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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (AFP or licensors)

थाईलैंड में संत पापा की यात्रा पर लोगों की उम्मीदें

संत पापा फ्राँसिस 20 से 26 नवम्बर को थाईलैंड एवं जापान की प्रेरितिक यात्रा करेंगे। एशिया महादेश में संत पापा फ्राँसिस की यह चौथी और विश्वभर में 32वीं प्रेरितिक यात्रा होगी।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 5 नवम्बर 2019 (वीएन)˸ थाईलैंड के मिशनरी फादर रफाएले सनदोना ने संत पापा की प्रेरितिक यात्रा का देश में महत्व पर प्रकाश डाला।  

थाई कलीसिया

संत पापा जॉन पौल द्वितीय की 1984 में थाईलैंड की पहली यात्रा के 35 वर्षों बाद संत पापा फ्राँसिस द्वारा यह दूसरी यात्रा होगी। प्रेरितिक यात्रा की विषयवस्तु है, "ख्रीस्त के शिष्य, मिशनरी शिष्य"। इस साल सियाम प्रेरितिक विकारियेट की स्थापना की 350वीं वर्षगाँठ होगी जिसकी स्थापना सन 1669 में हुई थी।  

थाईलैंड में 68 मिलियन आबादी के बीच काथलिकों की संख्या 0.5 प्रतिशत है जबकि बौद्ध लोगों की संख्या 90 प्रतिशत है। मुसलमानों की संख्या 4 प्रतिशत और ख्रीस्तियों की संख्या 1 प्रतिशत है। 350 वर्षों में काथलिक कलीसिया का विस्तार 11 धर्मप्रांतों में हुई है जिनकी कुल संख्या 3,90,000 है।

चियांग मई धर्मप्रांत

चियांग मई धर्मप्रांत थाईलैंड के उत्तरी भाग में है जिसकी स्थापना 1959 में की गयी थी। "फिदेई दोनुम" के कुछ इताली पुरोहित चाये होम और लामफून में वर्षों से सेवा दे रहे हैं।

लातीनी शब्द "फिदेई दोनुम" का अर्थ है "विश्वास का वरदान" जिसको 1957 में संत पापा पियुस 12वें द्वारा प्रकाशित विश्व पत्र से लिया गया है। इस प्रेरितिक विश्व पत्र के माध्यम से संत पापा पियुस 12वें ने सभी धर्माध्यक्षों को एक दूसरे की मदद न केवल प्रार्थनाओं से बल्कि अन्य साधनों और अपने पुरोहितों को दूसरे देशों में उपलब्ध करने के द्वारा करने का आह्वान किया था।  

चाये होम मिशन जो घरेलू शिल्प का उत्पादन एवं बिक्री करने में मदद देता है वह आदिवासियों एवं पहाड़ी क्षेत्र में घुमंतू लोगों की मदद हेतु समर्पित है। वह उन्हें पेयजल, औषधि और शिक्षा प्राप्त करने में उनकी मदद करते हैं।  

कलीसिया का विश्वास एवं एकता

फादर रफाएले सनदोना इटली के पादुवा धर्मप्रांत के हैं जो 10 सालों से थाईलैंड में सेवा दे रहे हैं। उन्होंने वाटिकन रेडियो से बातें करते हुए चाये होम मिशन पर प्रकाश डाला एवं कहा कि संत पापा फ्राँसिस की प्रेरितिक यात्रा थाईलैंड में काथलिकों के विश्वास को सुदृढ़ करेगा एवं बौद्ध जगत में अंतरधार्मिक वार्ता को बढ़ावा देगा।  

उन्होंने कहा, "संत पापा फ्राँसिस की यात्रा पर विश्वासियों के बीच बड़ी आशा एवं आनन्द का महौल है क्योंकि यह कलीसिया की एकता को प्रोत्साहन देगी। यही कारण है कि इस छोटी कलीसिया के लिए यह यात्रा महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि ख्रीस्तियों एवं बौद्ध लोगों के बीच कोई औपचारिक संबंध नहीं है, फिर भी बौद्ध और ख्रीस्तियों के बीच उनके दिनचर्या में बातचीत होती रहती है। उनके बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व है। कभी-कभी संयुक्त परियोजनाओं में निर्माणात्मक सहयोग भी किये जाते हैं।

शांति और प्रेम हेतु संत पापा के भाव

संत पापा की प्रेरितिक यात्रा के बारे बतलाते हुए इताली फादर ने कहा कि यात्रा महत्वपूर्ण है क्योंकि इस मुलाकात के अलावा संत पापा फ्राँसिस अपने विशिष्ठ मनोभाव को प्रकट करेंगे जो उनके परमाध्यक्षीय काल को रेखांकित करता है। एक ऐसा देश जहाँ लोग संत पापा, वाटिकन और काथलिक कलीसिया के बारे बहुत कम बातचीत करते हैं उसमें संत पापा फ्राँसिस के हाव-भाव के कारण अब अधिक रूचि जागेगी, उदाहरण के लिए विनम्रता एवं शांति जैसे सदगुणों के द्वारा।  

इस प्रकार उनकी उम्मीद है कि संत पापा की प्रेरितिक यात्रा, आगे बढ़ने के लिए एक अच्छा कदम साबित होगा, खासकर, अंतरधार्मिक वार्ता और थाई की कलीसिया को शांति एवं प्रेम का साक्ष्य देने में।

फादर ने बतलाया कि संत पापा फ्राँसिस की प्रेरितिक यात्रा के लिए जो गान तैयार किया गया है उसमें प्रेम को, दूसरों को जोड़ने वाला कहा गया है।  

05 November 2019, 16:40