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जेस्विट फादर मिग्वेल एंजेल फ्योरितो के  लेख को प्रस्तुत करते संत पापा फ्राँसिस जेस्विट फादर मिग्वेल एंजेल फ्योरितो के लेख को प्रस्तुत करते संत पापा फ्राँसिस  (AFP or licensors)

संत पापा ने फादर फ्योरितो के लेखों को प्रस्तुत किया

अपने पुरोहित अभिषेक के 50 साल पूरा करने के उपलक्ष्य में, संत पापा फ्राँसिस ने रोम स्थित येसु समाज के मुख्य आवास में, जेस्विट फादर मिग्वेल एंजेल फ्योरितो के संकलित लेखों का प्रस्तुतिकरण किया। जेस्विट फादर जोश लुईस नारवाजा द्वारा सम्पादित उन लेखों को 5 खंड में ला चिविलता कत्तोलिका में प्रकाशित किया गया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 14 दिसम्बर 2019 (रेई)˸ फादर मिगवेल एंजेल फ्योरितो के लेखों की प्रस्तावना में संत पापा फ्राँसिस ने कहा है कि यह संस्करण "हम सभी के लिए सांत्वना का स्रोत है जो कई वर्षों तक उनकी शिक्षा से पोषित हुए हैं। ये लेख पूरी कलीसिया के लिए लाभदायक होगा।"  

संत पापा फ्राँसिस ने 5 खंडों के इस संकलन का प्रस्तुतिकरण, अपने पुरोहिताभिषेक की 50वीं सालगिरह पर जेस्विट कूरिया में स्वयं करने का निर्णय लिया था। इस अवसर पर उन्होंने फादर मिग्वेल एंजेल फ्योरितो के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला एवं उन्हें अपना आध्यात्मिक पिता कहा।  

फादर मिग्वेल एंजेल फ्योरितो के  लेख
फादर मिग्वेल एंजेल फ्योरितो के लेख

संवाद के गुरू

संत पापा ने प्रस्तुतिकरण के दौरान फादर फ्योरितो के बारे कहा कि वे "संवाद के गुरू" थे। वे बोलते कम थे पर सुनते अधिक थे। सुनने के द्वारा वे आत्मपरख कर सकते थे जो संवाद का एक स्तम्भ है। फादर फ्योरितो ने खुद संवाद किया और दूसरों को भी; शिक्षक एवं विद्यार्थी के बीच, लेखक एवं लेख से, इतिहास और ईश्वर से संवाद करना सिखलाया।  

संत पापा ने कहा, "वे दर्शनशास्त्र के प्रोफेसर थे किन्तु आध्यात्मिकता पसंद करते थे। उन्होंने ही हमें आत्मपरख करना सिखलाया। उन्हें अपने आप में एवं दूसरों में भी ईश्वर से वार्ता जगाने का उत्साह था।

फादर फ्योरितो का लेख "विशुद्ध आध्यात्मिक करुणा" उन लोगों को शिक्षा प्रदान करता है जो अज्ञानी हैं, एक अच्छी सलाह देता है जिन्हें इसकी जरूरत है, उनके लिए सुधार है जो गलत हैं, उन लोगों के लिए सांत्वना है जो उदास हैं और निराशा के क्षण धैर्य रखने में मदद देता है।  

सुनने के गुरू

संत पापा ने फादर फ्योरितो के सुनने के तरीके पर प्रकाश डाला जो शिष्यों को उनसे सलाह लेने हेतु प्रेरित करता था। उन्होंने कहा कि वे एक व्यक्ति या दूसरे व्यक्ति के बारे जानने का मनोभाव नहीं रखते थे बल्कि उनके द्वारा सृष्टिकर्ता और प्रभु स्वयं उस व्यक्ति से संवाद करते थे।    

उन्होंने बतलाया कि फादर फ्योरितो किसी भी मुद्दे पर जरा भी पक्षपात नहीं करते थे। वे चुपचाप सुनते और बोलने के बदले अपने पुस्तकालय से एक कागज का टुकड़ा दे देते थे... जो एक औषधि की याद दिलाती है। फादर फ्योरितो आत्मा के एक बुद्धिमान वैद्य के समान थे।

उस पुस्तकालय से न सिर्फ उपचार निकलते थे बल्कि उन लोगों के लिए आत्मा की चीजें भी निकलती थीं, जो सही सवाल के साथ इंतजार करते थे, जो किसी की तेज अभिलाषा रखते थे, जो मार्गदर्शन का खजाना पाना चाहते थे ताकि भविष्य के फलों को प्राप्त कर सकें।

अभ्यास के गुरू

संत पापा ने अपने आध्यात्मिक गुरू फादर फ्योरितो के अभ्यासों पर ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि वे दृढ़, हट्ठी और बहुत अधिक धार्मिक अभ्यास करते थे। संत पापा ने उनकी तुलना जलस्रोत के किनारे लगाये हुए पेड़ से की।

उन्होंने अपने वक्तव्य के अंत में उम्मीद जतायी कि यह संकलन कई लोगों के जीवन में जड़ जमायेगा तथा फूल और फल लायेगा, जो उसी कृपा से सिंचित होंगे जिसके द्वारा फादर फ्योरितो विवेकशीलता के साथ आध्यात्मिक साधना पर अपना विचार दे पाते थे।

14 December 2019, 13:48