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नुओवी ओरीज़ोन्ती में मिस्सा करते हुए संत पापा फ्राँसिस नुओवी ओरीज़ोन्ती में मिस्सा करते हुए संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

ईश्वर आपके जीवन के पुनर्निर्माण में सहायता करते हैं, संत पापा

संत पापा फ्राँसिस ने मंगलवार 24 सितम्बर को रोम के दक्षिण में "नुओवी ओरीज़ोन्ती"(नये क्षितिज) समुदाय के सदस्यों के साथ पवित्र युखारीस्तीय समारोह का अनुष्ठान किया। संत पापा ने विश्वासियों को जीवन की कठिनाइयों और हार का सामना करते हुए साहसपूर्वक अपने जीवन के पुनर्निर्माण हेतु सदा आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दी।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 25 सितम्बर 2019 (रेई)˸ संत पापा फ्राँसिस ने इटली के फ्रोसिनोने शहर स्थित चित्तादेल्ला चेलो दी "नुओवी ओरिजोन्ती" समुदाय का आकस्मिक दौरा किया। यह समुदाय सामाजिक कठिनाइयों में पड़े लोगों और जरूरतमंद लोगों की मदद करता है।  

मंगलवार अपराहन को पवित्र मिस्सा के दौरान संत पापा ने एज्रा के ग्रंथ से लिये गये पाठ पर चिंतन किया। संत पापा ने कहा ईश्वर का घर पूरी तरह से नष्ट हो गया था। इस घर का पुनर्निर्माण करना एक आसान बात नहीं थी।" "यहूदी ऐसा करने में कामयाब रहे क्योंकि प्रभु उनके साथ थे।" उन्होंने कहा, "केवल तभी, जब प्रभु हमारे साथ हैं हम पुनर्निर्माण करने में सक्षम होते हैं। क्योंकि नया घर बनाना आसान है पर गिरे हुए घर का पुनर्निर्माण करना अधिक कठिन है।"

मानसिकता में बदलाव

बहुत से लोग जिन्होंने अपने जीवन को बर्बाद होते देखा है और संभवतः कुछ अपने जीवन को फिर से संवारने के लिए संघर्ष कर रहे होंगे। कुछ लोगों को तंगहाली में रहने की आदत-सी हो जाती है। संत पापा ने कहा कि इस तंगहाली से ऊपर उठने के लिए मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता है। पुनर्निर्माण हमेशा सभी के लिए सुविधाजनक नहीं है।"

संत पापा फ्रांसिस ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक बार व्यापारियों का एक दल, लोगों द्वारा बनाई गई दीवार को रात में नष्ट कर दिया करता था। इस पर लोगों ने एक हाथ में ईंट और दूसरे हाथ में तलवार लिये दीवार बनाना शुरु किया। इस प्रकार, मंदिर के निर्माण कार्य के साथ उसका बचाव किया गया।

जीवन रक्षा

संत पापा ने कहा कि जीवन ईश्वर का दिया हुआ उपहार है और इसकी देखभाल करना उसका पुनर्निर्माण करने में कई संघर्षों का सामना करना पड़ सकता है परंतु ईश्वर में विश्वास करते हुए आगे ही बढ़ते जाना है।

संत पापा ने याद दिलाई कि जीवन में हार का सामना करना पड़ सकता है परंतु उन्हें क्रूसित येसु को याद करना चाहिए जिन्होंने क्रूस पर अपनी जान देकर हर तरह की कमजोरियों और कठिनाइयों से उबरने का मार्ग दिखाया। येसु हर तरह के लोगों का उद्धार करने आये। येसु ही हमारी आशा और मुक्ति हैं। अकेले हम अपनी कमजोरियों से शायद नहीं लड़ पायेंगे, परंतु प्रभु के साथ हम नये जीवन की शुरुआत कर सकते हैं। हमें आशा और साहस के साथ आगे बढ़ने हेतु प्रभु अपनी कृपा दें।

25 September 2019, 16:25