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सब सन्तों के महापर्व पर देवदूत प्रार्थना  01.11.2019  सब सन्तों के महापर्व पर देवदूत प्रार्थना 01.11.2019   (Vatican Media)

सभी लोग सन्त बनने के लिये बुलाये गये हैं

पहली नवम्बर को मनाये जानेवाले सब सन्तों के महापर्व के उपलक्ष्य में सन्त पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित सन्त पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में उपस्थित तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया तथा इस अवसर पर सन्तों के जीवन पर चिन्तन का विश्वासियों से आग्रह किया।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 1 नवम्बर 2019 (रेई, वाटिकन रेडियो): पहली नवम्बर को मनाये जानेवाले सब सन्तों के महापर्व के उपलक्ष्य में सन्त पापा फ्राँसिस ने वाटिकन स्थित सन्त पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में उपस्थित तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया तथा इस अवसर पर सन्तों के जीवन पर चिन्तन का विश्वासियों से आग्रह किया।  

सन्त सामान्य व्यक्ति

उन्होंने कहा, "आज का महापर्व हमें स्मरण दिलाता है कि हम सब सन्त होने के लिये बुलाये गये हैं।" उन्होंने कहा, "सन्त आत्माएँ केवल प्रतीक मात्र नहीं हैं बल्कि सन्त वे लोग हैं जिन्होंने एक समय इस पृथ्वी पर हमारी तरह जीवन यापन किया तथा अपने सदाचरण से हम सबके लिये सुन्दर आदर्श छोड़ा है।"

सन्तता ईश्वर का वरदान

सन्त पापा ने इस तथ्य पर बल दिया कि सन्तता वह लक्ष्य नहीं है जिसे अपनी शक्ति मात्र से प्राप्त किया जा सके बल्कि सन्तता ईश्वर की कृपा का फल है जिसके लिये प्रतिदिन सतत् प्रार्थना की आवश्यकता है। "ईश्वर की कृपा वह वरदान है जिसके साथ कोई सौदा या समझौता नहीं किया जा सकता है बल्कि इसे पवित्र आत्मा द्वारा स्वीकार करने एवं ग्रहण करने की आवश्यकता है, जो बपतिस्मा के दिन से ही हमारे बीच विद्यमान रहते हैं।"

सन्तता वरदान एवं बुलाहट

सन्त पापा ने कहा कि सन्तता वरदान होने के साथ-साथ एक बुलाहट भी है। यह वह मार्ग है जिसपर अग्रसर होने के लिये प्रत्येक विश्वासी का आह्वान किया जाता है ताकि एक दिन वह अनन्त ईश्वर की महिमा में प्रवेश कर सके। इस प्रकार, सन्त पापा ने कहा, "सन्तता ईश्वर की बुलाहट का प्रत्युत्तर बन जाती है। इस परिप्रेक्ष्य में, उदारता के साथ तथा प्रेमपूर्वक, अपने जीवन की हर अवस्था में, दायित्वों के बीच तथा सभी परिस्थितियों में पवित्रता हेतु गम्भीर एवं दैनिक प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण है।"    

सन्त पापा ने स्मरण दिलाया कि जिन सन्तों का आज हम पर्व मना रहे हैं उन्होंने यह स्वीकार किया था कि उन्हें ईश्वरीय आलोक की ज़रूरत थी और इसीलिये आज वे अनन्त काल तक ईश्वर की महिमा में उनका स्तुतिगान कर रहे हैं। इन्हीं से पवित्र शहर का निर्माण हुआ है जिसकी ओर हम सब जीवन की तीर्थयात्रा में आगे बढ़ते हुए आशा के साथ अपनी दृष्टि लगाये हुए हैं।

सन्त पापा ने कहा, "सन्तगण हमारा आह्वान करते हैं कि हम स्वर्ग की ओर आँखें उठायें,  धरती की वास्तविकता को भुलाने के लिये नहीं, अपितु, इसके द्वारा प्रस्तुत चुनौतियों का साहस और आशा के साथ सामना करने के लिये। माँ मरियम हमारी सान्तवना एवं हमारी आशा अपनी ममतामय मध्यस्थता के साथ हमारी इस तीर्थयात्रा में हमारा साथ दें।"  

                     

01 November 2019, 12:18