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पोंते वेरमेल्हा पैलेस में संत पापा संबोधित करते हुए पोंते वेरमेल्हा पैलेस में संत पापा संबोधित करते हुए 

मोजाम्बिक राजनायिकों, नागर अधिकारियों को संत पापा का संबोधन

संत पापा ने अपनी मोजाम्बिक की प्रेरितिक यात्रा के पहले दिन राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति, सांसद और राजनयिक कोर के सदस्यों और वहां मौजूद नागर समाज के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और उन्हें संबोधित किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

मापुतो, गुरुवार, 5 सितम्बर 2019 (रेई) संत पापा फ्राँसिस ने मापुतो के पोंते वेरमेल्हा पैलेस में राजनायिकों और नागर अधिकारियों को संबोधित किया। संत पापा ने राष्ट्रपति महोदय को उनके स्वागत तथा देश आने हेतु निमंत्रण देने के लिए हार्दिक धन्यवाद दिया।

संत पापा ने कहा कि वे अपनी अफ्रीका की प्रेरितिक यात्रा उस देश से शुरु करते हुए बहुत खुश हैं जो प्राकृतिक सुन्दरता और संस्कृति का धनी है। संत पापा ने सांसद और राजनयिक कोर के सदस्यों और वहां मौजूद नागर समाज के प्रतिनिधियों का सौहार्दपूर्वक अभिनंदन कर कहा,“आपके माध्यम से, मैं रोवामा से लेकर मापुटो तक मोज़ाम्बिक के सभी लोगों का अभिवादन करना हूँ, जिन्होंने शांति और मेल-मिलाप के नए भविष्य को बढ़ावा देने हेतु हमारे लिए अपने दरवाजे खोल दिये हैं।”

संत पापा ने कहा कि वे इडाई और केन्नेथ चक्रवात की चपेट में आये उन सभी परिवारों के प्रति अपनी सहानुभूति और सामीप्य प्रकट करते हैं, विशेष रुप जो आज भी इस त्रासदी से उबर नहीं पाये हैं। संत पापा ने दुःख के साथ अपनी असमर्थता प्रकट की, कि वे इन क्षेत्रों में जा नहीं पा रहे हैं परंतु इस तबाही और विरानी में वे उनके साथ हैं। काथलिक समुदाय और नागर समाज आवश्यक पुनर्निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

शांति समझौता

संत पापा ने व्यक्तिगत रुप से अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा इस देश में शांति और सुलह के लिए किये गये सभी प्रयासों और कार्यों के प्रति आभार प्रकट किया। संत पापा ने कहा, “संवाद और सुलह ही देश में शांति लाने का कठिन परंतु सही रास्ता है। इस भावना के साथ और इस इरादे से, एक महीने पहले आपने ‘सेरा दा गोरोंगोसा’ में मोजाम्बिक भाइयों के बीच सैन्य शत्रुता को निश्चित रुप से समाप्त करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह एक मील का पत्थर है, जिसे हम इस आशा के साथ स्वागत करते हैं कि यह शांति के मार्ग पर निर्णायक और साहसिक कदम साबित होगा जो 1992 में रोम के जनरल शांति समझौते के साथ शुरू हुआ था।”

उस ऐतिहासिक संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद से बहुत कुछ हुआ, जिसने शांति को मजबूत किया और धीरे-धीरे फल देना शुरू कर दिया है! आपके भविष्य को एक संघर्ष के रूप में नहीं, बल्कि इस बात को स्वीकार करने के दृढ़ संकल्प के साथ कि आप सभी भाई-बहन हैं, एक ही भूमि के बेटे और बेटियां हैं। साहस शांति लाता है! वास्तविक साहस, पाशविक बल और हिंसा का साहस नहीं, लेकिन आम अच्छाई के अथक प्रयास करना है। (सीएफ, संत पापा पॉल छठे, 1973 के विश्व शांति दिवस)

हिंसा के लिए ‘नहीं’ शांति के लिए ‘हाँ’   

संत पापा ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में बहुत दुःख और तकलीफ का अनुभव किया है, उन्होंने मानवीय रिश्तों को प्रतिशोध, हिंसा या दमन द्वारा नियंत्रित होने से रोका है। संत पापा जॉन पॉल द्वितीय ने 1988 में अपनी प्रेरितिक यात्रा के दौरान कहा था, “कई पुरुषों, महिलाओं और बच्चों के पास भोजन और आवास की कमी है, शिक्षा के लिए स्कूल नहीं है, स्वास्थ्य देखभाल के लिए अस्पताल नहीं है, प्रार्थना करने के लिए गिरजाघर नहीं है। किसानों और श्रमिकों के पास काम नहीं है। सुरक्षा और अपने जीवन को बचाने के लिए हजारों लोगों को स्थानांतरित करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। कुछ लोगों ने आस-पास के देशों में शरण ली है। इतना होते हुए भी आपने हिंसा के लिए नहीं और शांति के लिए हाँ! कहा है।”

संत पापा ने शांति के लिए किये गये प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इन वर्षों के दौरान स्थायी शांति को बनाये रखने हेतु निरंतर प्रयास से आप भली-भांति अवगत हैं। यह सभी का एक मिशन है। यह "एक नाजुक फूल की तरह है जिसे पथरीली जमीन पर खिलने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।” (2019 विश्व शांति दिवस के लिए संदेश)। फलतः, यह मांग करता है कि हम दृढ़ संकल्प और साहस के साथ, कट्टरता के बिना, शांति और सामंजस्य को बढ़ावा देने के लिए प्रयास जारी रखें।

जैसा कि हम जानते हैं, शांति केवल युद्ध की अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि एक अथक प्रतिबद्धता है - विशेष रूप से वे लोग जिन पर शांति को बनाये रखने की बड़ी ज़िम्मेदारी रहती है। हर किसी की गरिमा और सुरक्षा को बनाये रखने का सतत प्रयास करनी चाहिए। जब कोई समाज, चाहे स्थानीय, राष्ट्रीय या वैश्विक, अपने कुछ हिस्सों को छोड़ने के लिए तैयार हो,तो कोई भी राजनीतिक कार्यक्रम या कानून प्रवर्तन या निगरानी प्रणालियों पर खर्च किए गए संसाधन अनिश्चित काल तक शांति की गारंटी नहीं दे सकते।”(इवांजेली गौदियम, 59)।

शांति, विकास और युवा

संत पापा ने कहा, “शांति ने कई क्षेत्रों में मोजाम्बिक के विकास को संभव बनाया है। शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में वादे किए गए हैं। मैं आपको अपने प्रयासों को जारी रखने हेतु प्रोत्साहित करता हूँ देश के विकास के लिए आवश्यक संरचनाएं और संस्थान बनाए जाएं जिससे कि कोई भी व्यक्ति परित्यक्त महसूस न करे, खासकर युवा जो आपके देश की आबादी का इतना बड़ा हिस्सा बनाते हैं। वे केवल इस भूमि की आशा नहीं हैं, वे इसके वर्तमान भी हैं, एक ऐसा वर्तमान जो चुनौतियों का सामना करना चाहता है, आज योग्य साधनों को खोजने की आवश्यकता है जो उन्हें अपनी सभी प्रतिभाओं का अच्छा उपयोग करने का अवसर दे सके। वे सभी सामाजिक सद्भाव के विकास हेतु बीज बोने की क्षमता रखते हैं।”

सामान्य घर की देखभाल

शांति की संस्कृति, हमें पृथ्वी, हमारे सामान्य घर की देखभाल करने के लिए भी आमंत्रित करती है। इस दृष्टिकोण से, मोज़ाम्बिक एक ऐसा राष्ट्र है जो प्रकृतिक सुन्दरता का धनी है अतः इसकी देखभाल करने की विशेष जिम्मेदारी आप पर है। भूमि की सुरक्षा भी जीवन की सुरक्षा है, जो विशेष रूप से ध्यान देने की मांग करती है उस जमीन की भी देखभाल करनी है जो खेती लायक और लोगों के रहने लायक नहीं है। शांति की संस्कृति एक उत्पादक, स्थायी और समावेशी विकास है, जहां सभी मोजाम्बिक लोग महसूस कर सकते हैं कि यह भूमि उनकी है, जहां वे अपने पड़ोसियों और अपने सभी लोगों के साथ भ्रातृत्व और समानता के संबंध स्थापित कर सकते हैं।

अंत में संत पापा ने राजनायिकों और नागर अधिकारियों को शांति और सुलह को बरकार रखने हेतु प्रेरित किया जिससे कि उनके बच्चों और आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित रहे। शांति, सुलह और आशा को बनाये रखने के लिए काथलिक कलीसिया का भी विशेष योगदान रहेगा।

                 

05 September 2019, 15:07