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वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन  (ANSA)

कार्डिनल परोलिन˸ प्रेरितिक यात्रा में जीवन व शांति को प्रोत्साहन

थाईलैंड एवं जापान में संत पापा फ्राँसिस की प्रेरितिक यात्रा के पूर्व वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन ने कहा कि संत पापा वहाँ मिशन, पर्यावरण की रक्षा एवं शांति जैसे विषयों पर जोर देंगे।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 19 नवम्बर 2019 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस 19 से 23 नवम्बर तक थाईलैंड एवं 23 से 26 नवम्बर तक जापान की यात्रा करेंगे जो उनकी 32वीं प्रेरितिक यात्रा होगी। कार्डिनल परोलिन ने वाटिकन न्यूज के पत्रकार मस्सिमिल्यानो मनीकेत्ती को दिये एक साक्षात्कार में सोमवार को संत पापा की यात्रा की उम्मीदों पर प्रकाश डाला। 

मानव व्यक्ति पर केंद्रित

कार्डिनल परोलिन ने कहा कि संत पापा जॉन पौल द्वितीय की थाईलैंड में मई 1984 में तथा जापान में फरवरी 1981 में प्रेरितिक यात्रा के बाद अब बहुत कुछ बदल चुका है। वैश्विकरण ने इनका आकार छोटा बना दिया है और लोग शारीरिक रूप से दूर होते हुए भी आमने-सामने बात कर सकते हैं किन्तु संत पापा उन स्थानों तक पहुँचना चाहते हैं ताकि लोगों के साथ साक्षात् में मुलाकात कर सकें क्योंकि मानव व्यक्ति कलीसियाई ध्यान के केंद्र में है। कलीसिया सुसमाचार का प्रचार हरेक व्यक्ति के लिए करना चाहती है ताकि उनके जीवन के कठिन सवालों का उत्तर दे सके और उन्हें जीवन का अर्थ खोजने में मदद कर सके।  

थाईलैंडः मिशनरी शिष्य

थाईलैंड में संत पापा की प्रेरितिक यात्रा का कारण पूछे जाने पर कार्डिनल परोलिन ने कहा कि वे जेस्विट मिशनरियों के पदचिन्हों का अनुसरण कर रहे हैं जिन्होंने 350 वर्षों पहले, प्रथम बार सुसमाचार का प्रचार किया था।

अतः संत पापा के संदेश का महत्वपूर्ण भाग होगा मिशनरी शिष्य होने के लिए ख्रीस्तियों का बुलावा। संत पापा थाईलैंड में करीब 4 लाख काथलिकों को प्रोत्साहन देंगे कि वे पवित्र आत्मा के लिए अपने आप को खोलें जो मिशन के सच्चे नायक हैं। उन्होंने कहा कि मिशन तभी सार्थक होता है जब इसे आकर्षण एवं साक्ष्य में बदल दिया जाता।

जापानः परमाणु मुक्त और शांति

कार्डिनल परोलिन ने संत पापा की यात्रा के दूसरे भाग जापान पर प्रकाश डालते हुए कहा, "जापान की यात्रा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि संत पापा वहाँ परमाणु मुक्त होने के प्रयास को प्रोत्साहन देंगे।"

कार्डिनल ने जापान को एक "जटिल राष्ट्र" कहा जिसने हिरोसिमा एवं नागासाकी में दो परमाणु बम के कारण बहुत अधिक दुःख झेला है, फिर भी, अनोखे रूप से सुधार लाने में सफल रहा है।

देश अपने को परम्परा एवं अनुसंधान के बीच पाता है जब वह वैश्विक समस्याओं का समाधान ढूंढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि संत पापा जापान में हमारे आमघर की देखभाल, शांति की खोज और निरस्त्रीकरण शांति के लिए आवश्यक आदि विषयों पर भी प्रकाश डालेंगे।

संत पापा की आशा, लोगों के जीवन में सहभागिता

अंततः कार्डिनल परोलिन ने कहा कि संत पापा एशिया की यात्रा कर रहे हैं ताकि वे अपने लोगों के करीब आ सकेंगे, लोगों की खुशी, आशाओं एवं आकांक्षाओं को बांट सकेंगे, साथ ही साथ, उनके दुःखों, पीड़ाओं और विराधाभासों में शामिल हो सकेंगे।

जब संत पापा स्थानीय काथलिक समुदायों से मुलाकात करेंगे तब वे कई अन्य संदेश देंगे जो पूरी कलीसिया के लिए भी मान्य होगा।  

19 November 2019, 17:14