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सिनॉड ब्रीफिंग सिनॉड ब्रीफिंग 

धर्मसभा स्वर की समता: भाग 1

पान अमाजोन पर विशेष धर्माध्यक्षीय धर्मसभा ने रोम के सिनॉड हॉल में एक स्वर की समता रची।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 25 अक्तूबर 2019 (रेई)˸ सिनॉड कलीसिया के जीवन में एक महत्वपूर्ण समय है। यह एक ऐसा समय है जब विश्वासियों की आवाज, धर्माध्यक्षों एवं अन्य प्रतिनिधियों के माध्यम से रोम के धर्माध्यक्ष तक पहुँचती है। यह स्वर विश्वव्यापी कलीसिया की अच्छाई के लिए चरमसीमा है जैसा कि संत पापा पौल षष्ठम ने 1965 में लिखा था जब उन्होंने सिनॉड की स्थापना की थी। 

प्रस्तावना

पान अमाजोन के हजारों लोगों ने इस अवसर में भाग लिया ताकि वहाँ की चुनौतियों और वास्तविक्ताओं पर आवाज दी जा सके। दो वर्षों तक सुनने की इस प्रक्रिया में 80,000 आवाजों ने इन्स्त्रुमेंतुम लबोरिस को सहयोग दिया है। इसकी पृष्ठभूमि में प्रेरितिक पत्र एवंजेली गौदियुम और लाओदातो सी के स्वर, साथ ही साथ प्रभु की मधुर वाणी को भी सुना जा सकता है जो कहते हैं, "मैं इसलिए आया हूँ कि वे जीवन प्राप्त करें- बल्कि परिपूर्ण जीवन प्राप्त करें।” (यो. 10:10).

आवाजों ने प्रस्तावना को सहयोग दिया और माहौल तैयार किया, जो लुटेरे वाणिज्यिक उद्यमों से पीड़ित हैं, जलवायु परिवर्तन की आपदाओं से बीमार हैं और मृत्यु के शिकार हो रहे हैं, जिन्हें राजनीतिक सहायता प्राप्त नहीं मिलती, जो कलीसिया से सुरक्षा की आस लगाये हुए हैं और कलीसिया जो व्यक्तियों और आवश्यक संसाधनों की कमी के कारण लोगों की पुकार का प्रत्युत्तर देने में असमर्थ है और विश्वासी जो बिना चरवाहे की भेड़ों की तरह परेशान और परित्यक्त है। (मती. 9:36).

पहली प्रक्रिया

छोटे अन्तराल के बाद, पहली प्रक्रिया शुरू हुई। 221 अलग-अलग आवाजों ने सिनॉड हॉल में मिश्रित हस्ताक्षेप प्रस्तुत किया, जबकि अन्य प्रतिभागियों ने ध्यान से बातों को सुना। आवाजें अलग-अलग विभागों से आयीं- सिनॉड के धर्माध्यक्ष, लेखा परीक्षकों, निमंत्रित अतिथि और बंधुत्व प्रतिनिधि। हरेक ने अलग-अलग राग गाया ˸ युवा, समग्र पारिस्थितिकी, शिक्षा, सांस्कृतिक अनुकूलन और अंतर-संस्कृति, पलायन, पूजन विधि, जलवायु परिवर्तन, अभिषिक्त और बिना अभिषिक्त लोगों के द्वारा संस्कारों का अनुष्ठान, छिटपुट से स्थायी प्रेरितिक मिशन की ओर बढ़ना, पृथ्वी की पीड़ा, अमाजोन के लोगों का दर्द और उनके अधिकारों की रक्षा करने वालों पर अत्याचार, ख्रीस्तीय समुदाय, पुरोहितों की कमी, लोकधर्मी एवं महिला धर्मसमाजियों की उपस्थिति, ईश वचन एवं यूखरिस्त, धर्मशिक्षा, लोकधर्मी गतिविधियाँ एवं नया कारिज्म, अमाजोन चेहरे के साथ कलीसिया का सपना।   

लय की पुनः प्राप्ति

अतीत में खेले जाने वाले धुनों के झोंकों ने भी हवा भर दी, जैसे - ख्रीस्तुस दोमिनुस, लुमेन जेनसियुम, प्रेसबितेरोरूम ओरदिनिस, साक्रोसंतुम कोनचिलियुम, अद जेनतेस, देई भेरबुम, मिनिस्तेरिया क्वाइदुम, साचेरदोतालिस चैलीबातुस, एवंजेली नुनतियांदी, काथलिक कलीसिया की धर्मशिक्षा, काथलिक कलीसिया के नियम, कॉनफेशन ऑफ संत अगस्तीन, कटेकेसी त्रादेनदाई, क्रिस्तीफिदेलेस लाईची, रेदेमतोरिस होमिनी,चेंतेसिमुस अन्नुस, कारितास इन वेरीतातिस, वेरितातिस गौदियुम, ख्रीस्तुस विवित और मेडेलिन,पोयब्ला, संतो दोमिनगो, अपारेचिदा में हुई सभाओं का सार, संत पापा फ्राँसिस, संत पापा जॉन पौल द्वितीय एवं संत पापा बेनेडिक्ट 16वें के विचारों का संग्रह आदि।

मार्मिक पद

कुछ पदों में उन लोगों की याद की गयी जिन्होंने अपने भाई बहनों की सेवा हेतु अपना जीवन अर्पित कर दिया। इन मार्मिक रागों में हेरमाना इनेस अरानगो और धर्माध्यक्ष अलेसांद्रो लाबाका की याद की गयी, जब  32 साल पहले तागेरी लोगों को मार डाले जाने के बादल मंडरा रहे थे तब उन्होंने कहा था यदि हम नहीं गये तो वे उन्हें मार डालेंगे। उनके महान प्रेम के कारण तागेरी लोग आज भी जीवन यापन कर रहे हैं।  

पवित्र आत्मा की मानवीय आवाज

मनुष्यों के अंदर और बाहर पवित्र आत्मा की आवाज लाखों लोगों को प्रभावित कर रहा था। यही आवाज मिस्र के "मेरे लोगों की यातना" से निकल रही है, यह चार सुसमाचार लेखकों एवं संत पेत्रुस और संत पौलुस के द्वारा, कोरिंथ एवं रोम की कलीसिया और अपने प्रिय तिमोथी को सम्बोधित करते में प्रकट होती है। प्रकाशना ग्रंथ में नये आकाश और नई पृथ्वी की भविष्यवाणी में भी पवित्र आत्मा की आवाज सुनाई पड़ती है।

उत्साही प्रेरित

सिनॉड में अपने झुंड की अभिन्न आध्यात्मिक, प्रेरितिक, धार्मिक, और शारीरिक देखभाल के लिए भावुक स्वर में चिंता व्यक्त की गई। कलीसिया किस तरह उन जरूरतों की पूर्ति कर सकती है, इन्हीं पर आधारित राग कई बार अलग भी हुए। इस गतिविधि का सार कई सिनॉड प्रतिभागियों ने इस तरह प्रस्तुत किया है "अमेजन के लोग और समुदाय ... काफी समय से कलीसिया या धर्माध्यक्षों की मदद के लिए गुहार लगा रहे हैं।"

दूसरी प्रक्रिया

पहले प्रक्रिया को सुनने के बाद, उसी तरह के ललित स्वर दलों में भी सुनाई पड़े। पहली प्रक्रिया के अंत में, 12 सहयोगों ने दूसरी प्रक्रिया का मसौदा तैयार किया। हाथ में मसौदा लेकर छोटे दलों ने फिर से मुलाकात की और देखा कि यह कैसे प्रतिध्वनित होता है एवं सभी एक साथ एक उत्कृष्ट कृति बनाने की भावना से सही ताल बैठाने का प्रयास किया।

शुक्रवार को दूसरी बेला सही अंक वितरित किया जाएगा। धर्मसभा के सदस्य इस स्कोर पर शनिवार दोपहर को वोट करेंगे।  

25 October 2019, 15:30