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रोम शहर एवं विश्व के नाम क्रिसमस सन्देश जारी करते हुए सन्त पापा फ्राँसिस रोम शहर एवं विश्व के नाम क्रिसमस सन्देश जारी करते हुए सन्त पापा फ्राँसिस  (AFP or licensors)

रोम शहर एवं विश्व के नाम सन्त पापा फ्राँसिस का क्रिसमस सन्देश

ख्रीस्तजयन्ती महापर्व के उपलक्ष्य में, सन्त पापा फ्राँसिस ने रोम शहर एवं सम्पूर्ण विश्व के नाम अपना क्रिसमस सन्देश जारी किया। सन्देश का उदघाटन करते हुए सन्त पापा ने नबी इसायाह के ग्रन्थ के नवें अध्याय के पहले पद के शब्दों को दुहराया, "अन्धकार में भटकनेवालों ने एक महती ज्योति देखी है।"

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 25 दिसम्बर 2018 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन स्थित सन्त पेत्रुस महागिरजाघर के प्रमुख झरोखे से, बुधवार, 25 दिसम्बर को, ख्रीस्तजयन्ती महापर्व के उपलक्ष्य में, सन्त पापा फ्राँसिस ने रोम शहर एवं सम्पूर्ण विश्व के नाम अपना क्रिसमस सन्देश जारी किया। सन्देश का उदघाटन करते हुए सन्त पापा ने नबी इसायाह के ग्रन्थ के नवें अध्याय के पहले पद के शब्दों को दुहराया, "अन्धकार में भटकनेवालों ने एक महती ज्योति देखी है।"

"अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, आप सबको क्रिसमस मुबारक!

उन्होंने कहा, "माता कलीसिया के गर्भ से, देहधारी ईशपुत्र ने इस रात एक बार फिर जन्म लिया है। उनका नाम है, येसु, जिसका अर्थ है, "ईश्वर मुक्ति प्रदान करते हैं। अनन्त और असीम प्रेमी पिता ने उन्हें इस संसार में इसलिये नहीं भेजा कि वे उसे दोषी ठहराये, बल्कि इसलिये भेजा कि संसार उनके द्वारा मुक्ति प्राप्त करे। असीम दया के कारण पिता ईश्वर ने हमें येसु का वरदान प्रदान किया है। उन्होंने यह वरदान प्रत्येक को दिया है। उन्होंने उन्हें सदा के लिये दे दिया है। कड़ाके की ठंड और रात के अन्धेरे में टिमटिमाती बत्ती के सदृश पुत्र ने जन्म लिया है।"  

सन्त पापा ने कहा, "कुँवारी मरियम से जन्मा वह बालक ही देह बना "शब्द" है। वह शब्द जिसने अब्राहम के हृदय को मार्गदर्शन दिया तथा वे कदम जो प्रतिज्ञात देश तक ले चले, जो अब उन सबको अपनी ओर आकर्षित करता है जो प्रभु ईश्वर की प्रतिज्ञाओं पर विश्वास करते हैं। वह शब्द जिसने यहूदियों को दासता से स्वतंत्रता की यात्रा की ओर प्रशस्त किया तथा जो हमारे युग सहित प्रत्येक युग के समस्त दासों को पुकारता रहता है ताकि वे अपनी क़ैद से बाहर आयें। वे ही वह शब्द हैं जो सूर्य से भी अधिक दीप्तिमान है, छोटे से मानवपुत्र में देहधारण करनेवाले येसु ही विश्व की ज्योति हैं। इसीलिये तो, नबी इसायाह पुकार उठे थे, "अन्धकार में भटकनेवालों ने एक महती ज्योति देखी है"।

 सन्त पापा ने आगे कहा, "मानव हृदय में अन्धकार भरा है, तथापि, ख्रीस्त की ज्योति इस अन्धकार से महान है। व्यक्तिगत, पारिवारिक तथा सामाजिक जीवन में अन्धकार भरा है, किन्तु ख्रीस्त की ज्योति इस अन्धकार से कहीं अधिक महान है। आर्थिक, भू-राजनीतिक और पारिस्थितिक संघर्षों में अंधेरा है, फिर भी ख्रीस्त का प्रकाश महान है।"

मध्यपूर्व और सिरिया

विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में युद्धों का कहर सहते लोगों का स्मरण करते हुए सन्त पापा ने आगे कहा, "मेरी मंगलयाचना है कि ख्रीस्त की ज्योति मध्य पूर्व में और दुनिया के विभिन्न देशों में युद्ध और संघर्ष से पीड़ित अनेकानेक बच्चों पर रोशनी लाये। प्रभु येसु सिरिया के प्रिय लोगों को विश्रान्ति प्रदान करे जो अभी भी वैमनस्यता का कोई अन्त नहीं देख रहे हैं तथा जिन्होंने लगभग एक दशक से अपने देश को किराये पर जाते देखा है। येसु ख्रीस्त शुभचिन्तक स्त्री-पुरुषों के अन्तःकरणों को जगायें। शान्ति एवं सुरक्षा में उस क्षेत्र के लोगों को जीने का मौका देने हेतु प्रभु सरकारों एवं अन्तरराष्ट्रीय समुदाय को प्रेरित करें ताकि उनके कष्टों का अन्त हो सके।"

लेबनान और पवित्र भूमि

सन्त पापा ने कहा, "लेबनान के लोगों को प्रभु समर्थन प्रदान करें तथा मौजूदा संकट से उबरने और सभी के लिये स्वतंत्रता एवं सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व का संदेश देने हेतु उनकी बुलाहट की पुनर्खोज में उन्हें सक्षम बनायें।"

"प्रभु येसु पवित्र भूमि पर अपनी ज्योति बिखेरे, जहाँ उन्होंने मानवजाति के उद्धारकर्त्ता रूप में जन्म लिया था, तथा जहाँ इतने अधिक लोग, संघर्षरत किन्तु हताश न होते हुए शान्ति, सुरक्षा एवं समृद्धि की बाट जोह रहे हैं। प्रभु ईराक को उसके मौजूदा सामाजिक तनावों के बीच सान्तवना का वरदान दें, और यमन को भी जो गम्भीर मानवतावादी संकट से गुज़र रहा है।"

अमरीकी महाद्वीप

फिर अमरीकी महाद्वीप के प्रति अभिमुख होते हुए सन्त पापा ने कहा, "बेथलहम का नन्हा बालक सम्पूर्ण अमरीकी महाद्वीप में आशा का संचार करे, जहाँ कई राष्ट्र सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल के दौर का अनुभव कर रहे हैं। अपने दीर्घकालीन राजनैतिक एवं सामाजिक तनावों से थक चुके वेनेज़ुयेला के प्रिय लोगों को बालक येसु प्रोत्साहन तथा आश्वासन दें ताकि उन्हें वह सहायता मिल सके जिसकी उन्हें नितान्त आवश्यकता है। प्रभु उन सब के प्रयासों को आशीर्वाद प्रदान करें जो न्याय एवं पुनर्मिलन को प्रोत्साहित करने हेतु कोई कसर नहीं छोड़ते हुए उन संकटों एवं निर्धनता के अनेक प्रकारों को अभिभूत करने का प्रयास करते हैं जो प्रत्येक मानव व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर कुठाराघात करते हैं।"

यूक्रेन और अफ्रीका

"प्रिय यूक्रेन पर विश्व के मुक्तिदाता येसु प्रकाश फैलायें, जो एक टिकाऊ शान्ति हेतु ठोस समाधान के लिये तरस रहा है। नवजात प्रभु येसु अफ्रीका के लोगों पर प्रकाश फैलायें, जहाँ अनवरत सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियाँ प्रायः लोगों को अपना घर और परिवार छोडने तथा अन्यत्र शरण लेने पर बाध्य करती हैं। प्रभु येसु कॉन्गो लोकतांत्रिक गणतंत्र के पूर्वी भागों में निवास करनेवालों को शान्ति का वरदान दें। उन सब पर प्रभु दया दृष्टि रखें जो हिंसा, प्राकृतिक प्रकोपों एवं महामारियों के कारण पीड़ित हैं। उन सब लोगों को प्रभु विश्रान्ति प्रदान करें जो अपने धार्मिक विश्वास ख़ातिर सताये जा रहे हैं, विशेष रूप से, मिशनरी लोग तथा वे विश्वासी जिनका अपहरण कर लिया गया है, तथा बुरकीना फासो, माली, नाईजर एवं नाईजिरिया में लोगों को विश्रान्ति दें जो चरमपंथी गुटों के हमलों का शिकार बने हुए हैं।"

आप्रवासी एवं शरणार्थियों का स्मरण                                   

"स्वर्ग से इस धरती आये ईशपुत्र, उन सबको सुरक्षा एवं समर्थन दें जो अन्याय का शिकार बनाये जाते हैं तथा सुरक्षित जीवन की आशा में अन्यत्र पलायन के लिये मजबूर हैं। अन्याय ही इन्हें कब्रस्तान बन जानेवाले उजाड़ प्रदेशों एवं समुद्रों को पार करने पर बाध्य करता है। अन्याय ही इन्हें अकथनीय प्रकारों के दुर्व्यवहार, दासता, यातना और अमानवीय शिविरों में क़ैद सहने के लिये मजबूर करता है। अन्याय ही इन्हें उन स्थलों से दूर जाने के लिये मजबूर कर देता है जहाँ वे प्रतिष्ठित जीवन पा सकते हैं। मर्यादापूर्ण जीवन के विपरीत, वे स्वतः को उदासीनता की दीवारों से टकराता हुआ पाते हैं।"       

सन्देश के अन्त में सन्त पापा ने कहा, "प्रभु, एम्मानुएल, मानव परिवार में पीड़ित प्रत्येक व्यक्ति पर अपनी ज्योति बिखेरें। वे हमारे पथरीले और आत्म-केन्द्रित दिलों को नर्म कर दें तथा उन्हें प्रेम के अस्त्र बना दें। हमारे ग़रीब चेहरों के माध्यम से, प्रभु, अपनी मुस्कान विश्व के सभी बच्चों पर बिखेर दें, उन सब बच्चों पर जो परित्यक्त हैं और उन पर जो हिंसा के शिकार हैं। हमारे जर्जर हाथों से, वे उन लोगों को कपड़े पहना दें जिनके पास पहनने के लिए कुछ नहीं है, भूखों को रोटी दें और बीमारों को चंगा करें। हमारी मैत्री द्वारा, प्रभु, वयोवृद्धों, एकल व्यक्तियों, आप्रवासियों एवं हाशिये पर जीवन यापन करनेवालों के निकट जायें। इस हर्षपूर्ण क्रिसमस दिवस पर, प्रभु येसु सबको अपनी सौम्यता प्रदान कर इस विश्व के अन्धेरे को रोशन करें।"    

इतना कहकर सन्त पापा फ्राँसिस ने रोम शहर एवं विश्व के नाम अपना सन्देश समाप्त किया तथा उपस्थित तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों तथा रेडियो, टेलेविज़न एवं इन्टरनेट के माध्यम से सन्देश सुननेवालों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

25 December 2019, 12:33