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जापान के पारंपरिक परिधान में संत पापा युवाओं के साथ जापान के पारंपरिक परिधान में संत पापा युवाओं के साथ  (Vatican Media)

जापान के युवाओं को संत पापा फ्राँसिस का संदेश

जापान की प्रेरितिक यात्रा के दौरान संत पापा फ्राँसिस ने युवाओं से मुलाकात की, जो "आने वाले कल के निर्माता" हैं। उन्होंने युवाओं को स्वीकृति, बंधुत्व और मुलाकात की संस्कृति के आधार पर भविष्य में अपनी आशा रखने हेतु आमंत्रित किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

टोकियो, सोमवार 25 नवंबर 2019 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार सुबह टोकियो के संत मरियम महागिरजाघर में युवाओं से मुलाकात की। जापान में रहने वाले युवाओं की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता का प्रतिनिधित्व करते हुए, एक काथलिक युवा, एक बौद्ध युवा और एक प्रवासी युवा ने अपनी गहरी आशंकाओं और आकांक्षाओं को साझा करते हुए संत पापा से कुछ महत्वपूर्ण सवाल पूछा।

मिक्की ने एक वास्तविकता को उजागर किया जिसमें समय की कमी और भयावह प्रतिस्पर्धा अक्सर युवा लोगों को "बेशुमार सितारों को देखने में असफल रहने और ईश्वर की महानता का अनुभव करने और अपनी खुद की कमजोरी का अनुभव करने और ईश्वर के साथ होने का एहसास करने की खुशी से भरे मौके को खोने का कारण बनती है।"

मासाको ने विशेष रूप से जापान में विद्वानों और छात्रों के बीच, बदमाशी और आत्महत्या के संकट पर प्रकाश डाला, और इस तथ्य पर भी चर्चा की, कि तकनीक के गलत उपयोग से कई युवा लोगों को अकेलेपन, अलगाव और सच्चे दोस्तों की कमी का अनुभव होता है।

फिलिपिनो प्रवासी लियोनार्डो ने संत पापा से कहा, “संत पापा कृपया हमें बताईये कि भेदभाव और धमकाने की समस्याओं का सामना कैसे करना चाहिए जो दुनिया भर में फैल रही हैं?

संत पापा फ्राँसिस ने लियोनार्डो को "दूसरों पर धौंस करना और भेदभाव का अनुभव को साझा करने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक युवा अब ऐसे अनुभवों के बारे में बोलने की हिम्मत पा रहे हैं।

धौंस दिखाना

 उन्होंने कहा, दूसरों पर धौंस दिखाना, "उस समय हमारे आत्मविश्वास पर हमला करती है जब हमें सबसे ज्यादा खुद को स्वीकार करने और जीवन में नई चुनौतियों का सामना करने की क्षमता की आवश्यकता होती है"। संत पापा ने इसे एक महामारी के रूप में वर्णित किया और कहा कि इसका इलाज करने का सबसे अच्छा तरीका है एकजुट होना और "जो गलत है उसे नहीं" कहना सीखें। उन्होंने सभी युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने "सहपाठियों और दोस्तों के बीच में खड़े होने और यह कहने के लिए कभी न डरें कि "आप जो कर रहे हैं, वह गलत है।”

डर

संत पापा ने कहा कि डर हमेशा से अच्छाई का शत्रु रहा है, क्योंकि यह प्यार और शांति का शत्रु है। सभी धर्म सहिष्णुता, सद्भाव और दया सिखाते हैं, भय, विभाजन और संघर्ष नहीं।

 उन्होंने उपस्थित युवाओं को याद दिलाया कि येसु अपने शिष्यों से हमेशा कहा करते थे,“ डरो मत”। संत पापा ने कहा कि ईश्वर और हमारे भाइयों और बहनों के लिए प्यार हमारे  डर को दूर करता है। "खुद येसु जानते थे उन्हें तिरस्कार और अस्वीकार किया जाएगा, यहां तक कि क्रूस पर चढ़ाया जाएगा। उन्होंने भी अपने जीवन में  एक अजनबी, एक प्रवासी और दूसरों से अलग होने का भी अनुभव किया था। एक अर्थ में, प्रभु येसु "बाहरी व्यक्ति" थे, एक बाहरी व्यक्ति जिसने दूसरों को अपना पूरा जीवन दिया।

संत पापा फ्रांसिस ने यवाओं से कहा, "दुनिया को आपकी जरूरत है, यह कभी न भूलें!" हम हमेशा उन सभी चीजों को खोजते हैं जो हमारे पास नहीं हैं, लेकिन हमें उन सारी चीजों को भी देखना चाहिए जो हमारे पास है जिसे हम दूसरों के साथ साझा कर सकते हैं। "प्रभु को आपकी आवश्यकता है, ताकि आप अपने आस-पास के उन सभी लोगों को प्रोत्साहित कर सकें जो ऊपर उठने के लिए आपकी मदद का इंतजार कर रहे हैं।" दूसरों के लिए समय देना, उनकी बातों को सुनना, उनके साथ साझा करना और उन्हें समझने की कोशिश करना, बहुत बड़ा गुण है। इस मनोभाव को आप अपने अंदर विकसित करें।

आध्यात्मिक गरीबी

मिक्की द्वारा पूछे गये सवाल, कि एक ऐसे समाज में जो उन्मत्त, प्रतिस्पर्धी और उत्पादकता पर केंद्रित है, युवा किस तरह से ईश्वर के लिए जगह बना सकते हैं, के जवाब में संत पापा ने कहा, "एक व्यक्ति, एक समुदाय या यहां तक कि एक पूरे समाज का विकास तेजी से हो रहा है, लेकिन हमें याद रखनी चाहिए कि हमारा एक आंतरिक जीवन है जो कम विकसित है और उसमें जीवन शक्ति की कमी है।

आंतरिक रुप से अविकसित व्यक्ति सपना नहीं देखते, हंसते या खेलते नहीं हैं। उन्हें कोई भी बात आश्चर्यजनक नहीं लगती, वे लाश की तरह हैं, दूसरों के साथ जीवन की खुशियाँ मनाने में असमर्थता के कारण उनके दिलों ने धड़कना बंद कर दिया है।

संत पापा ने कहा कि दुनिया में कितने लोग भौतिक रूप से समृद्ध हैं, लेकिन वे अकेलेपन की जिन्दगी जीते हैं। संत  पापा ने कलकत्ता के संत मदर तेरेसा, जिन्होंने सबसे गरीब लोगों के बीच काम किया, के हवाले से कहा, “अकेलापन और प्यार न किये जाने की भावना, गरीबी का सबसे भयानक रूप है।”

संत पापा फ्राँसिस ने कहा, हम सभी को आध्यात्मिक गरीबी का मुकाबला करना है, लेकिन युवा लोगों की एक विशेष भूमिका है "क्योंकि यह प्राथमिकताओं और विकल्पों में एक बड़े बदलाव की मांग करता है"।

उन्होंने कहा, “इसका मतलब मुझे यह पहचाने की जरुरत है कि सबसे महत्वपूर्ण चीज वह नहीं है जो मेरे पास है या जिसे मैं प्राप्त कर सकता हूँ, लेकिन जिसके साथ मैं इसे साझा कर सकता हूँ। मैं जिस चीज के लिए जी रहा हूँ, उस पर ध्यान देना इतना महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन मैं किसके लिए जीता हूँ। चीजें महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण हैं लोग।”

लोगों के बिना, हम अमानवीय है, हम अपने चेहरे और नाम खो देते हैं और हम सिर्फ एक वस्तु मात्र बनकर रह जाते हैं।

मित्रता

संत पापा ने कहा कि मित्रता एक सुंदर चीज है जो आप दुनिया को दे सकते हैं। उन्होंने युवाओं को स्वीकृति, बंधुत्व और मुलाकात की संस्कृति के आधार पर भविष्य में अपनी आशा रखने के लिए आमंत्रित किया। प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा का सम्मान करें विशेष रूप से जिन्हें प्यार और समझ की सबसे ज्यादा जरूरत है।

संत पापा ने कहा,“शारीरिक रूप से जीवित रहने के लिए, हमें सांस लेते रहना होता है। यह कुछ ऐसा है जो स्वचालित रूप से चलता रहता है। आध्यात्मिक रुप से जीवित रहने के लिए, हमें प्रार्थना और ध्यान के माध्यम से आध्यात्मिक साँस लेने के लिए सीखने की भी ज़रूरत है।”

उन्होंने उपस्थित युवाओं से अपने दिल की गहराइयों में ईश्वर से बातें करने और उन्हें सुनने के लिए सीखने का आग्रह किया और साथ ही प्रेम और सेवा के कार्यों द्वारा दूसरों तक पहुंचने हेतु प्रेरित किया।

अपने सपनों को दरकिनार न करें

अंत में संत पापा फ्राँसिस ने छात्र और शिक्षिका के रूप में मासाको के अनुभव का उल्लेख किया और कहा कि ज्ञान में वृद्धि की कुंजी सही जवाब खोजने में नहीं बल्कि सही प्रश्नों को पूछने में है।

उन्होंने कहा, "पूछते रहें और दूसरों को भी जीवन के अर्थ के बारे में सही प्रश्न पूछने में मदद करें। हम हमारे बाद आने वाले लोगों के लिए बेहतर भविष्य कैसे बना सकते हैं।"

अंत में संत पापा ने कहा कि वे हिम्मत न हारें, अपने सपनों को दरकिनार न करें, विशाल क्षितिज को देखने की हिम्मत करें और वे देख पायेंगे कि सुनहरा भविष्य उनका इन्तजार कर रहा है, उन्हें हासिल करें।

25 November 2019, 16:14