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नवीन सुसमाचार प्रचार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों के साथ संत पापा नवीन सुसमाचार प्रचार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों के साथ संत पापा 

नवीन सुसमाचार अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संत पापा का संदेश

संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 21 सितम्बर को वाटिकन के संत क्लेमेंटीन सभागार में नवीन सुसमाचार प्रचार के शैक्षणिक केंद्रों और स्कूलों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के करीब 300 प्रतिभागियों से मुलाकात की और वचन और कर्म से प्रभु के सच्चे सुसमाचार प्रचारक बनने हेतु प्रेरित किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 21 सितम्बर 2019 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 21 सितम्बर को वाटिकन के संत क्लेमेंटीन सभागार में नवीन सुसमाचार प्रचार के शैक्षणिक केंद्रों और स्कूलों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के करीब 300 प्रतिभागियों से मुलाकात की। इस सम्मेलन का आयोजन 19 से 21 सितम्बर तक नवीन सुसमाचार प्रचार को बढ़ावा देने हेतु गठित परमधर्मपीठीय संगठन द्वारा की गई है। सम्मेलन की विषय वस्तु है, "ईश्वर से मिलना संभव है?  नवीन सुसमाचार प्रचार के तरीके।"

हृदय को उदीप्त रखना

संत पापा फ्राँसिस ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए, मोनसन्योर फिसिकेला को परिचय भाषण के लिए धन्यवाद दिया। संत पापा उनसे कहा कि इन दिनों वे सुसमाचार प्रचार हेतु कई नये तरीकों पर विचार विमर्श कर रहे हैं। आज की कठिन परिस्थितियों में ईश्वर की उपस्थिति को पहचानना और उनसे मिलने की इच्छा को प्रज्वलित बनाये रखने के लिए इम्माउस जाने वाले दो शिष्य प्रारंभिक बिन्दु प्रदान करते हैं। संत लूकस का सुसमाचार ( 24, 13-27) कहता हैं कि एम्माउस जा रहे दो शिष्यों के साथ येसु चल रहे थे, उनसे बातें कर रहे थे परंतु चेलों के दिल में असहजता थी इस कारण वे येसु को पहचान नहीं पा रहे थे। यह सच है प्रभु आज भी हमारे करीब हैं, लेकिन हम उन्हें नहीं पहचानते हैं। संत पापा ने कहा कि उन दो चेलों से जब येसु बातें करना शुरु किया और उनका हृदय विसमय और आश्चर्य से भरने लगा। येसु को पहचानने के बाद उन्होंने स्वीकार किया कि जब येसु उनसे बातें कर रहे थे तो उनकी हृदय उदीप्त हो रहा था। संत पापा ने कहा कि प्रभु के लिए हृदय को उदीप्त रखना आज की चुनौती है।

सुसमाचार घोषणा की जरुरत

वर्तमान समय में कलीसिया के प्रति लोगों के व्यवहार की ओर इशारा करते हुए संत पापा ने कहा कि अक्सर ऐसा होता है, विशेष रूप से पश्चिम देशों में, कलीसिया लोगों के लिए एक ठंडी स्मृति है। कुछ लोगों के कहना है वर्तमान समय में कलीसिया की आवश्यकता नहीं है, कुछ का कहना है कि कलीसिया उन्हें नहीं समझती, कलीसिया उनकी पहुँच से ऊपर है। संत पापा ने कहा कि इन मुद्दों पर चिंतन करना जरुरी है। एक सांसारिक कलीसिया दुनिया की सफलता के मानदंड का पालन करती है और यह भूल जाती है कि यह स्वयं की घोषणा करने के लिए मौजूद नहीं है परंतु येसु के सुसमाचार की घोषणा के लिए है। आज सुसमाचार को लाने की ललक महसूस नहीं करती है। पिता का घर, सरल उत्सव का स्थल होने के बजाय संग्रहालय और प्रदर्शन का स्थल प्रतीत होता है।

संत पापा ने समाज की वर्तमान परिस्थिति पर ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा, “हमारे बहुत सारे भाई-बहन हैं, जो कई तकनीकी उपलब्धियों से लाभान्वित होते हुए, एक बड़े उन्माद के भंवर में डूबे रहते हैं। बहुत से लोग स्थिर नौकरी खोजने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बहुत से लोग बाहरी चहल-पहल से घिरे हुए हैं परंतु अंदर में खालीपन महसूस करते हैं। हमारे पड़ोस में कितने लोग रहते हैं जो भोग-विलास के गुलाम बन गये हैं और जीवन की सही खुशी के स्वाद भूल गये हैं। बच्चों की आँखों में पाई जाने वाली चमक,  कोई भी स्मार्टफोन नहीं दे सकता है। हमारे भाई-बहन अक्सर हमसे क्या चाहते हैं- उन्हें सही मार्ग दिखाने वाला, उन्हें स्वीकार करने वाला और प्यार करने वाला कोई मिले। वे दिल की शांति और स्थायी आनंद की इच्छा करते हैं।

वचन और कर्म से सुसमाचार प्रचार

संत पापा ने उनके उत्तरदायित्व को गौर करते हुए कहा कि हालांकि हम सभी कमजोर हैं, पापी हैं पर प्रभु हमें कृपा देते हैं जिससे कि हम उनके प्रेम का अनुभव कर सकें। धर्मग्रंथ कहता है कि ईश्वर प्रेम है (1 योहन 4,8) और उसका प्रेम अनंतकाल तक बना रहता है।(स्तोत्र 136,1) ईश्वर के प्रेम का अनुभव कर उसे दूसरों तक पहुँचाना हमारा मिशन है। ईश्वर का प्रेम सर्वप्रथम हममें परिवर्तन लाता है। ईश्वर में विश्वास येसु के साथ मुलाकात करने से होता है जैसे एम्माउस के दो चेलों को हुआ था।

संत पापा ने कहा कि सुसमाचार प्रचार के लिए गरीबों और जरुरतमंदों, के पास जायें उनकी ठोस रुप से मदद करें। इस प्रकार वे वचन और कर्म से प्रभु के सच्चे सुसमाचार प्रचारक बनेंगे। वे ईश्वर के प्रेम को गहराई से अनुभव करेंगे और उसे दूसरों को भी बांटने में सफल होंगे। अपने संबोधन के अंत में संत पापा ने अपने लिए प्रार्थना की मांग करते हुए उन्हें अपना आशीर्वाद दिया। 

21 September 2019, 16:12