प्रार्थना की। संत पापा का यह मौन कृत्य "यह दिखाने का एक तरीका भी था कि मौन प्रार्थना कई अन्य प्रवचनों की तुलना में सटीक और पर्याप्त उत्तर दे सकती है।"

27 January 2020, 16:31