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जापान के नागास्की में मिस्सा बलिदान के दौरान संत पापा जापान के नागास्की में मिस्सा बलिदान के दौरान संत पापा  (ANSA)

आवाज उठाना एक चुनौती, संत पापा

संत पापा फ्रांसिस ने जापान की अपनी प्रेरितिक यात्रा के दौरान नागास्की के बेसबॉल स्टेडियम में यूखरिस्तीय बलिदान अर्पित किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

जापान, रविवार, 24 नवम्बर (रई) संत पापा ने कहा कि पूजन विधि वार्षिक कालचक्र के अंतिम रविवार को हम सूली पर चढ़ाये गये उस डाकू की आवाज के साथ संयुक्त करते हैं जिसने येसु को राजा स्वीकारते हुए घोषित किया। अपमान और उपहास के बीच वह डाकू बोलने की क्षमता रखा और अपने विश्वास की घोषणा की है। अपने जीवन के अंतिम घड़ी में येसु उसकी बातों को सुनते और उसका उत्तर देते हुए कहते हैं, “मैं तुम से कहे देता हूँ आज ही तुम मेरे साथ स्वर्ग में होगे” (लूका.23.42)।

भले डाकू के मनोभाव

उस डाकू का इतिहास अपने में एक नये अर्थ को हमारे लिए प्रस्तुत करता है, वह येसु के साथ उनके दुःख में साथ देने हेतु टंगा था। उस स्थिति में वह य़ेसु के सम्पूर्ण जीवन के अर्थ को घोषित करता सभी जगह और सभी समय हमें मुक्ति प्रदान करते हैं। कलवारी के पहाड़ में भले डाकू के मनोभाव सारी मानवता के लिए आशा के संदेश बनते हैं जहाँ एक निर्दोष व्यक्ति को हम असहाय और उपहास का शिकार पाते हैं।

संत पापा ने कहा कि आज, इस स्थल पर हम अपने विश्वास और समर्पण को नवीकृत करना चाहते हैं। हम अपनी असफलताओं, पापों और कमजोरियों से भलि-भांति वाकिफ हैं, भला डाकू भी अपने में इन बातों का अनुभव करता है लेकिन हम इनके द्वारा अपने वर्तमान और भविष्य को धूमिल या परिभाषित नहीं होने देना चाहते हैं। “अपने को बचाओं” कहते हुए कई बार हम एक सरल मार्ग का चुनाव करते और दूसरों के दुःख-दर्द से अपने को तटस्थ कर लेते हैं। इस देश ने, कुछके देशों की भांति, मानव में व्याप्त विनाश रुपी शक्ति का अनुभव किया है। उस भले डाकू की भांति हम अपनी आवाज उठाते हुए अपने विश्वास को घोषित करना चाहते हैं, येसु को बचाना और उनकी सहायता करना चाहते हैं जो निर्दोष दुःखों के शिकार हैं। हम उनकी दुःखद भरी परिस्थिति में साथ चलने की आशा करते, उनके परित्यक्त और अकले की स्थिति में उनके साथ खड़ा होते हुए उनके मुक्तिदायी वचन को सुनते हैं जिसे पिता हमारे लिए उच्चरित करते हैं, “तुम आज मेरे साथ स्वर्ग में होगे।”

शहीदों की आध्यात्मिकता हमारी निधि

संत पौल मिकी और उनके साथियों ने अपने साहस में मुक्ति और निश्चितता का साक्ष्य दिया जिसे आप एक विशिष्ट आध्यात्मिकता की निधि स्वरुप धारण करते हैं। हम उनकी राह का अनुसरण करना चाहते हैं। उनके पद चिन्हों पर चलते हुए हम साहसपूर्ण ढ़ंग से उस प्रेममय क्रूस बलिदान का साक्ष्य देना चाहते हैं जिसे येसु ख्रीस्त ने हमारे लिए अर्पित किया जो सभी तरह की घृणाओं, स्वार्थ, उपहास और छल पर विजयी प्राप्त करती है। यह हमारी निराशा या आरामदेह स्थिति पर विजयी प्राप्त कर सकती है जो हमें अच्छे कार्यों और निर्णयों को लेने में पंगु बना देती है। द्वितीय वाटिकन महासभा हमें इस बात की याद दिलाती है, इस दुनिया में हमारा जीवन क्षणभंगुर है, हमारा ध्यान भविष्य की ओर केन्द्रित है, अतः हम इस दुनिया के उत्तरदायित्वों से अपने को वंचित रख सकते हैं, लेकिन ऐसा सोचने वाले अपने में गलती करते हैं। वे इस बात को भूल जाते हैं कि हमारा विश्वास जिसे हम घोषित करते हैं हमें अपने जीवन और कार्यों को योग्य रीति से करने का आहृवान करता है, इसी के लिए हमें यह जीवन मिला है। (गौदियुम एत स्पेस, 43)

ईश्वर हमें जीवित देखना चाहते

संत पापा ने कहा कि हम जीवित ईश्वर पर विश्वास करते हैं। ख्रीस्त जीवित हैं और हमारे बीच कार्य करते हैं, वे हमें परिपूर्ण जीवन की ओर ले चलते हैं। वे जीवित हैं और हमें भी जीवित देखना चाहते हैं वे हमारी आशा हैं। (ख्रीस्तुस विभित 1) हम रोज दिन ईश्वरीय राज्य के आने हेतु प्रार्थना करते हैं। इन शब्दों के द्वारा हम अपने जीवन और कार्यों को प्रशंसा का एक गीत बनाते हैं। यदि हम प्रेरितिक शिष्य हैं तो हमारा प्रेरिताई कार्य साक्ष्यों में परिलक्षित होने की मांग करता है हम किसी बुराई के सामने इसका परित्याग नहीं कर सकते हैं। हम जहाँ कहीं भी रहें, परिवार, कार्यस्थल या बृहृद समाज में, हम येसु ख्रीस्त के राज्य के खमीर बनने हेतु बुलाये जाते हैं। हम अपने को खुला रखने हेतु बुलाये जाते हैं जिससे पवित्र आत्मा लोगों में आशा की सांस बने। स्वर्ग का राज्य हमारा लक्ष्य है, यह हमारे लिए केवल कल का लक्ष्य नहीं है। हमें इसके लिए प्रार्थना करते हुए इसे अनुभव करने की आवश्यकता है उनके बीच जो उदासीनता के कारण बीमारों और अयोग्य को चुप कर देती, बुजुर्गों और परित्यक्त, प्रवासी और शरणार्थी कार्यकर्ताओं के बीच। वे सभी हमारे लिए राजा येसु ख्रीस्त के जीवित संस्कार हैं।(मती.25.31-46) यदि हम येसु ख्रीस्त पर चिंतन करते हुए अपने कार्यों को शुरू करते तो हम विशेषकर उन्हें उनके बीच देखें जिनके साथ येसु ने अपने को संयुक्त किया। (योहन पौलुस द्वितीय, नोवो मिलेनियो इनविटेन 49)

कलवारी की आवाजें

संत पापा ने कहा कि कलवारी में बहुत-सी आवाजें दब गयीं, वहीं दूसरे उपहास से भरे थे। केवल भले डाकू ने निर्दोष दुःख से पीड़ित येसु के पक्ष में आवाज उठाई। उसका विश्वास सहास से परिपूर्ण था। हमारे लिए यह चुनौती है हम या तो चुपचाप रह सकते हैं या उपहास या भविष्यवाणी कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि नागास्की का हृदय अपने में घायल है जो चंगाई हेतु कठिनाई का अनुभव करता है। यह अपने में असंख्य निर्दोष लोगों के घाव की निशानी है जो असहनीय दुःख का शिकार हुए। हम अपनी आवाज उठाते हुए उन लोगों के लिए एक साथ प्रार्थना करें जो इसका दर्द अभी भी अपने शरीर में ढ़ो रहे हैं, यह पाप स्वर्ग की ओर अपनी आवाज उठाती है। हममें से अधिक से अधिक लोग भले डाकू की तरह बनें औऱ चुपचाप न रहें, उपहास न करें, बल्कि ईश्वरीय राज्य की सच्चाई और न्याय, पवित्रता और कृपा, प्रेम और शांति का प्रेरितिक साक्ष्य दें।

24 November 2019, 12:45