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चेलूले के सदस्यों से मुलाकात करते संत पापा चेलूले के सदस्यों से मुलाकात करते संत पापा  (Vatican Media)

"चेलूले" के सदस्यों से संत पापा, पल्ली जीवन को जागृत करें

संत पापा फ्राँसिस ने 18 नवम्बर को पल्लियों में सुसमाचार प्रचार के छोटे समुदायों "चेलूले" के स्वंयसेवकों से वाटिकन में मुलाकात की तथा उन्हें अपना संदेश दिया। समुदाय की शुरूआत 30 वर्षों पहले फादर पियेरजोर्जो पेरिनी ने की थी।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 19 नवम्बर 2019 (रेई)˸ सोमवार को संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के पौल षष्ठम सभागार में चेलूले के करीब 6,000 स्वयंसेवकों से मुलाकात की जो विश्व के विभिन्न देशों से आये थे। उनके साथ उनके संस्थापक 90 वर्षीय फादर पियेरजोर्जो पेरिनी भी थे। वे एक इताली पुरोहित हैं जिन्होंने पल्लियों में सुसमाचार प्रचार के छोटे दलों की शुरूआत सन् 1987 में की थी।

सुसमाचार प्रचार की इस प्रणाली में छोटे दलों का निर्माण किया जाता है जो साप्ताहिक रूप से घरों में एक साथ मिलते हैं। इसके मिशन के अनुसार, दलों की मदद से पल्ली पुरोहित अपनी पल्ली में सुसमाचार की शिक्षा देते तथा अपने सामान्य मिशन को पूरा करते हुए इसे मिशनरी रंग देने की कोशिश करते हैं। इस प्रणाली को कलीसिया द्वारा औपचारिक रूप से मान्यता दी गई है।      

पाँच महादेशों से 6000 स्वयंसेवक

सुसमाचार के अथक प्रयासों की सराहना करते हुए संत पापा ने कहा कि "चेलूले" दशकों से चलता आ रहा है। "यह स्वाभाविक है कि कठिन परिश्रम करने के बाद हम समर्पण का फल देखना चाहते हैं किन्तु सुसमाचार हमें दूसरी दिशा की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहन देता है।" उन्होंने स्वयंसेवकों को प्रोत्साहन दिया कि येसु ने अपने शिष्यों से कहा है कि उनका अनुसरण करने वालों को स्वतः पुरस्कार प्राप्त नहीं होगा।  

संत पापा ने संत लूकस रचित सुसमाचार के वाक्यांश को लेते हुए कहा, "सभी आदेशों का पूरा-पूरा पालन करने के बाद हमें कहना चाहिए कि मैं अयोग्य सेवक मात्र हूँ मैंने वही किया है जो मुझे करना चाहिए।" उन्होंने कहा कि यदि सुसमाचार प्रचार करने का हमारा प्रयास पूर्ण है और यदि हम हमेशा तत्पर रहते हैं तब हमारा दृष्टिकोण बदल जाता है। "यदि हम निष्ठावान एवं जागरूक रहते हैं तब हम हमारे कार्य के परिणाम को भी दिख पायेंगे।"

संत पापा ने पल्लियों में सुसमाचार प्रचार के छोटे दलों के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसकी शुरूआत केवल 40 व्यक्तियों से हुई थी और आज इसकी संख्या हजारों है। यह साक्ष्य के रूप में निश्चय ही फलप्रद है जिसके दलों की संख्या बढ़ती ही जा रही है और आज यह विश्वभर में फैला हुआ है।  

संत पापा ने सदस्यों से कहा, "पुनर्जीवित प्रभु की आत्मा के रास्ते का अनुसरण करना कभी न छोड़ें। नवीन से न डरें तथा सुसमाचार प्रचार के पथ पर अपनी गति को धीमी करने वाली बाधाओं को कभी आने न दें। एक मिशनरी शिष्य के रूप में आपका उत्साह कभी कम न हो।"

ईश वचन सुनना एवं ख्रीस्त के रहस्यों को मनाना

संत पापा ने सदस्यों से आग्रह किया कि वे एक-दूसरे को एकाकी, कठिनाई एवं दुःख की घड़ी में न छोड़ें। उन्होंने आह्वान किया कि वे पल्ली समुदाय के जीवन को पुनः जागृत करें, यह सुनिश्चित करें कि यह ईश वचन को सुनने एवं ख्रीस्त के रहस्यों मृत्यु एवं पुनरूत्थान को मनाने का स्थान बने।

संत पापा ने खेद प्रकट करते हुए कहा कि कई कारणों से कई लोग पल्लियों से दूर चले गये हैं अतः लोगों में पुनः उत्साह भरने के लिए उनके जीवन और कार्यों तक पहुँचना अति आवश्यक है।

यदि हमने अपने जीवन में ख्रीस्त से मुलाकात की है तब हम इसे सिर्फ अपने लिए नहीं रख सकते। हम इस अनुभव को दूसरों को अवश्य बाटेंगे, यही सुसमाचार का मुख्य मार्ग है।

निम्न और पिछड़े लोगों के प्रति करुणा का साक्ष्य

संत पापा ने संत लूकस रचित सुसमाचार में पेत्रुस, अद्रेयस, याकूब और योहन को झील के किनारे जाल खींचते हुए येसु द्वारा देखे जाने की घटना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने उनपर दृष्टि डाली और उनका हृदय बदल गया। संत पापा ने कहा कि आज भी यही होता है, ख्रीस्तीय प्रेम मुलाकात का फल है। यह जीवन बदल देता है क्योंकि यह लोगों के हृदय तक पहुँचता और उनका स्पर्श करता है।

संत पापा ने कामना की कि उनकी घोषणा करुणा का साक्ष्य हो, जो यह दर्शाए कि जो कुछ अपने छोटे भाई-बहनों के लिए किये जाते हैं वे स्वयं येसु के लिए किये जाते हैं।

19 November 2019, 17:27