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क्रिसमस मध्यरात्रि को सन्त पेत्रुस महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग क्रिसमस मध्यरात्रि को सन्त पेत्रुस महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग  (ANSA)

क्रिसमस की रात सन्त पापा ने ईशकृपा पर केन्द्रित किया ध्यान

"क्रिसमस महापर्व हमें याद दिलाता है कि प्रभु ईश्वर हम सबसे प्रेम करना जारी रखते हैं, यहाँ तक कि हम में से सबसे बदत्तर व्यक्ति से भी, क्योंकि ईश्वर की दृष्टि में हम सब अनमोल हैँ। ईश्वर का प्रेम किसी शर्त पर निर्भर नहीं, वह हम पर निर्भर नहीं करता।"

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टटफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 25 दिसम्बर 2019 (रेई,वाटिकन रेडियो): रोम स्थित सन्त पेत्रुस महागिरजाघर में, 24-25 दिसम्बर की मध्यरात्रि, ख्रीस्तजयन्ती महापर्व के उपलक्ष्य में, ख्रीस्तयाग अर्पित कर सन्त पापा फ्राँसिस ने ईश्वर की कृपा पर ध्यान केन्द्रित किया।  

ईश्वर का प्रेम जारी रहता है

सन्त पापा ने कहा, "क्रिसमस महापर्व हमें याद दिलाता है कि प्रभु ईश्वर हम सबसे प्रेम करना जारी रखते हैं, यहाँ तक कि हम में से सबसे बदत्तर व्यक्ति से भी, क्योंकि ईश्वर की दृष्टि में हम सब अनमोल हैँ। ईश्वर का प्रेम किसी शर्त पर निर्भर नहीं, वह हम पर निर्भर नहीं करता।" उन्होंने कहा, "कितनी बार हम सोचते हैं कि यदि हम भलाई करेंगे तो ईश्वर भी हमारे साथ भले होंगे और यदि हम दुष्कर्मों में लगेंगे तो वे हमें दण्डित करेंगे। तथापि, ऐसा नहीं हैं क्योंकि ईश्वर का प्रेम कभी बदलता नहीं। यह चंचल नहीं है; यह विश्वासयोग्य है, विश्वसनीय है, धैर्यवान है।"

सन्त पापा ने कहा, "कृपा, सौन्दर्य का पर्याय है और ईश प्रेम के सौन्दर्य में हम भी अपनी सुन्दरता की खोज करते हैं, इसलिये कि ईश्वर हमसे प्यार करते हैं। ईश्वर की दृष्टि में हम सब सुन्दर हैं, इसलिये नहीं कि हम क्या करते हैं अपितु इसलिये कि हम क्या हैं।।"

कृपा को स्वीकार करें

ईश्वरीय कृपा पर चिन्तन को जारी रखते हुए सन्त पापा फ्राँसिस ने सभी भक्तों को आमंत्रित किया कि वे "क्रिसमस के मौके पर शिशु येसु पर मनन-चिन्तन करें तथा उनके कोमल प्रेम से अपने आप को ओत्-प्रोत् होने दें।"  

उन्होंने कहा, "ईश कृपा को स्वीकार करने का अर्थ है उसके बदले में धन्यवाद ज्ञापन के लिये तत्पर रहना। आज का दिन गऊशाले और चरनी के निकट जाने का सुखद दिन है, यही है वह यथार्थ दिवस जब हम प्राप्त कृपाओं के लिये ईश्वर के प्रति आभार व्यक्त कर सकते हैं। ईश्वर द्वारा प्रदत्त शिशु येसु के वरदान को हम कृतज्ञतापूर्वक ग्रहण करें ताकि हम ख़ुद भी अन्यों के लिये वरदान बनकर विश्व को सर्वोत्तम ढंग से बदल सकें।"

जीवन एक वरदान

सन्त पापा ने कहा, "प्रभु येसु ने शब्दों की बाढ़ से इतिहास को परिवर्तित नहीं किया, अपितु अपना जीवन बलिदान अर्पित कर इसे बदला। हम जब तक भलाई करें तब तक वे नहीं रुके बल्कि बिलाशर्त उन्होंने हमारे प्रेम के ख़ातिर अपने प्राणों की आहुति दे दी। उसी प्रकार, हमें भी भलाई करने के लिये तब तक नहीं रुकना चाहिये जब तक हमारा भाई अथवा पड़ोसी भलाई करे, कलीसिया के प्रति प्रेम दर्शाने हेतु हमें तब तक नहीं रुकना चाहिये जब हम कलीसिया को पूर्ण होता नहीं देख पायें तथा अन्यों की सेवा करने हेतु तब तक नहीं रुकना चाहिय़े जब तक वे हमारे प्रति सम्मान न दर्शा दें। इसी का अर्थ है मुक्त रूप से ईशकृपा को ग्रहण करना।"

सन्त पापा ने ख्रीस्तयाग में उपस्थित समस्त भक्तों को आमंत्रित किया कि वे ईश्वर द्वारा प्रदत्त ईशपुत्र येसु को ग्रहण करें क्योंकि येसु को ग्रहण करने का अर्थ है अपने ज़रूरतमन्द भाइयों को स्वीकार करना, उनकी मदद को आगे आना।

25 December 2019, 08:31