खोज

Vatican News
एफएबीसी और थाई धर्माध्यक्षों के साथ संत पापा एफएबीसी और थाई धर्माध्यक्षों के साथ संत पापा 

एफएबीसी और थाई धर्माध्यक्षों को संत पापा का संदेश

संत पापा ने बैंकॉक के सामप्रान स्थित धन्य निकोलस बंकरर्ड किटब्रामुंग तीर्थालय में थाईलैंड के धर्माध्यक्षों और एशिया के धर्माध्यक्षीय संघ के सम्मेलन (एफएबीसी) के धर्माध्यक्षों को संबोधित किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

बैंकॉक, शुक्रवार 22 नवम्बर 2019 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने  कार्डिनल फ्रांसिस जेवियर क्रिंग्सक को उनके परिचय भाषण और संक्षेप में अपनी खुशियाँ,आशाएँ, योजनाएँ और सपने, चुनौतियों को साझा करने के लिए धन्यवाद दिया।

धन्य निकोलस बंकरड किटबाम्रंग

संत पापा ने कहा कि वे आज धन्य निकोलस बंकरड किटब्रामुंग के तीर्थालय में है, जिन्होंने अपने जीवन सुसमाचार प्रचार और धर्मशिक्षा देने में समर्पित कर दिया। मुख्य रूप से थाईलैंड और वियतनाम के कुछ हिस्से में और लाओस की सीमा पर सुसमाचार का प्रचार किया। धन्य निकोलस को 1930 में उत्तरी थाईलैंड में एक मिशनरी पुरोहित के रूप में भेजा गया था, जहाँ उन्होंने धर्मप्रचारकों को प्रशिक्षित किया और अपने धर्म से दूर चले गये काथलिकों को फिर से विश्वास में लाने का काम किया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ख्रीस्तियों के विरोधी में, उन्हें देश भक्ति के विरोध में कार्य के लिए गिरफ्तार किया गया और 15 साल जेल की सजा सुनाई गई। उन्होंने अपने साथी कैदियों में से 68 को बपतिस्मा देते हुए अपना मिशनरी काम जारी रखा। 1944 में 49वर्ष की आयु में जेल के अस्पताल में तपेदिक से उनकी मृत्यु हो गई।

 एफएबीसी की 50 वीं वर्षगांठ

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि वर्ष 2020 एशियाई धर्माध्यक्षीय संघ के सम्मेलन की नींव की पचासवीं सालगिरह को चिह्नित करेगा। यह समय उन 'तीर्थालयों का दौरा करने का एक उपयुक्त अवसर होगा, जहाँ मिशनरी जड़ें संरक्षित हैं और अपनी छाप छोड़ रखी हैं। इन पवित्र भूमियों को तीर्थालय के रुप में विकसित करें जिससे कि एशिया की कलीसिया और समाज दोनों ही नए सिरे से सुसमाचार प्रचार और अपने विश्वास को मजबूत करने के लिए इन तीर्थालयों की यात्रा कर पायेंगे।

एक बहुसांस्कृतिक और बहु-धार्मिक महाद्वीप

संत पापा फ्राँसिस ने एशिया को एक "बहुसांस्कृतिक और बहु-धार्मिक महाद्वीप" के रूप में वर्णित किया, जहां तेजी से तकनीकी प्रगति अपार संभावनाओं का दरवाजा खोल रही है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप उपभोक्तावाद और भौतिकवाद का विकास भी हो रहा है। संत पापा ने उपभोक्तावाद और भौतिकवाद से उत्पन्न विशिष्ट परिस्थियों के प्रति अपनी चिंता प्रकट की, जैसे ड्रग्स और मानव तस्करी का संकट, प्रवासियों और शरणार्थियों की देखभाल का संकट, श्रमिकों का शोषण, साथ ही अमीर और गरीब के बीच आर्थिक और सामाजिक असमानता इत्यादि।

प्रथम मिशनरियों की स्मृति

संत पापा ने पहले मिशनरियों को याद करते हुए कहा कि उनका "साहस, आनंद और असाधारण सहनशक्ति हमें अपनी वर्तमान स्थिति और मिशन का जायजा लेने में अधिक व्यापक और अधिक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण बनाये रखने में मदद करता है।" उनकी याद हमें इस विश्वास से मुक्त करती है कि “अतीत सुसमाचार की घोषणा के लिए बेहतर था। उनकी याद और उनका मिशन हमें "फलहीन या बेकार की चर्चाओं में समय बिताने से बचने में भी मदद करता है।"

पवित्र आत्मा की शक्ति

संत पापा ने कहा कि पवित्र आत्मा मिशनरियों के साथ रहता है वह उनके आगे जाता और राह दिखाता है। अतीत में हम पाते हैं कि पवित्र आत्मा अनगिनत मिशनरियों को शक्ति प्रदान की, जिससे वे किसी भी देश के लोगों को अपनी संस्कृति नहीं थोपते थे परंतु उनकी संस्कृति और परिस्थिति में प्रवेश कर पाते थे। वे उनके परिवेश में सुसमाचार का प्रचार करते थे। वे निडर और साहसी थे क्योंकि उन्हें पता था कि सुसमाचार एक उपहार है जिसे सभी के साथ और सभी के लिए साझा किया जाना चाहिए।"संत पापा ने कहा कि उनका मिशन अपनी भेड़ों की रखवाली करना है। उन्हें एक भले चरवाहे का संरक्षण देना, उनके लिए चिंता करना है। संत पापा ने कहा कि एक भेड़ तभी खो जाती है जब वह उस खोने देता है उससे पहले नहीं।

जीवन द्वारा प्रभु का साक्ष्य देना

संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि दूसरों के पास सुसमाचार ले जाने से पहले, हमें खुद को "सुसमाचार में परिवर्तित" होने देना चाहिए। प्रभु हमारे जीवन को शुद्ध और पवित्र करते हैं इसतरह प्रभु का साक्ष्य देना ही कलीसिया की बुलाहट बन जाती है। वह अनजान सड़कों पर बिना डर आगे बढ़ती और जो भी लोग उनके सम्पर्क में आते हैं उनका देखभाल करने में कभी पीछे नहीं रहती। संत पापा ने धर्माध्यक्षों से कहा, “एशिया के कई देशों में आपकी संख्या कम हैं। आपने अल्पसंख्यक होने के बावजूद खुद को हीन भावना से दूषित नहीं होने दिया और न ही कोई शिकायत है कि आपको मान्यता नहीं दी जाती है।” यह मनोभाव हम आपसे सीख सकते हैं।

मिशनः प्रभु और उसके लोगों के लिए जुनून

 संत पापा फ्राँसिस ने धर्माध्यक्षों से इस बात पर जोर देते हुए कहा, “हम मिशन के प्रभारी नहीं हैं, पवित्र आत्मा मिशन का सच्चा नायक है। "हम आत्मा में रूपांतरित हुए हैं ताकि हम जहाँ कहीं भी रहें, हमें वहाँ रुपांतरण लाना है। हमारा मिशन येसु मसीह और अपने लोगों के लिए एक जुनून है।”

 संत पापा ने कहा, “हम सभी मसीही समुदाय के सदस्य हैं, हमें स्वामी या प्रबंधक बनने के लिए नहीं बल्कि सेवक बनने के लिए चुना गया है। इसका मतलब है "हमें अपने लोगों की सेवा धैर्य और दया के साथ करनी हैं, उनकी बातें सुननी है और उनका सम्मान करना है। संत पापा ने कहा कि वे लोकधर्मियों के प्रेरिताई पहलों को बढ़ावा दें, साथ ही समय-समय पर उनका मूल्यांकन भी करें। संत पापा ने याद दिलाया कि कई देशों में लोक धर्मियों ने सुसमाचार का प्रचार किया और विश्वास के बीच को बोया। उन्होंने अपनी सरल भाषा का प्रयोग करते हुए और अपनी संस्कृति में सुसमाचार को प्रवेश कराया। उन्होंने बड़े उत्साह के साथ अपनों के बीच मसीह को लाया।

 धर्माध्यक्ष और उनके पुरोहित

संत पापा ने धर्माध्यक्षों को हमेशा अपने पुरोहितों के लिए दरवाजा खुला रखने हेतु प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, “धर्माध्यक्ष का निकटतम पड़ोसी पुरोहित है, आप अपने पुरोहितों के करीब रहें, उनकी बात सुनें और हर स्थिति में उनका साथ दें, खासकर जब आप देखते हैं कि वे हतोत्साहित या उदासीन हैं, जो शैतान के प्रलोभनों में सबसे खराब प्रलोभन है। उन्होंने कहा कि आप न्यायाधीशों के रूप में नहीं लेकिन पिता के रूप में, प्रबंधकों के रूप में नहीं, बल्कि सच्चे बड़े भाइयों के रूप में उनके साथ पेश आयें।”

संत पापा फ्राँसिस ने अपना संदेश समाप्त करते हुए कहा कि उन्हें अपने समुदायों के बीच कई मुद्दों का सामना करना पड़ता है। “आइए, हम भविष्य की और निश्चित रूप से जानें कि जीवन यात्रा में हम अकेले नहीं हैं। प्रभु हमारे साथ हैं। वे हमारी प्रतीक्षा करते हैं विशेष रुप से रोटी तोड़ते वक्त। हम उसे अनुभव करें और अपने पास रहने के लिए आमंत्रित करें।

संत पापा ने धर्माध्यक्षों की उपस्थिति में एशिया के सभी ख्रीस्तीय समुदायों, बीमारों और कमजोरों को अपना सामीप्य और आशीष प्रदान किया।

एशिया के धर्माध्यक्षों (एफएबीसी) से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस
22 November 2019, 14:55