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अब्राहमिक धर्म, इच्छा मृत्यु को न, प्रशामक देखभाल को प्रोत्साहन

अब्राहमिक एकेश्वरवादी धर्मों के प्रतिनिधियों ने इच्छा मृत्यु और आत्महत्या में सहायता की निंदा की तथा प्रशामक देखभाल (मरनासन्न व्यक्ति की देखभाल) को प्रोत्साहन दिया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 29 अक्टूबर 2019 (रेई)˸ सोमवार को अब्राहमिक एकेश्वरवादी धर्मों के प्रतिनिधियों ने वाटिकन में एक विज्ञप्ति जारी कर कहा, "हम किसी भी प्रकार की इच्छा मृत्यु की निंदा करते हैं जिसमें सीधे, जानबूझकर और स्वेच्छा से जीवन को खत्म किया जाता है, साथ ही साथ, डॉक्टर द्वारा आत्महत्या में सहायता देने का भी विरोध करते हैं जो सीधे, जानबूझकर और आत्महत्या करने में स्वेच्छा से मदद पहुँचायी जाती है क्योंकि यह मौलिक रूप से मानव जीवन के अपरिहार्य मूल्य के विपरीत है। अतः यह स्वाभाविक, नैतिक एवं धार्मिक रूप से गलत है  तथा इसे बिना अपवाद के मना किया जाना चाहिए।”

अब्राहमिक एकेश्वरवादी धर्मों की व्युत्पति बाईबिल के पुराने व्यवस्थान के अब्राहम द्वारा हुई है जिन्हें यहूदी, ख्रीस्तीय और मुस्लिम अपना पुर्वज मानते हैं।

इच्छामृत्यु, चिकित्सक द्वारा आत्महत्या में सहायता, नैतिक एवं धार्मिक रूप से गलत

प्रतिनिधियों ने बीमार व्यक्ति की सक्रिय एवं जानबूझकर आत्महत्या के प्रयास की स्पष्ट रूप से निंदा की। उन्होंने लिखा, "मरने वालों की देखभाल जिसमें जीवन के दिव्य वरदान की देखभाल जब इसकी चंगाई संभव न भी हो और पीड़ित मरनासन्न व्यक्ति के प्रति हमारी मानवीय एवं नैतिक जिम्मेदारी दोनो है।" 

उन्होंने कहा, "व्यक्ति के समग्र एवं सम्मानपूर्ण देखभाल में मौलिक उद्देश्य के रूप में मरनासन्न व्यक्ति के मानवीय, आध्यात्मिक और धार्मिक आयाम पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।"

इस बात की घोषणा करने वालों में प्रमुख थे, इस्राएल के स्टेनबर्ग के रब्बी अब्राहम जिन्होंने संत पापा फ्राँसिस के पास अपना प्रस्ताव रखा। संत पापा ने इस बात को जीवन के लिए गठित परमधर्मपीठीय अकादमी को सौंप दिया और जीवन के लिए गठित परमधर्मपीठीय अकादमी के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष विंचेंसो पालिया ने इस घोषणा का मसौदा तैयार करने के लिए अंतर-आस्था दल को सम्मिलित और समन्वित किया।  

घोषणा पत्र जारी करने के बाद वाटिकन में संत पापा फ्राँसिस ने इस पर 30 हस्ताक्षर प्राप्त किये। उनमें कुछ कार्डिनल और रब्बी के साथ, डेविड रोशन और इंडोनेशिया के दूसरे बड़े इस्लामिक संगठन मुहम्मादियाह के स्यामसुल अनवार के हस्ताक्षर भी थे।  

सभी की प्रशामक देखभाल

अब्राहमिक धर्मों ने हर जगह एवं हर जन के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रशामक देखभाल को समर्थन दिया, यहाँ तक कि "उस समय भी जब मौत को रोकना अनुचित रूप से बोझ जैसा लगे।" उन्होंने लिखा कि हमारा नैतिक एवं धार्मिक कर्तव्य है कि हम मरनासन्न व्यक्ति और उसके परिवार को आराम, दर्द से राहत, साथ, सेवा और आध्यात्मिक सहायता प्रदान करें।  

इच्छामृत्यु से बचने और प्रशामक देखभाल को बढ़ावा देने के लिए मरने वाले रोगी के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करने वाले कानूनों और नीतियों का आह्वान करते हुए, उन्होंने खुद को अन्य धर्मों और सद्भावना के लोगों को शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध किया।

महाधर्माध्यक्ष पालिया ने ख्रीस्तीय एकतावर्धक एवं अंतरधार्मिक आयाम की संयुक्त पहल के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसने हमें सभी क्षेत्रों में उन लोगों की सेवा करने और उन्हें "ईश्वर के पुत्र और पुत्रियों के रूप में देखते हुए" सेवा प्रदान करने के लिए अभिसरण के क्षेत्रों की खोज करने और संचार के फल लाने की अनुमति दी है।

29 October 2019, 16:23