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जापान के सोफिया विश्वविद्यालय को सम्बोधित करते संत पापा जापान के सोफिया विश्वविद्यालय को सम्बोधित करते संत पापा  (ANSA)

विश्वविद्यालय में पोप : ईश्वरीय ज्ञान की तलाश, खोज और प्रसार

जापान की प्रेरितिक यात्रा के अंतिम पड़ाव पर संत पापा फ्राँसिस ने टोक्यो स्थित सोफिया विश्वविद्यालय का दौरा किया जो जापान के जेस्विट पुरोहितों द्वारा संचालित है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

जापान, मंगलवार, 26 नवम्बर 2019 (रेई)˸ संत पापा ने वहाँ के विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा, "प्रिय भाइयो एवं बहनो, यह मेरे लिए बड़े हर्ष की बात है कि मेरी प्रेरितिक यात्रा के समापन पर जापान छोड़कर रोम लौटने के पहले कुछ मिनट आपके साथ व्यतीत कर पा रहा हूँ।"

इस देश में मेरा रूकना छोटा और व्यस्तता भरा था किन्तु मैं ईश्वर और आप सभी को धन्यवाद देता हूँ कि मुझे इस देश का दौरा करने का अवसर मिला जिसको जानने की तीव्र अभिलाषा संत फ्राँसिस जेवियर को थी और जहाँ कई शहीदों ने अपने ख्रीस्तीय विश्वास की गवाही दी है। ख्रीस्तियों की संख्या कम है इसके बावजूद उनकी उपस्थिति महसूस की जा सकती है। मैं उम्मीद करता हूँ कि यह आपसी सम्मान की भावना भविष्य में बढ़ता जाए। मैंने गौर किया कि जापानी समाज में जो निपुणता और व्यवस्था है उसमें किसी महान वस्तु के लिए एक तड़प है, एक अधिक मानवीय, सहानुभूतिपूर्ण एवं करुणामय समाज बनाने के लिए एक गहरी ललक है।

टोक्यों के सोफिया विश्वविद्यालय में
टोक्यों के सोफिया विश्वविद्यालय में

अध्ययन एवं चिंतन

अध्ययन एवं चिंतन हरेक संस्कृति का हिस्सा है और आपकी जापानी संस्कृति अपने प्राचीन एवं समृद्ध धरोहर के लिए गौरवशाली है। जापान समग्र रूप से एशिया की सोच और धर्मों को एकीकृत करने तथा एक स्पष्ट प्रतिष्ठा के साथ संस्कृति के निर्माण में सक्षम रहा है। अशिकागा स्कूल जिससे संत फ्राँसिस जेवियर अत्यन्त प्रभावित थे जो ज्ञान को ग्रहण करने एवं हस्तांतरित करने में जापान की संस्कृति की क्षमता का उदाहरण है।

अध्ययन, चिंतन और अनुसंधान केंद्र वर्तमान संस्कृति में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। यही कारण है कि यह महत्वपूर्ण है जो उसके बेहतर भविष्य के लिए  उसकी स्वायत्तता और स्वतंत्रता को प्रस्तुत करता है। चूँकि विश्वविद्यालय भावी नेताओं को प्रशिक्षित करने का प्रमुख स्थल है यह आवश्यक है कि ज्ञान एवं संस्कृति का विस्तार शैक्षणिक संस्थानों के जीवन के हर आयाम को प्रेरित करे। इसे अधिक समावेशी बनाये तथा अवसर एवं सामाजिक उन्नति प्रदान करे।

टोक्यों के सोफिया विश्वविद्यालय में
टोक्यों के सोफिया विश्वविद्यालय में

एक बेहतर समाज का निर्माण

हमारे संसाधनों को निर्माणात्मक एवं प्रभावशाली तरीक से व्यवस्थित करने के लिए हमें हमेशा ही सच्ची प्रज्ञा की आवश्यकता है। वर्तमान जापान के रूप में प्रतिस्पर्धी और तकनीकी रूप से उन्मुख समाज में, यह विश्वविद्यालय न केवल बौद्धिक विकास का केंद्र हो, बल्कि एक ऐसा स्थान भी हो जहाँ एक बेहतर समाज एवं एक अधिक आशामय भविष्य आकार ले। मेरे प्रेरितिक विश्वपत्र "लौदातो सी" की भावना में मैं जोड़ना चाहता हूँ कि प्रकृति के प्रति प्रेम जो एशियाई संस्कृति में खास है यहाँ पृथ्वी के संरक्षण के लिए एक सामान्य और दूरदर्शी चिंता में अभिव्यक्ति की तलाश करनी चाहिए, जो कि हमारा सामान्य घर है। हम यह न भूलें कि एक सच्ची मानवता, एक नये संश्लेषण के लिए निमंत्रण दे रही है, जो हमारी तकनीकी संस्कृति के बीच बंद दरवाजे के नीचे धीरे से रिसने वाली धुंध के समान अज्ञात स्थिति में है।

सोफिया विश्वविद्यालय की विशेषताओं पर गौर करते हुए संत पापा ने कहा कि सोफिया विश्वविद्यालय मानवतावादी, ख्रीस्तीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान से रेखांकित है। इसकी स्थापना के समय से ही विश्वविद्यालय विभिन्न देशों के प्रोफेसरों से सम्पन्न है। यह उस समय में भी सम्पन्न बना रहा, जब राष्टों के बीच संघर्ष चल रहे थे। सभी प्रोफेसर जापान के युवाओं को अपना उत्तम अर्पित करना चाहते हैं। इसी भावना से आपने यहाँ और विदेशों में भी कई तरह से जरूतमंद लोगों की मदद की है। मैं विश्वास करता हूँ कि आपके विश्वविद्यालय की पहचान अधिक मजबूत हो ताकि आज के महान तकनीकी विकास को अधिक मानवीय, न्यायपूर्ण एवं पारिस्थितिक रूप से जिम्मेदार शिक्षा की सेवा में लगाया जा सके।

टोक्यों के सोफिया विश्वविद्यालय में
टोक्यों के सोफिया विश्वविद्यालय में

संत इग्नासियुस की परम्परा

संत इग्नासियुस की परम्परा जिसपर सोफिया आधारित है उससे प्रोफेसरों और छात्रों को समान रूप से एक माहौल बनाने हेतु प्रेरित होना चाहिए, जो चिंतन और विवेक को बढ़ावा देता है।

विश्वविद्यालय का कोई भी विद्यार्थी चुनने, जिम्मेदारी लेने और मुक्त अंतःकरण होने सीखे बिना स्नातक पूरा न करे। हर परिस्थिति में, चाहे वह जटिल ही क्यों न हो वे अपने व्यवहार में न्यायी, मानवीय, विवेकशील एवं जिम्मेदार हो सकें और खुद को कमजोर लोगों के दृढ़ रक्षक के रूप में दिखा सकें। वे अपनी ईमानदारी के लिए जाने जाएँ जिसकी आज बहुत अधिक आवश्यकता है जहाँ शब्द एवं कार्य बहुधा भ्रामक या धोखेबाज हो गये हैं।  

 युवाओं पर ध्यान केंद्रित करना

संत पापा ने कहा कि येसु समाज और स्वयं उन्होंने इस वर्ष के लिए जो प्रस्ताव रखा है वह स्पष्ट है कि विश्वव्यापी स्तर पर युवाओं का साथ देना, एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता है और सभी येसु समाजी संस्थाओं को इस बात को बढ़ावा देना चाहिए। युवा पर सिनॉड एवं इसके दस्तावेज में साफ है कि विश्वव्यापी कलीसिया विश्व के युवाओं की ओर आशा एवं दिलचस्पी से देख रही है। संत पापा ने सोफिया के प्रोफेसरों को सम्बोधित कर कहा कि विश्वविद्यालय को पूरी तरह युवाओं पर ध्यान केंद्रित करना है जिससे कि वे न केवल उत्तम शिक्षा प्राप्त करें बल्कि शिक्षा का हिस्सा बनें, अपनी अंतर्दृष्टि प्रदान करें एवं भविष्य के लिए अपनी आशा एवं दर्शन को बांटें। आपका विश्वविद्यालय साझाकरण के ऐसे आदर्श और संवर्धन एवं जीवन शक्ति के लिए जाना जाए जिसे वह उत्पन्न करता है।  

टोक्यों के सोफिया विश्वविद्यालय में
टोक्यों के सोफिया विश्वविद्यालय में

गरीबों के साथ चलना

सोफिया की ख्रीस्तीय एवं मानवीय परम्परा पूरी तरह से एक समान है, जिसका मैंने उल्लेख किया है, जिसका अर्थ है कि हमारी दुनिया के गरीब और बहिष्कृत लोगों के साथ चलना। विश्वविद्यालय, जो अपने मिशन पर केंद्रित है, उसे हमेशा एक "द्वीपसमूह" बनाने के लिए खुला होना चाहिए जो वास्तविकताओं को जोड़ने में सक्षम हो जिसे सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से अलग माना जा सकता है।

दूरियों और पृथकता को कम करने के उद्देश्य से एक शैक्षिक दृष्टिकोण लाने के प्रयास में, हाशिये पर जीवन यापन करने वालों को भी विश्वविद्यालय के जीवन एवं पाठ्यक्रम में रचनात्मक रूप से शामिल किया जाना चाहिए। विश्वविद्यालय की गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा का लाभ केवल कुछ लोगों के लिए सीमित न हो किन्तु यह न्याय और आम अच्छाई की सेवा के प्रयास से लगातार अवगत हो। जिस क्षेत्र में काम करने के लिए बुलाये जाते हैं, उस क्षेत्र में हरेक अपनी सेवा दे सकें। यह एक ऐसी चिंता है जो हर किसी का ख्याल करती है। जैसा कि संत पेत्रुस की सलाह को संत पौलुस याद दिलाते हुए कहते हैं हम गरीबों को न भूलें। (गला 2:10)

ईश्वर की खोज, प्राप्ति और प्रसार का मिशन

संत पापा ने अंत में सोफिया परिवार के लिए कामना की कि यह संदेश और आज की मुलाकात उनके जीवन एवं उस विश्वविद्यालय के लिए फल उत्पन्न करे। प्रभु और कलीसिया, ईश्वर की खोज, प्राप्ति और प्रसार के मिशन में साझा करने हेतु आप पर भरोसा करते हैं, ताकि आप वर्तमान समाज को खुशी और आशा प्रदान करें। कृपया मेरे लिए और जिन्हें हमारी मदद की आवश्यकता है उनके लिए प्रार्थना करें।

उन्होंने सोफिया विश्वविद्यालय से विदा लेते हुए कहा, "अब मैं जापान से प्रस्थान करने वाला हूँ। मैं आपके माध्यम से समस्त जापान के लोगों को मेरी प्रेरितिक यात्रा के दौरान उनके सुन्दर स्वागत एवं स्वीकृति के लिए धन्यवाद देता हूँ। मैं आप सभी के लिए प्रार्थना करूँगा।"  

जापान के सोफिया विश्वाविद्याय में संत पापा फ्राँसिस का दौरा

          

26 November 2019, 17:11