खोज

Vatican News
पुएब्ला में लातीनी अमरीकी धर्माध्यक्षों के साथ संत पापा फ्राँसिस पुएब्ला में लातीनी अमरीकी धर्माध्यक्षों के साथ संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

पूएब्ला में लातीनी अमरीकी धर्माध्यक्षों को संत पापा का अभिवादन

संत पापा फ्राँसिस ने पुएब्ला में लातीनी अमरीकी धर्माध्यक्षों के सम्मेलन की 40वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में सभा में भाग लेने वाले प्रतिभागियों से वाटिकन में मुलाकात की तथा उन्हें सम्बोधित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 3 अक्टूबर 2019 (रेई)˸ जनवरी 1979 में करीब 400 धर्माध्यक्ष और प्रेक्षकों मेक्सिको सिटी के पूएब्ला शहर में जमा हुए थे। उन्होंने "लातीनी अमरीका में सुसमाचार प्रचार का वर्तमान एवं भविष्य" विषय पर चिंतन किया था। संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने संत पापा के रूप में पहली बार मेक्सिको में प्रेरितिक यात्रा की थी और सम्मेलन का उद्घाटन किया था।

संत पापा ने सम्मेलन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अर्जेंटीना में एक जेस्विट प्रोविंशल के रूप में अपने अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बतलाया कि पूएब्ला सम्मेलन को उन्होंने बड़े ध्यान एवं रूचि से देखा था। उन्होंने कहा कि मैं तीन प्रमुख चीजों का जिक्र करना चाहता हूँ-

संत पापा जॉन पौल द्वितीय

पहला, संत पापा जॉन पौल द्वितीय द्वारा मेक्सिको की पहली प्रेरितिक यात्रा तथा सम्मेलन का उद्घाटन एवं सम्बोधन, सम्मेलन के विकास के मार्ग को स्पष्ट रूप से दिखलाता है। यह उनके परमधर्मपीठीय शासन की लम्बी यात्रा और फलदायी मिशनरी के उद्घाटन के समान था।

संत पापा पौल छाटवें

दूसरा तथ्य है सम्मेलन की तैयारी की शुरुआत से ही संत पापा पौल छाटवें के प्रेरितिक प्रबोधन "एवंजेली नूनतियंदी" को पृष्ठभूमि के रूप में लिया जाना। संत पापा ने कहा कि "एवंजेली नूनतियंदी" एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो द्वितीय वाटिकन महासभा के बाद कलीसिया की यात्रा का एक समृद्ध दस्तावेज है।

मेडेलिन का सम्मेलन

तीसरा महत्वपूर्ण तथ्य है कि प्रारंभिक बिंदु के रूप में मेडेलिन के सम्मेलन की प्रेरणाएं और भविष्यवाणी का विकल्प, जो पूएब्ला में  अपनी परिपक्वता की ओर लैटिन अमेरिकी कलीसिया की यात्रा में एक कदम आगे था।

40वें वर्षगाँठ का आह्वान

संत पापा ने कहा, "मैं जानता हूँ कि आप पूएब्ला सम्मेलन की विषयवस्तुओं पर अध्ययन कर रहे हैं। मैं यहाँ लैटिन अमेरिका में कलीसिया की एक ऐतिहासिक आत्म-जागरूकता की नवीनता को याद दिलाता हूँ, एक अच्छी कलीसिया के निर्माण को जो द्वितीय वाटिकन महासभा में ईश्वर के लोगों की छवि और यात्रा को प्रकट करता है। अपनी संस्कृति में माता मरियम की भक्ति, सुसमाचार का एक सबसे रचनात्मक अध्याय, लैटिन अमरीका में लोकप्रिय भक्ति, मानव अधिकार एवं स्वतंत्रता को पहचान नहीं मिलने पर साहसिक आलोचना, युवाओं, गरीबों एवं समाज के निर्माताओं के विकल्प को दर्शाता है।"  

यह कहा जा सकता है कि पूएब्ला के सम्मेलन ने अपारेचिदा की ओर नींव डाली एवं एक रास्ता खोल दिया। इस तरह 40वाँ वर्षगाँठ एक सुन्दर अवसर है न केवल पीछे मुड़कर देखने के लिए बल्कि उसे हमारे कलीसियाई जीवन में चरितार्थ भी करना है।  

03 October 2019, 17:53