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देवदूत प्रार्थना के दौरान संत पापा देवदूत प्रार्थना के दौरान संत पापा   (AFP or licensors)

आगमन काल, उदासीनता से जागने का समय

संत पापा फ्रांसिस ने आगमन के पहले रविवार को देवदूत प्रार्थना हेतु जमा हुए विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को संदेश दिया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, 02 दिसम्बर 2019 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने 01 दिसम्बर रविवार को संत पेत्रुस के प्रांगण में देवदूत प्रार्थना हेतु जमा हुए सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को संबोधित करते हुए कहा प्रिय भाइयो एवं बहनों सुप्रभात।

आज हम आगमन के पहले रविवार में प्रवेश करते हुआ कलीसियाई पूजन विधि के नये वार्षिक काल चक्र की शुरूआत करते हैं। आगमन के चारों रविवार हमें येसु ख्रीस्त के जन्म की यादगारी मनाने हेतु तैयार करते हैं। यह हमें इस बात की याद दिलाती है कि वे हमारे रोज दिन के जीवन में आते हैं और वे दुनिया के अंत में महिमा के साथ आयेंगे। यह हमें निश्चित रुप से अपने भविष्य़ को विश्वास भरी निगाहों से देखने में मदद करता है जैसा कि नबी इसायस हमें अपनी प्रेरणा भरी बातों से निमंत्रण देते औऱ हमें आगमन की यात्रा में ले चलते हैं।

ईश्वर का मार्ग, येसु ख्रीस्त

आज के पहले पाठ में नबी इसायस भविष्यवाणी करते हुए कहते हैं, “दुनिया के अंत में, ईश्वर का मंदिर पहड़ों से ऊपर उठाया जायेगा और वह पहाड़ियों से ऊंचा होगा और सभी राष्ट्र वहाँ इकट्ठे होंगे।”(2.2) ईश्वर का मंदिर येरुसालेम को हम इस भांति सभी लोगों के मिलन स्थल स्वरूप परिवर्तित होता पाते हैं। ईश पुत्र के दुनिया में आने के बाद हम स्वयं येसु को, इस सच्चे मंदिर के रहस्य को प्रकट करते हुए सुनते हैं। अतः नबी इसायस की भविष्यवाणी अपने में एक दिव्य प्रतिज्ञा है जो हमें अपने में तीर्थयात्रियों के मनोभावों से भर देता और हम अपने को येसु ख्रीस्त से मिलन की ओर अग्रसर होता पाते हैं जो हमारे जीवन के अर्थ और इतिहास की चरम हैं। कितने ही लोग हैं जो न्याय के भूखे और प्यासे हैं जो केवल येसु के मार्ग में चलते हुए इस अर्थ को समझ पायेंगे, वहीं बहुत से लोग औऱ सामाजिक समुदाय हैं जो अपने व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण बुराई औऱ पाप के मार्ग में चलते हैं जो युद्धों औऱ लड़ाई-झगड़ों का कारण बनती है। आगमन वह सही समय है जहां हम येसु का स्वागत करने हेतु अपने को तैयार करते जो हमारे लिए शांति के संदेशवाहक बनकर आते और हमें ईश्वर का मार्ग दिखलाते हैं।

तैयार रहने हेतु निमंत्रण

संत पापा ने कहा कि आज का सुसमाचार हमें तैयार रहने हेतु निमंत्रण देता है, “इसीलिए जागते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारे प्रभु कब आयेंगे” (मती.24.42)। जागते रहने का अर्थ भौतिक रुप में अपनी आंखों को खुला रखने से नहीं है वरन् अपने हृदय की स्वतंत्रता में, सही दिशा में आगे बढ़ने से है, अर्थात यह अपने को उपहार स्वरुप देने की चाह रखना औऱ सेवा करना है। हमारे लिए जागते रहने का अर्थ यही है। जिस नींद से हमें जागने हेतु आह्वान किया जा रहा है, वह है अपनी उदासीनता, दिखावे, दूसरों से सच्चे संबंध स्थापित करने की हमारी अयोग्यता, अपने में परित्यक्त, अकेले और अपने बीमार भाई-बहनों हेतु अपने को नहीं देने पाने की स्थिति से ऊपर उठने का हमारे लिए आह्वान है। येसु के आने की प्रतीक्षा हमें निष्ठा में बने रहते हुए जागने का एक निमंत्रण है। यह हमें ईश्वर के कार्यों से अपने को आश्चर्यचकित होने देते हुए अपने को उन्हें समर्पित करने की मांग करता है। संत पापा ने कहा कि जागते रहने का अर्थ हमारे लिए ठोस रुप से अपने पड़ोसियों के प्रति सजग रहना है जो कठिन परिस्थिति में हैं, उनकी जरुरत हमें चुनौती प्रदान करे, जहाँ हम उनके द्वारा सहायता की मांग हेतु प्रतीक्षा किये बिना उनकी सेवा करने हेतु आगे बढ़ते हैं, जैसे कि ईश्वर हमारे साथ करते हैं।

कुंवारी मरियम जो आशा में सदा सजग रहीं, हमें हमारी इस यात्रा में मदद करें जिससे हम अपनी निगाहों को “ईश्वर के पर्वत” येसु ख्रीस्त की ओर बनायें रखें, जो अपनी ओर सारी मानव जाति को आकर्षित करते हैं।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्रांसिस ने सभी विश्वासियों औऱ तीर्थयात्रियों के साथ देवदूत प्रार्थना का पाठ किया और सभों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया। 

02 December 2019, 18:15