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सन्त पापा फ्राँसिस, वाटिकन तस्वीरः 14.11.2019 सन्त पापा फ्राँसिस, वाटिकन तस्वीरः 14.11.2019   (AFP or licensors)

अपराधिक कानून के विश्व कांग्रेस को सन्त पापा का सन्देश

वाटिकन में शुक्रवार को, अंतर्राष्ट्रीय अपराधिक कानून के विश्व कांग्रेस के प्रतिभागियों ने सन्त पापा फ्राँसिस का साक्षात्कार कर उनका सन्देश सुना। सन्त पापा ने एक न्यायिक समाज के निर्माण में योगदान देने के लिये इस क्षेत्र में कार्यरत सभी लोगों के प्रति हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि उनकी अनमोल सेवाओं से समाज में मानव मर्यादा के सम्मान को प्रोत्साहन मिला है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर- वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 15 नवम्बर 2019 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन में शुक्रवार को, अंतर्राष्ट्रीय अपराधिक कानून के विश्व कांग्रेस के प्रतिभागियों ने सन्त पापा फ्राँसिस का साक्षात्कार कर उनका सन्देश सुना। सन्त पापा ने एक न्यायिक समाज के निर्माण में योगदान देने के लिये इस क्षेत्र में कार्यरत सभी लोगों के प्रति हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि उनकी अनमोल सेवाओं से समाज में मानव मर्यादा के सम्मान को प्रोत्साहन मिला है।

अपराधिक कानून की वर्तमान स्थिति

सन्त पापा ने कहा कि हालांकि विगत दशकों में अपराधिक कानून के क्षेत्र में, अपराध और सज़ा के सिलसिले में, खुलापन दर्शाया है तथापि, इसके बावजूद, आपराधिक कानून खुद को उन खतरों से बचाने में विफल रहा है, जो हमारे दिनों में, लोकतंत्रवाद और कानून के शासन की पूर्ण वैधता पर मंडरा रहे हैं। दूसरी ओर, आपराधिक कानून प्रायः वास्तविकता के आंकड़ों की उपेक्षा कर देता है और इस तरह एक महज अटकलबाज़ियों के बाज़ार रूप में दिखाई देता है। इस सन्दर्भ में उन्होंने आपराधिक आदर्शवाद के जोखिम के प्रति ध्यान आकर्षित कराया जो समस्या को जड़ से देखने में असमर्थ रहता है।

सन्त पापा ने कहा कि सर्वप्रथम, न्यायविदों को आज ख़ुद से पूछना चाहिए कि वे उन घटनाओं का मुकाबला करने के लिए अपने ज्ञान को किस तरह से लागू कर सकते हैं, जो लोकतांत्रिक संस्थानों और मानवता के विकास को ख़तरे में डालती हैं।

वर्तमान विश्व की ज़रूरत

सन्त पापा ने कहा, "ठोस शब्दों में कहे तो हर आपराधिक वकील के समक्ष प्रस्तुत वर्तमान चुनौती दंडात्मक तर्कहीनता को समाहित करने की है, जो खुद को सामूहिक कारावास, जेलों की संकुलता और यातना, सुरक्षा बलों की मनमानी और दुर्व्यवहार, बलात जुर्माना, सामाजिक विरोध प्रदर्शनों का  का अपराधीकरण, निवारक कारावास का दुरुपयोग और सबसे दुर्भाग्यपूर्ण दंड और उससे सम्बन्धित प्रक्रियात्मक गारंटी का छीना जाना।"

सन्त पापा ने इस तथ्य पर ग़ौर कराया कि वैश्वीकृत अर्थ व्यवस्था में प्रायः, व्यक्तियों एवं पर्यावरण को नुकसान पहुँचानेवाली बड़ी बड़ी कम्पनियों के अपराध को गौण मान लिया जाता है जबकि छोटे-छोटे अपराधियों के पीछे लगकर न्यायिक निकाय में छिपी खामियों पर पर्दा डालने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने कहा कि न्यायसंगत समाज के निर्माण के लिये केवल कानून को कुछ ही कमज़ोर लोगों पर लागू नहीं किया जा सकता बल्कि समानता और न्याय के आधार पर सभी लोगों को इस निकाय के नीचे शरण मिलनी चाहिये।  

15 November 2019, 11:31