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संयुक्त राष्ट्र महासभा की 74वीं बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा की 74वीं बैठक   (2019 Getty Images)

मानवता के खिलाफ अपराध पर वाटिकन की चिंता

अमरीका के लिए वाटिकन के प्रेरितिक राजदूत एवं स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष बेर्नादितो औज़ा ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की 74वीं बैठक में, अंतर्राष्ट्रीय कानून आयोग की रिपोर्ट में मानवता के खिलाफ अपराध पर महासभा को सम्बोधित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

न्यूयॉर्क, शनिवार, 2 नवम्बर 2019 (रेई)˸ वाटिकन प्रतिनिधि ने कहा, "हम सभी के लिए यह एक बड़ी चिंता की बात है कि दुनिया अभी भी राजनीतिक, धार्मिक एवं जातीय हिंसा से डरा हुआ है। राजनीतिक, धार्मिक और जातीय संबद्धता के कारण पीटा जाना, हत्या, गुलाम, बलात्कार, अपहरण अथवा आधुनिक युग के दास के रूप में विभिन्न रूपों में बेचा जाना, कई लोगों के लिए वास्तविक और मौजूदा है।" उन्होंने कहा कि मानवता के विरूद्ध इन अपराधों की निंदा की जानी चाहिए तथा ऐसे अपराधों को बदलने के उद्देश्य से सभी स्तरों पर किए गए प्रयासों को इतिहास के पन्नों में उचित प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

परमधर्मपीठ का समर्थन

इस संदर्भ में, उन्होंने कहा कि परमधर्मपीठ अंतर्राष्ट्रीय कानून आयोग द्वारा तैयार किए गए "मानवता के खिलाफ अपराधों की रोकथाम और सजा पर मसौदा लेख" का स्वागत करती है और साथ ही महासभा द्वारा एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के विस्तार की सिफारिश करने के निर्णय का समर्थन करती है तथा वह वार्ता में रचनात्मक रूप से संलग्न होगी।

वाटिकन प्रतिनिधि ने कहा कि उत्पीड़न से भागने वाले शरणार्थियों और प्रवासियों का स्वागत, सुरक्षा, मदद और एकीकरण किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नए सम्मेलन का विस्तार मौजूदा प्रथागत कानून को संहिताबद्ध करना और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करना है। अपराधों की पहले से सहमत परिभाषा को जोड़ना या संशोधित करना, इससे पहले कि राष्ट्र की प्रथा और कानूनी राय पूरी तरह से विकसित हो गए हो, एक व्यापक सहमति के लिए अनुकूल नहीं होगा।

इस पृष्टभमि पर, उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल अंतर्राष्ट्रीय कानून आयोग के फैसले पर खेद प्रकट करता है कि मसौदा लेख में "लिंग" की परिभाषा को शामिल नहीं किया गया है, जो कि अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायालय के क़ानून की धारा 7 के अनुच्छेद 3 में निहित है, जो अपराधों की परिभाषा का एक अभिन्न अंग है, जैसा कि रोम सम्मेलन के दौरान सहमति दी गयी थी।

जैसा कि एक संभावित सम्मेलन की दिशा में काम जारी है, प्रतिनिधिमंडल ने निम्नलिखित दो मुद्दों को ध्यान में रखे जाने का सुझाव दिया-

न्याय की खोज करने का अवसर

पहला- नया सम्मेलन सभी लोगों को न्याय की खोज करने का अवसर प्रदान करे और उनकी आवाज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनी जाए, विशेषकर, जो अपराध के भय में हैं। भविष्य में इस प्रकार के अपराधों को दूर करने के अंतरराष्ट्रीय सहयोगात्मक प्रयासों द्वारा, खोज और राहत की कोशिश में सहायता देते हुए उन लोगों को लाने के लिए काम करना जो ऐसे अपराधों को न्याय का सामना करने के लिए करेंगे, मानवता के खिलाफ अपराधों के खतरों को समाप्त किया जा सकता है।

कमजोर न्यायिक और सुरक्षा प्रणाली में राष्ट्रों की मदद

दूसरा, भावी सम्मेलन को चाहिए कि वह नाजुक या कमजोर न्यायिक और सुरक्षा प्रणाली में राष्ट्रों की मदद करे, खासकर, अपनी सीमाओं के भीतर रहने वाले नस्लीय, जातीय या धार्मिक अल्पसंख्यकों की रक्षा करे। ऐसे राष्ट्रों को पीड़ितों को न्यायिक और अतिरिक्त-न्यायिक सुरक्षा और उपचार प्रदान करने की क्षमता विकसित करने में सहायता की आवश्यकता हो सकती है, प्रभावी घरेलू संस्थानों के बिना, मानवता के खिलाफ अपराधों की रोकथाम असंभव होगी।

महाधर्माध्यक्ष औज़ा ने अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहन दिया कि वे हिंसा को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करें और निर्णायक रूप से अत्याचार को रोकने हेतु कार्य करें। उन्होंने कहा कि नए कानूनी साधनों के लिए, हमें निवारक कूटनीति तंत्र और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली को और मजबूत करना होगा ताकि मानवता और अन्य सामूहिक अत्याचारों के खिलाफ अपराधों को रोका जा सके।

02 November 2019, 14:32