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संत पापा अब्राहम समुदाय के सदस्यों के साथ संत पापा अब्राहम समुदाय के सदस्यों के साथ 

अब्राहम के समान ईश्वर पर भरोसा रखें, संत पापा अब्राहम समुदाय से

संत पापा ने अब्राहम समुदाय की स्थापना के 30 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उनसे अब्राहम की तरह बनने का आग्रह किया, जिसने ईश्वर में विश्वास कर अज्ञात देश के लिए, अपना देश और घर छोड़ दिया था।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 14 सितम्बर 2019 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के संत पॉल छठे सभागार में अब्राहम समुदाय के करीब 700 सदस्यों से मुलाकात की, जो समुदाय की स्थापना के 30 वर्ष पूरे होने के अवसर पर रोम आये हुए हैं।

संत पापा उनसे मिलने की खुशी जाहिर करते हुए कहा, “मैं आपके समुदाय की स्थापना के तीस साल बाद आपसे मिलकर खुश हूँ। प्रभु येसु का अनुसरण करने के लिए, पवित्र आत्मा नए रास्ते खोलकर हमें आश्चर्यचकित करना बंद नहीं करता। आपने मुझे जिन शब्दों से संबोधित किया है, उसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूँ। आपका समुदाय युवा है और आप अपने भीतर उन लोगों के लिए विशेष उत्साह रखते हैं जो अपने जीवन में मसीह से मिलने की सुंदरता को साझा करना चाहते हैं।” आप ईश्वर के सुसमाचार को आगे ले जाने के लिए बुलाये गये हैं।

ईश्वर की आज्ञा

संत पापा ने कहा कि वे महान पूर्वज अब्राहम से प्रेरित होने से न डरें। उनका जीवन और कार्य प्रत्येक सदस्य को ईश्वर की आज्ञाओं का पालन करने हेतु प्रेरित करे। ईश्वर हर किसी के जीवन में हर परिस्थिति में उपस्थित रहते हैं। केवल ईश्वर ही जानते हैं कि वे किस जगह और किस समय प्रत्येक से अपनी उपस्थिति का एहसास कराय़ेंगे।

मौन होकर सुनना

संत पापा ने कहा कि प्रभु की आवाज को सुनने के लिए हमें मौन रहना होगा। दुनियाई आवाज को हमारे अंदर आने से रोकना होगा तभी हम मौन होकर प्रभु को सुन पायेंगे। उन्होंने कहा, "अपने जीवन में “सच्ची ख़ामोशी का क्षण” खोजना महत्वपूर्ण है; यह प्रभु की बातों को सुनने में सक्षम होने का रहस्य है।”

सुसमाचार के प्रचारक बनें

अब्राहम ने ईश्वर की बातों पर विश्वास किया और अनजान प्रतिज्ञात देश जाने के लिए अपनी भूमि और अपना घर छोड़ दिया। उसके पास ईश्वर की प्रतिज्ञा की गारंटी थी। अब्राहम जीवनभर ईश्वर का संदेशवाहक बना। संत पापा ने कहा कि उन्हें भी सुसमाचार के प्रचारक बनना है। ईश्वर में भरोसा रखते हुए जीवन में आगे बढ़ना है। संत पापा ने माता मरियम का भी उदाहरण दिया जिन्होंने स्वर्गदूत की बातों में विश्वास कर ईश्वर की योजना पूरी की। उसने सुसमाचार को वहन किया।

अंत में संत पापा ने अपने विश्वास में अडिग रहने और गरीबों एवं हाशिये पर जीवन यापन करने वालों के प्रति उदार बने रहने हेतु प्रेरित किया,जो हमेशा ईश्वर पर भरोसा रखते हैं।

14 September 2019, 16:59