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पौल षष्ठम सभागर में आमदर्शन समारोह पौल षष्ठम सभागर में आमदर्शन समारोह   (ANSA)

शहादत प्राणवायु है जिसे ख्रीस्तीय सांस लेते हैं, संत पापा

सुसमाचार की यात्रा प्रेरित चरित की किताब तथा संत पौलुस के साक्ष्य जो पीड़ा की मुहर से चिन्हित है आगे बढ़ती है। पौलुस न केवल उत्साहपूर्वक, गैर-यहूदियों के बीच एक साहसी सुसमाचार प्रचारक हैं जो नये ख्रीस्तीय समुदाय में जान डालते हैं बल्कि वे पुनर्जीवित ख्रीस्त के पीड़ित साक्षी भी हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 11 दिसम्बर 2019 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर,  वाटिकन के पौल षष्ठम सभागार में एकत्रित हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को सम्बोधित कर, प्रेरित चरित पर अपनी धर्मशिक्षा माला को आगे बढ़ाते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

सुसमाचार की यात्रा प्रेरित चरित की किताब तथा संत पौलुस के साक्ष्य जो पीड़ा की मुहर से चिन्हित है आगे बढ़ती है। पौलुस न केवल उत्साहपूर्वक, गैर-यहूदियों के बीच एक साहसी सुसमाचार प्रचारक हैं जो नये ख्रीस्तीय समुदाय में जान डालते हैं बल्कि वे पुनर्जीवित ख्रीस्त के पीड़ित साक्षी भी हैं।( प्रे.च 9,15-16)

ख्रीस्त एवं पौलुस का दुःखभोग

येरूसालेम में प्रेरित का आगमन, प्रेरित चरित के 21वें अध्याय में वर्णित है, जो उसके प्रति एक क्रूर घृणा को पैदा करता है। जैसा कि येसु के लिए भी येरूसालेम एक शत्रुतापूर्ण शहर था। वे मंदिर गये जहाँ उन्हें पहचाना गया। वे भीड़ के हवाले किये गये और आखिर में रोमन सैनिकों द्वारा बचा लिये गये। उनपर संहिता एवं मंदिर के विरूद्ध शिक्षा देने का आरोप लगाया गया। उन्हें गिरफ्तार किया गया और इस तरह कैदखाने की उनकी यात्रा शुरू हुई। उन्हें सबसे पहले शतपतियों के सामने लाया गया, उसके बाद कैसरिया में रोमन प्रतिनिधि के पास और अंत में राजा अग्रिप्पा के सामने पेश किया गया। सुसमाचार लेखक लूकस येसु और पौलुस के बीच समानता पर प्रकाश डालते हैं। दोनों ही शत्रुओं द्वारा घृणा किये गये, सार्वजनिक रूप से अभियोग लगाये गये और शाही अधिकारियों द्वारा निर्दोष साबित किये गये। अतः पौलुस अपने प्रभु के दुःखभोग में शामिल हुए और उनका दुःखभोग एक जीवित सुसमाचार बन जाता है।

विश्वास के लिए आज के शहीद

संत पापा ने आधुनिक युग के शहीदों का उदाहरण देते हुए कहा, "मैं संत पेत्रुस महागिरजाघर से आ रहा हूँ जहाँ मेरी पहली मुलाकात यूक्रेनी धर्मप्रांत के यूक्रेनी तीर्थयात्रियों से हुई। इन्हें कितना अधिक अत्याचार सहना पड़ा है। उन्होंने सुसमाचार के लिए पीड़ा सहा है किन्तु विश्वास के लिए कभी समझौता नहीं किया। वे उदाहरण हैं। आज विश्व में, यूरोप में, अनेक ख्रीस्तीय सताये जा रहे हैं और विश्वास के लिए अपना जीवन निछावर कर रहे हैं। वे श्वेत हाथों से अत्याचार सह रहे हैं अर्थात् उन्हें दरकिनार किया जा रहा है। उन्हें हाशिये पर जीवन यापन करना पड़ रहा है। शहादत एक ख्रीस्तीय और एक ख्रीस्तीय समुदाय के लिए प्राणवायु है। हमारे बीच हमेशा शहादत होता रहेगा। यही चिन्ह है कि हम येसु के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। शहादत उन सभी लोगों के साक्ष्य के लिए प्रभु का आशीर्वाद है जो चाहे ख्रीस्तीय हों अथवा ख्रीस्तीय न भी हों।"   

पौलुस को अपने पर लगे आरोप पर सफाई देने की अनुमति मिलती है और अंत में महाराज अग्रिप्पा द्वितीय की उपस्थिति में उनकी सफाई एक प्रभावशाली साक्ष्य बन जाता है। (प्रे.च 26,1-23) पौलुस जब उनसे बात करते हैं तब भी वे अपने प्रभु की गवाही देते हैं। संत पापा ने कहा कि एक सच्चा मिशनरी वास्तव में अपने आप पर केंद्रित नहीं होता किन्तु सबकुछ का श्रेय प्रभु को देता है।

महाराज के साथ बातचीत में पौलुस इस्राएलियों के साथ गहरे संबंध को भी रेखांकित करता है, फरीसियों के साथ पुनरूत्थान की आशा को साझा करता है और एक ख्रीस्तीय के रूप में घोषित करता है कि यह सब ख्रीस्त में पूरा हो चुका।

पौलुस का मिशन

तब पौलुस अपने मन-परिवर्तन की घटना का वर्णन करता है और बतलाता है कि ख्रीस्त ने उन्हें ख्रीस्तीय बनाया और राष्ट्रों के बीच अपना मिशन सौंपा है, "ताकि उन्हें अन्धकार से ज्योति की ओर और शैतान की अधीनता से ईश्वर की ओर अभिमुख करने के लिए उनके पास भेजें, जिससे वे उनमें विश्वास करने के कारण अपने पापों की क्षमा और संतों के बीच स्थान प्राप्त कर सकें।" (पद. 18) पौलुस ने इस आदेश का पालन किया और अपनी ओर से कुछ नहीं किया बल्कि नबियों एवं मूसा की संहिता में जिन बातों के विषय में कहा गया है उसकी घोषणा की, "अर्थात्, यह कि मसीह दुःख भोगेंगे और मृतकों में सब से पहले पुनर्जीवित हो कर हमारी जानता को तथा ग़ैर-यहूदियों को ज्योति का सन्देश देंगे।'(पद. 23) पौलुस का उत्साही साक्ष्य महाराज अग्रिप्पा के हृदय को छू लिया जिसके लिए अब केवल निर्णायक कदम लेना बाकी रह गया था। वह कहता है, ‘‘तुम तो अपने तर्कों द्वारा मुझे सरलता से मसीही बनाना चाहते हो!'' (पद. 28) इस तरह पौलुस निर्दोष घोषित किया गया किन्तु उसे रिहा नहीं किया जा सका क्योंकि कैसर से अपील की गयी है। इस प्रकार ईश वचन की यात्रा रोम की ओर बिना रूके आगे बढ़ती गई। पौलुस रोम तक बेड़ियों में रहे।  

बेड़ियाँ –निष्ठा के प्रतीक

तब से, पौलुस को एक कैदी के रूप में देखा गया, जहाँ बेड़ियाँ सुसमाचार के प्रति उनकी निष्ठा एवं पुनर्जीवित ख्रीस्त के साक्ष्य के चिन्ह बन गये।

बेड़ियाँ निश्चय ही प्रेरित पौलुस के लिए दीनता की परख थीं जो दुनिया की नजरों में एक कुकर्मी था। (2 तिम. 2,9) किन्तु खीस्त के प्रति अगाध प्रेम के कारण वे बेड़ियों को भी विश्वास की नजर से देखते हैं। पौलुस के लिए विश्वास, ईश्वर या दुनिया पर कोई सिद्धांत अथवा विचार नहीं था किन्तु अपने हृदय में ईश्वर के साथ प्रेम का प्रभाव था। यह येसु ख्रीस्त के लिए उनका प्रेम था।

पौलुस ने दी कठिनाइयों में धैर्यशील बनने की शिक्षा

संत पापा ने कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, पौलुस हमें कठिनाइयों में धैर्यशील बनना और सब कुछ को विश्वास की नजरों से देखना सिखलाते हैं। आज हम प्रेरित की मध्यस्थता द्वारा प्रभु से निवेदन करें कि वे हमारे विश्वास को नवीकृत करें एवं मिशनरी शिष्यों एवं ख्रीस्तीय के रूप में अंत तक अपनी बुलाहट में विश्वस्त बने रहने में मदद दें।

इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और विश्व के विभिन्न देशों से आये सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन किया, खासकर, उन्होंने अमरीका के तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया। तत्पश्चात् उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति एवं परिवार के लिए प्रार्थना की कि हम क्रिसमस पर नवजात उद्धारकर्ता के आने की तैयारी में, एक पवित्र आगमन काल का अनुभव कर सकें। अंत में, उन्होंने अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

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आमदर्शन समारोह के दौरान लोगों के साथ संत पापा फ्राँसिस
11 December 2019, 14:32