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मोज़ाम्बिक के राजनेताओं के साथ सन्त पापा फ्राँसिस मोज़ाम्बिक के राजनेताओं के साथ सन्त पापा फ्राँसिस  (ANSA)

शांति पोषित करने का सन्त पापा फ्राँसिस ने किया आह्वान

सन्त पापा फ्राँसिस ने गुरुवार को मोज़ाम्बिक के लोगों से आग्रह किया कि वे कड़ी मेहनत से हासिल की गई शांति को पोषित करें तथा सभी को समान अवसर प्रदान करने का प्रयास करें ताकि पुनः गृहयुद्ध में गर्त में न फँसें।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

मापुतो, शुक्रवार, 6 सितम्बर 2019 (रेई,वाटिकन रेडियो): सन्त पापा फ्राँसिस ने गुरुवार को मोज़ाम्बिक के लोगों से आग्रह किया कि वे कड़ी मेहनत से हासिल की गई शांति को पोषित करें तथा सभी को समान अवसर प्रदान करने का प्रयास करें ताकि पुनः गृहयुद्ध में गर्त में न फँसें।

काथलिक कलीसिया के परमधर्मगुरु सन्त पापा फ्राँसिस इस समय मोज़ाम्बिक, मडागास्कर एवं मोरिशियुस की छः दिवसीय प्रेरितिक यात्रा पर हैं। अफ्रीका के उपसहारा क्षेत्र में सन्त पापा की यह दूसरी यात्रा है। इससे पूर्व सन्त पापा जॉन पौल द्वितीय ने सन् 1988 में मोज़ाम्बिक की प्रेरितिक यात्रा की थी।

स्थायी शान्ति हेतु अनवरत प्रयास की आवश्यकता

यात्रा के पहले दिन, हरे-भरे बागानों में विचरते मोरों के बीच, मापुतो स्थित औपनिवेशिक शैली में निर्मित, शानदार राष्ट्रपति भवन में, सन्त पापा फ्राँसिस ने सत्तारूढ़ फ़्रीलामो पार्टी के राष्ट्रपति फ़िलिप न्यूसी तथा रेनमो विपक्ष के नेताओं को संबोधित किया। स्मरण रहे कि दोनों दलों के बीच गृहयुद्ध जारी रहा था जो 1992 में समाप्त हो पाया, जबकि, दोनों दलों के बीच शांति समझौता केवल विगत माह ही हो पाया है। 15 वर्षीय हिंसक गृहयुद्ध में लगभग दस लाख लोगों के प्राण चले गये थे।

राजनीतिज्ञों से सन्त पापा ने कहा, "स्थायी शांति को हासिल करने के लिये निरन्तर प्रयास करने की आवश्यकता रहा करती है, इसलिये कि शांति एक नाज़ुक फूल की तरह है जो हिंसा की पत्थरीली ज़मीन पर खिलने के लिये संघर्षरत रहा करती है।"  

राष्ट्रपति न्यूसी ने भी राष्ट्र की ओर से सन्त पापा फ्राँसिस का अभिवादन करते हुए एक ऐसे राष्ट्र के पुनर्निर्माण का प्रण किया "जहाँ अहिंसा प्रत्येक नागरिक के लिये जीवन यापन की संस्कृति बन जाये।"

पुनर्मिलन शांति का अस्त्र

गुरुवार अपरान्ह सन्त पापा फ्राँसिस ने युवाओं के लिये एक अन्तर-धार्मिक समारोह का नेतृत्व किया तथा उनसे अपने देश का नया इतिहास रचने का आग्रह किया। उन्होंने उन्हें अपने देश के प्रकृतिक संसाधनों की रक्षा करने तथा पुनर्मिलन, आशा एवं धारणीय विकास को "शांति के अस्त्र" रूप में संजोये रखने का सन्देश दिया।

गुरुवार को ही सन्त पापा फ्राँसिस ने मापुतो स्थित निष्कंलक माँ को समर्पित काथलिक महागिरजाघर में मोज़ाम्बिक के धर्माध्यक्षों, पुरोहितों एवं धर्मबहनों को सम्बोधित कर उत्पीड़न, निर्धनता एवं धर्म के प्रति उदासीनता द्वारा अनवरत प्रस्तुत चुनौतियों का सामना करने हेतु उन्हें प्रोत्साहित किया।

06 September 2019, 11:26