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अद लीमिना में आये भारत के धर्माध्यक्ष संत पापा फ्राँसिस से मुलाकात करते हुए अद लीमिना में आये भारत के धर्माध्यक्ष संत पापा फ्राँसिस से मुलाकात करते हुए   (Vatican Media)

भारत के धर्माध्यक्षों ने "आद लीमिना" मुलाकात में भाग लिया

कलीसिया के परमाध्यक्ष के साथ अपनी पंचवर्षीय पारम्परिक मुलाकात, "आद लीमिना" के लिये भारत के धर्माध्यक्ष रोम पधारे हैं। उनकी अद लीमिना मुलाकात का समापन आज सन्त पापा फ्राँसिस के साथ मुलाकात से हुई।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 13 सितम्बर 2019 (वाटिकन रेडियो हिन्दी)˸ मुलाकात का उद्देश्य न केवल प्रेरितों के समाधि स्थलों का दर्शन करना था बल्कि संत पेत्रुस के उतराधिकारी के प्रति उचित सम्मान दिखलाना तथा स्थानीय कलीसिया की स्थिति का व्यौरा देते हुए, उनके सार्वभौमिक अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करना था। उनके संदेश और परामर्श को ग्रहण करना और कलीसिया के सदस्यों को ईश्वर द्वारा चुने गये परमधर्माध्यक्ष के अधिक करीब लाना।

झान के धर्माध्यक्षों ने पहले ही दल में 13 सितम्बर को संत पापा फ्राँसिस से मुलाकात की। मुलाकात के पूर्व उन्होंने वाटिकन के विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया।

विश्वव्यापी कलीसिया के चरवाहे के मिशन में सहभागिता

हजारीबाग के धर्माध्यक्ष आनन्द जोजो
हजारीबाग के धर्माध्यक्ष आनन्द जोजो

हजारीबाग के धर्माध्यक्ष आनन्द जोजो ने वाटिकन रेडियो को अद लीमिना विजिट के बारे बतलाते हुए कहा, "मैं एक धर्माध्यक्ष के रूप मे पहली बार अद लीमिना विजिट के लिए संत पापा की नगरी में आया हूँ। यह वास्तव में हरेक पाँच वर्ष में एक धर्माध्यक्ष को अपने संत पापा जो विश्वव्यापी कलीसिया के चरवाहे हैं उनके साथ मुलाकात, उनके मिशन में सहभागिता है। उनके साथ मिलकर अपने धर्मप्रांत जो चाहे कितना ही छोटा क्यों न हो उसमें चरवाही के कार्य को अच्छी तरह निभाना, अर्थात् उनसे परामर्श लेना, उनसे प्रोत्साहन पाना, ये सारी चीजें अद लीमिना विजिट के तहत की जाती हैं।"

धर्माध्यक्ष ने बतलाया कि अद लीमिना विजिट के दौरान उन्होंने वाटिकन के आयोगों और विभागों का दौरा किया। जहाँ उन्होंने विभागों के सभी लोगों को एक साथ मिलकर संत पापा के कार्यों को करते हुए पाया।

हजारीबाग के धर्माध्यक्ष आनन्द जोजो

उन्होंने वाटिकन के लोकधर्मी और परिवार विभाग के कार्य के बारे बतलाया कि यह विभाग अच्छा ख्रीस्तीय जीवन जीने हेतु उत्साह एवं प्रोत्साहन प्रदान करता है। यहाँ चुनौतियों का सामना करने और उनके निराकरण के उपाय भी बतलाये जाते हैं।

भारत की काथलिक कलीसिया

भारत में काथलिक कलीसिया का आगमन प्रेरितों के समय में ही हुआ था। प्रेरितों में से एक संत थॉमस ने दक्षिणी भारत में सुसमाचार का प्रचार किया था। 16वीं शताब्दी में इसके विस्तार में तेजी आयी जब पुर्तगालियों ने गोवा पर विजय पाया। आज यह यह एक छोटी कलीसिया है और अल्पसंख्यकों की गिनती में रखी जाती है।

कलीसिया की वार्षिक किताब के आंकड़े अनुसार 2016 में भारत के काथलिक विश्वासियों की कुल संख्या 21,730,000 थी जो देश की कुल 1.3 बिलियन आबादी का 1.6 प्रतिशत है। यहां हिन्दूओं की कुल आबादी 80 प्रतिशत, मुस्लिमों की 14 प्रतिशत एवं ख्रीस्तीयों की 2.9 प्रतिशत है। काथलिकों में तीन चौथाई विश्वासी लैटिन रीति, 1/5 सिरो- मालाबार तथा करीब 3 प्रतिशत सिरो मालाबार रीति अपनाते हैं।

संख्या में कम होने पर भी भारत की कलीसिया ऐतिहासिक रूप से एक अत्यन्त गतिशील कलीसिया है। यह बुलाहट के लिए धनी है एवं कई लोकधर्मी संगठनों के माध्यम से सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। कलीसिया की उपस्थिति सांस्कृतिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य, समाज सेवा और संचार के क्षेत्रों में बहुत मजबूत है।

भारत की कुल आबादी की तुलना में संख्या बहुत कम होने के बावजूद आज कलीसिया सबसे बड़ी गैर-राज्य निकाय है जो गरीबी, अशिक्षा, बीमारी तथा समाज के वंचित लोगों की मदद हेतु समर्पित है।

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भारत के काथलिक धर्माध्यक्ष जिन्होंने अद लीमिना विजिट में भाग लिया
13 September 2019, 17:19