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पनामा में विश्व युवा दिवस में भाग लेते युवा पनामा में विश्व युवा दिवस में भाग लेते युवा  (AFP or licensors)

युवा ईश्वर की नई उपजाऊ भूमि, संत पापा

राष्ट्रीय युवा प्रेरितिक नेताओं की 20वीं लातीनी अमरीका की सभा पेरू में चल रही है। संत पापा फ्राँसिस ने एक संदेश भेजकर उन्हें प्रोत्साहन दिया कि वे येसु में अपने ज्ञान को गहरा बनायें।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 19 नवम्बर 2019 (रेई)˸ राष्ट्रीय युवा प्रेरितिक नेताओं की 20वीं लातीनी अमरीका की सभा पेरू की राजधानी लीमा में 18 से 23 नवम्बर तक जारी है। इस पहल को पेरू के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन द्वारा आयोजित किया गया है, जिसकी विषयवस्तु है, "हम युवा लोग पवित्र भूमि, ईश्वर के वर्तमान हैं।"

ईश्वर की नई उपजाऊ भूमि

युवा प्रेरितिक नेताओं को प्रेषित अपने संदेश में संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि "वे कलीसिया को एक ऐसी सेवा प्रदान कर रहे हैं जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है। युवा हमें बोलते और चुनौती देते हैं वे समुदाय में प्रकाश एवं अंधकार का एहसास दिलाते हैं और अपने उत्साह द्वारा हमें प्रोत्साहन देते हैं कि हम समय के साथ उनका प्रत्युत्तर दें।"  

"वे उपजाऊ एवं नई भूमि हैं जिनको ईश्वर ने ख्रीस्तीय समुदाय को प्रदान किया है।" संत पापा ने युवा प्रेरिताई में संलग्न लोगों को याद दिलाया कि उन्हें युवाओं को सम्मान एवं सद्भाव के साथ व्यक्तिगत परिपक्वता में बढ़ने की यात्रा में, उनका साथ देने की जिम्मेदारी है ताकि वे विश्वास में बल पाकर और प्रभु की कृपा से, प्रेम एवं आशा के फल ला सकें।"

येसु की मित्रता  

संत पापा ने गौर किया कि लातीनी अमरीका एक आशा का महाद्वीप है जैसा कि पूरे विश्व के युवा "ईश्वर के वर्तमान" हैं क्योंकि उनके पुत्र येसु जो उनकी अच्छाई की अभिव्यक्ति हैं वे उनके साथ चलें एवं उनके साथ रहें। येसु के द्वारा पिता ईश्वर प्रेम की भाषा में बोलते हैं।   

पनामा में 24 जनवरी को विश्व युवा दिवस के उद्घाटन के दौरान अपने शब्दों की याद दिलाते हुए संत पापा ने कहा, "प्रभु के प्रेम का अर्थ है गिराने के बदले उठाना, मना करने की अपेक्षा मेल-मिलाप करना, दण्ड देने की अपेक्षा पुनः अवसर देना और अतीत की अपेक्षा भविष्य को देखना।"

मिशनरी एवं साक्षी

तब संत पापा ने युवाओं का आह्वान किया कि वे येसु पर अपने ज्ञान को गहरा करें जिससे कि वे उनके हृदय से संयुक्त होकर जी सकें, मिशनरी शिष्य बन सकें तथा उनकी कोमलता का साक्ष्य दे सकें। इस तरह दूसरे युवा भी येसु के पास आ सकेंगे जो हमेशा जवान हैं। वे उनकी मित्रता का एहसास कर सकेंगे और अपना जीवन भाईचारा एवं ख्रीस्तीय एकात्मता की नींव पर जी सकेंगे।  

19 November 2019, 16:38