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विमान में संत पापा फ्राँसिस विमान में संत पापा फ्राँसिस 

हमारे पास कम बच्चे हैं क्योंकि हम स्वार्थ में पड़े हैं, संत पापा

तीन अफ्रीकी देशों से वापस अपने रास्ते पर विमान में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान,संत पापा फ्राँसिस ने अपनी प्रेरितिक यात्रा में बच्चों से मिलने वाली खुशी को याद किया और कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि वे परिवारों की देखभाल करें। उनका कहना है कि ज़ेनोफोबिया "एक बीमारी" है और यह विचारधारा के उपनिवेशवाद के सामने सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए अपील करता है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

विमान, बुधवार 11 सितम्बर 2019 (वाटिकन न्यूज) :  संत पापा फ्राँसिस अपनी 31वीं प्रेरितिक यात्रा समाप्त कर मंगललवार,10 सितम्बर सुबह को मडागास्कर के अंतानानारिवो हवाई अड्डे से वापस रोम के लिए रवाना हुए। विमान में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, संत पापा फ्राँसिस ने अपनी प्रेरितिक यात्रा का अनुभव पत्रकारों से करीब तीन घंटे तक साझा किया और पत्रकारों के प्रश्नों का जवाब दिया।

संत पापा ने कहा कि मडागास्कर में उन्हें एक नजर देखने के लिए लोग सड़कों के किनारे और गलियों में लाइन लगाये अपने बच्चों को ऊपर उठाये हुए थे। "बच्चे गरीबों के धन हैं," संत पापा के लिए यह दृश्य सबसे सुखदायी था। संत पापा ने फिलीपींस, कार्टाजेना और कोलंबिया में भी यही अनुभव किया था।

संत पापा ने मडागास्कर में मिस्सा समारोह और रात्रि जागरण प्रार्थना में भाग लेने आये करीब 800,000 लोगों और लाल कपड़े पहने युवाओं को याद किया। जिन्होंने जमीन पर कंबल बिछाई और रात गुजारी। उन्होंने भूख-प्यास, नींद की परवाह किये बिना बच्चे, युवा जवान मिलकर खुशी से नाचते गाते एवं प्रार्थना करते हुए रात का समय बिताया और उन्होंने संत पापा के नजदीक रहकर और मिलकर प्रार्थना करते हुए अपने विश्वास का प्रदर्शन किया। संत पापा ने कहा कि वे इस सुन्दर अनुभव को कभी भूल नहीं सकते। साथ ही संत पापा ने उन लोगों को चेतावनी दी जो "लोकप्रिय आनंद की भावना से खुद को अलग करते हैं"। जो अकेले हैं, "उन लोगों की उदासी, इस बात का संकेत है कि वे "अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भूल गए हैं।"

परिवार और युवा, "राज्य का कर्तव्य"

अफ्रीका में युवाओं की बड़ी संख्या और कार्य कलापों को देखते हुए संत पापा ने कहा कि यूरोप देश बुजूर्ग हो गया है वह बच्चों को जन्म देना बंद कर दिया है। संत पापा ने यूरोप महादेशों में जनसांख्यिकीय गिरावट को देखते हुए कहा,  "मुझे लगता है कि यह सिर्फ खुद की भलाई में निहित है," लोग अपनी व्यक्तिगत खुशी और आराम का जीवन चुनते हैं। और भविष्य में बच्चे को जन्म देने, उनकी परवरिश करने का झंझट लेना नहीं चाहते।”  इसके विपरीत,संत पापा ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री की सराहना की जिन्होंने उन्हें बताया कि वे युवाओं को मुफ्त शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना चाहते हैं। पोर्ट लुईस में पवित्र मिस्सा के दौरान एक पुलिसकर्मी द्वारा भीड़ में अपने माता-पिता से खोई एक छोटी लड़की की देखभाल के प्रकरण को याद करते हुए संत पापा ने कहा, “राज्य को युवा लोगों के परिवारों की देखभाल करनी चाहिए। राज्य का कर्तव्य है कि वह उन्हें अपना विकास करने में मदद करे।”

शांति क्षमा है

संत पापा ने मोजाम्बिक में लंबी शांति प्रक्रिया में 1992 में हस्ताक्षर किए गए समझौते और संत इजीदियो समुदाय के प्रयासों के बारे चर्चा की। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध की पूर्व संध्या पर संत पापा पियुस बारहवें  के ऐतिहासिक रेडियो संदेश को प्रतिध्वनित किया, “शांति में कुछ भी नहीं खोता है, परंतु युद्ध में सब कुछ खो सकता है ”। संत पापा फ्राँसिस ने खुलासा किया कि वे “रेडिपुगलिया मेमोरियल” के सामने रोये थे और हर बार इस मेलोरियल ने उसे युद्ध की दुष्टता को प्रतिबिंबित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, शांति क्षमा है। शांति बहुत ही"नाजुक" चीज है, इसे एक नवजात शिशु की तरह "बड़ी सावधानी और कोमलता के साथ" देखभाल करनी चाहिए।"

ज़ेनोफोबिया

मोजांबिक के एक रिपोर्टर ने ज़ेनोफोबिया पर संत पापा का विचार जानना चाहा जो उनके देश में व्यापक है। संत पापा ने कहा कि यह केवल एक अफ्रीकी समस्या नहीं है। "ज़ेनोफोबिया एक बीमारी है", वही बीमारी जिसने पिछली सदी में नस्लीय कानूनों को सही ठहराने के लिए नाजी-फासीवाद का नेतृत्व किया। अफ्रीका में यही बीमारी जिसने रवांडा नरसंहार के भयानक इतिहास पृष्ठ को "जातिवाद" के रूप में जीवन दिया था और अक्सर "ज़ेनोफोबिया राजनीतिक लोकप्रियता हासिल करने के लिए की जाती है" और हरएक को "इस के खिलाफ लड़ाई" करनी चाहिए। अपनी अफ्रीकी यात्रा में, संत पापा ने पारस्परिक भाईचारे की भी सराहना की, जिसे उन्होंने तीन देशों में अलग-अलग तरीकों से अनुभव किया। उन्होंने पुष्टि की, "धार्मिक सम्मान महत्वपूर्ण है, यही कारण है कि मैं मिशनरियों को धर्मांतरण करने के लिए नहीं कहता हूँ।" एक ख्रीस्तीय जो धर्मांतरण की तलाश करता है "सच में ईश्वर की पूजा करना" नहीं सिखाता है, वह कभी भी "ख्रीस्तीय नहीं" हो सकता।

साक्षात्कार के बाद संत पापा ने सभी पत्रकारों को उनका साथ देने और कार्य करने के लिए धन्यवाद दिया।

11 September 2019, 17:00