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विश्व आर्थिक मंच की 49वीं सभा विश्व आर्थिक मंच की 49वीं सभा  (ANSA)

पेशेवर जीवन में सुसमाचार का साक्ष्य कैसे दें

संत पापा फ्राँसिस ने पेशेवर जीवन में सुसमाचारी साक्ष्य की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने सोमवार को वाटिकन में युवा फ्राँसिसी व्यापारियों एवं उद्यमियों से मुलाकात की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 3 दिसम्बर 2019 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार को वाटिकन में फ्राँस के युवा काथलिक व्यापार नेताओं एवं उद्यमियों के एक दल से मुलाकात की। यह दल "आम हित के लिए एक यात्रा" शीर्षक एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए रोम में एकत्रित है। सम्मेलन का उद्देश्य है लोगों के व्यक्तिगत एवं पेशेवर जीवन में काथलिक सामाजिक शिक्षा को प्रोत्साहन देना।

सच्चा ख्रीस्तीय साक्ष्य

अपने सम्बोधन में संत पापा फ्राँसिस ने दल का स्वागत किया एवं व्यक्तिगत और पेशेवर जीवन में कलीसिया की सामाजिक शिक्षा का पालन करने की अभिलाषा के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने स्वीकार किया कि सुसमाचार की मांग एवं व्यापार या पेशे की मांग पर सामंजस्य स्थापित करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा "सुसमाचारी मूल्यों" जिन्हें उद्यमियों और प्रबंधकों द्वारा अपने व्यवसायों में लागू करने की उम्मीद की जाती है, "सच्चा और अपूरणीय ख्रीस्तीय साक्ष्य" का अवसर प्रदान करते हैं।

संत पापा की उम्मीद है कि "आम हित के लिए यात्रा" का सम्मेलन प्रतिभागियों को कर्तव्यनिष्ठ निर्णय लेने हेतु आत्म जाँच करने में मदद देगा। उन्होंने वाटिकन द्वितीय महासभा के दस्तावेज गौदियुम एत स्पेस की शिक्षा को रेखांकित किया जो लोकधर्मियों को, ख्रीस्तीय प्रज्ञा के प्रकाश में एवं कलीसिया के दस्तावेज का सम्मान के साथ अपने ही क्षेत्र में जिम्मेदारपूर्ण साक्ष्य देने का प्रोत्साहन देता है।

पारिस्थितिक बदलाव

व्यापारियों एवं उद्यमियों को सम्बोधित करते हुए संत पापा ने पारिस्थितिक बदलाव के महत्व पर प्रकाश डाला तथा प्रार्थना एवं चिंतन करने हेतु अपने प्रेरितिक विश्व पत्र "लौदातो सी" की अनुशंसा की। यद्यपि सांस्कृतिक परिवर्तन में समय लगता है किन्तु विनयपूर्ण ठोस परिवर्तन लाने, एक नये तरीके से काम करने हेतु विश्व को सीख देने में व्यापारियों एवं उद्यमियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।  

उन्होंने उन्हें स्मरण दिलाया कि पर्यावरणीय परिवर्तन को आध्यात्मिक परिवर्तन से जुड़ा होना चाहिए। उन्होंने उनका आह्वान किया कि वे उपभोगतावाद की अपेक्षा सादगी और संयम के लिए प्रतिबद्ध हों ताकि जीवन की सच्ची सराहना की जा सके। सरलता नीचे उतरने एवं छोटी चीज का रसास्वादन करने हेतु प्रेरित करता है, उन संभावनाओं के लिए धन्यवाद देने, जो हमारे पास है, अथवा उसके लिए दुःखी नहीं होने जो हमारे पास नहीं है।

03 December 2019, 17:14