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आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा आमदर्शन समारोह के दौरान संत पापा  

प्रेम से प्रेरित हो सुसमाचार का प्रचार करें

संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह में प्रेरित चरित पर धर्मशिक्षा देते हुए प्रेम से प्रेरित होकर सुसमाचार प्रचार करने का आहृवान किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार 06 अक्टूबर 2019 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने अपने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्रांगण में जमा हुए सभी विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को प्रेरित चरित पर अपनी धर्मशिक्षा देने के पूर्व सम्बोधित करते हुए कहा, प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

हम प्रेरित चरित पर अपनी यात्रा जारी रखते हैं। फिलिप्पी, थेसलोनिया और बेरैया में मुसीबतों का सामना करते हुए पौलुस एथेंस के केन्द्र ग्रीस पहुँचते हैं।(प्रेरि.17.15) यह शहर अपने राजनीतिक उथल-पुथल के बावजूद अपने पुराने गौरवपूर्ण इतिहास में बना रहा जिसकी संस्कृति अब भी बरकरार है। प्रेरित पौलुस यहाँ “देवमूर्तियों की भरमार देख कर बहुत क्रूद्ध हो जाते हैं। (17.16) वे गैर-ख्रीस्तियों से प्रभावित इस शहर से दूर नहीं भागते वरन् दो संस्कृतियों के बीच वार्ता की शुरूआत हेतु प्रेरित होते हैं।

हमारी निगाहें  

संत पापा ने कहा कि अपनी इस पहल में वे शहर से अपने को परिचित करने का निर्णय लेते और अति विशेष स्थानों और लोगों से मिलना शुरू करते हैं। वह यहूदियों के प्रार्थनागृह में जाते जो विश्वासी जीवन का केन्द्रविन्दु था, वे चौराहों में जाते जो शहर के जीवन की निशानी थी, वे आरेयोपागस जाते जो राजनीतिक और सांस्कृतिक जीवन की निशानी थी। वह यहूदियों, एपिकूरी औऱ स्तोइकी दार्शनिकों तथा दूसरे अन्य लोगों से मिलते हैं। वे बहुत सारे लोगों से मिलते और इस मिलन को जारी रखते हैं। वे लोगों से वार्ता करते हुए अपने विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। इस तरह पौलुस एथेंस की संस्कृति का अवलोकन करते और वहाँ की परिस्थिति से अपने को अवगत कराते हैं। वे “चिंतनमय नजरों से चीजों को देखते हैं जिसके फलस्वरुप वे इस बात का अनुभव करते हैं कि “ईश्वर हमारे निवास स्थल में, गलियों और शहर के चौराहों में निवास करते हैं।” (एवंनजेली गौदियुम, 71) वे एथेंस के शहर और वहाँ की दुनियादारी को शत्रुता की निगाहों से नहीं बल्कि विश्वास की दृष्टि से निहारते हैं। संत पापा ने कहा कि यह हमें अपने आप से पूछने हेतु मदद करता है कि हम अपने शहरों को किन नजरों से देखते हैं। क्या हम उन्हें उदासीनता की नजरों से देखते हैंॽ घृणा की दृष्टि से निहारते हैंॽ या हम उन्हें विश्वास की नजरों से देखते हैं जो हमें अनजान भीड़ को ईश्वरीय संतान के रुप में देखने और समझने हेतु मदद करता हैॽ

पौलुस इस निगाह का चुनाव करते हैं जो उन्हें सुसमाचार और गैर-ख्रीस्तीय दुनिया के मध्य सेतु का निर्माण करने हेतु मदद करता है। विश्व के एक अति प्रसिद्ध शहर आरेयोपागस के केन्द्र-बिन्दु में वे एक अति विशिष्ट सांस्कृतिकरण, विश्वास के संदेश को प्रसारित करने का अनुभव करते हैं, वे मूर्तिपूजकों के मध्य येसु ख्रीस्त को घोषित करते हैं लेकिन ऐसा करने के क्रम में वे उन पर आक्रमण नहीं करते वरन “वे उनके बीच सेतुओं के निर्माता बनते हैं।”(संत मार्था प्रवचन 8 मई 2013)

संत पापा ने कहा कि पौलुस मंदिरों का परिभ्रमण करते समय एक वेदी पर मिले अभिलेख, “अज्ञात देवता को” (17.23) सुसमाचार प्रचार का साधन बनाते और इस भक्ति का उपयोग करते हुए अपने सुनने वालों से कहते हैं, “ईश्वर शहरवासियों के बीच निवास करते हैं।” (एवंनजेली गौदियुम 71) ईश्वर अपने को उनसे दूर नहीं रखते जो एक निष्ठापूर्ण हृदय से उन्हें खोजते हैं, यद्यपि हम उनकी खोज में टटोलते हैं।” पौलुस उस ईश्वर की विशिष्ट उपस्थिति को उनके बीच प्रकट करने की कोशिश करते हैं, “आप लोग अनजाने में जिसकी पूजा करते हैं, मैं उसी के विषय में आपको बताने आया हूँ।” (17.23)

एथेंस में सुसमाचार प्रचार

ईश्वर को पहचाने हेतु पौलुस ने एथेंसवासियों को सृष्टि का वृतांत सुनाया जहाँ ईश्वर अपने को दुनिया में व्यक्त करते, मुक्ति प्रदान करते और न्यायपूर्वक विचार करने आते हैं जो ख्रीस्तीयता का सार है। पौलुस मानव निर्मित मंदिरों और सृष्टिकर्ता ईश्वर की महानता के बीच अंतर स्थापित करते हैं। वह उन्हें इस बात को समझने में मदद करते हैं कि ईश्वर हमें खोजते और अपने खोजने वालों को कैसे मिल जाते हैं। इस भांति वे उन्हें ख्रीस्त के बारे में बतलाते हैं जिन्हें वे नहीं जानते हुए भी जानते हैं, वे उनके प्रति अज्ञानी हैं यद्यपि वे उन्हें जानते हैं। (संत पापा बेनेदिक्त 16वें 12 सितम्बर 2008) संत पापा ने कहा कि यह संत पापा बेनेदिक्त 16वें की एक सुन्दर अभिव्यक्ति है जो कहते हैं कि पौलुस “ज्ञात अज्ञात” की घोषणा करते हैं। वे उन्हें जानते हुए भी नहीं जाते हैं। वे ज्ञात अज्ञात हैं। इस तरह पौलुस उन्हें अपनी अज्ञानता से परे जाने और समस्त संसार का न्यायपूर्वक विचार का हवाला देते हुए पश्चाताप करने का आहृवान करते हैं। पौलुस इस तरह येसु ख्रीस्त के नाम को उच्चरित किये बिना उनके सुसमाचार की घोषणा करते हैं। “ईश्वर ने उस व्यक्ति को मृतकों में से पुनर्जीवित कर, सबको अपने इस निश्चय का प्रमाण दिया है।” (प्रेरि. 17.31)

संत पापा ने कहा कि इस भांति पौलुस के शब्दों को सुनकर लोगों की सांसें रूकी हुई थीं, ख्रीस्त की मृत्यु और पुनरूत्थान की बातों को सुनकर, जो अपने में “मूर्खतापूर्ण” जान पड़ती हैं, उपहास का कारण बनती है। अतः वे वहाँ से चले जाते हैं। लेकिन कुछ व्यक्तियों ने उन पर विश्वास किया जैसे कि दियोनिसियुस, दामरिस नामक महिला और अन्य लोग। इस तरह एथेंस में भी सुसमाचार की जड़ें प्रसारित हुई।

प्रेम कठोर हृदयों को कोमल बनता

संत पापा ने कहा कि हम पवित्र आत्मा से निवदेन करें कि वे हमें संस्कृतियों के बीच सेतु का निर्माण करने की शिक्षा दें, वे जो विश्वास नहीं करते या जिनका विश्वास हमारे प्रेरितिक सार से भिन्न है। हम आक्रमकता में नहीं वरन् सदा अपने हाथों को बढ़ाते हुए सेतु का निर्माण करें। उन्होंने कहा कि हम इस कृपा हेतु प्रार्थना करें कि पवित्र आत्मा हमें विश्वास के संदेश को उन लोगों के बीच प्रसारित करने में मदद करें जो ख्रीस्त को नहीं जानते हैं। हम प्रेम से प्रेरित होकर इस कार्य को करें जो कठोर हृदयों को भी कोमल बना देता है।

इतना कहने के बाद संत पापा फ्रांसिस ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और सबों के संग हे पिता हमारे प्रार्थना का पाठ करते हुए सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद प्रदान किया।

06 November 2019, 16:03