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कार्मेल मठवासियों से मुलाकात करते संत पापा कार्मेल मठवासियों से मुलाकात करते संत पापा  (Vatican Media)

ईश्वर पर चिंतन करें एवं उनकी खोज करें, कार्मेल मठवासियों से पोप

संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार, 21 सितम्बर को कार्मेल ऑर्डर की महासभा में भाग लेने वाले प्रतिभागियों से वाटिकन में मुलाकात की तथा उनसे कहा कि मौन और प्रार्थना के द्वारा नवीन समुदाय एवं सच्चे मिशन की शुरूआत होती है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 21 सितम्बर 2019 (रेई)˸ भाईचारा के अच्छे शिल्पकार के रूप में अपना भरोसा प्रभु पर बनाये रखें, गतिहीनता की जड़ता से ऊपर उठते हुए धर्मसमाजी समुदाय को मात्र एक काम करने वाला संगठन तक ही सीमिन न करें।

कार्मेल ऑर्डर की महासभा की विषयवस्तु थी, "तुम मेरे साक्षी हो।" एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक, अपने कार्मेलाईट करिश्मा के प्रति विश्वस्त बने रहें।

संत पापा ने कहा, "ईश्वर ने कार्मेल को एक सच्चा करिश्मा प्रदान किया है कि वह कलीसिया को समृद्ध बनाये तथा सुसमाचार के आनन्द को दुनिया को बताये। आपने जिसे उत्साह एवं उदारता के साथ ग्रहण किया है उसे दूसरों को भी बांटें।

संत पापा ने उन्हें चिंतन करने हेतु तीन बिंदु दिये-

निष्ठा एवं चिंतन

संत पापा ने कहा कि कलीसिया उनकी सराहना करती है और उन्हें चिंतन करने वालों के रूप में याद करती है। धनी आध्यात्मिक परम्परा की धरोहर के कारण उनका मिशन फलप्रद है क्योंकि यह ईश्वर के साथ व्यक्तिगत संबंध पर आधारित है।

संत पापा ने कहा, "कार्मेलाईट परिवार के महान आध्यात्मिक शिक्षक हमेशा मननशील व्रत का उल्लेख करते हैं। कार्मेलाईट जीवनशैली में चिंतन, किसी भी मिशन और कार्य द्वारा ईश्वर की सेवा करने के लिए उन्हें तैयार करती है। अतः आप जो कुछ भी करें अपने अतीत के प्रति निष्ठावान बने रहें एवं भविष्य की आशा के लिए खुले रहें। इस तरह आप लोगों की आध्यात्मिक यात्रा में उनकी सहायता कर पायेंगे।  

सहचर्य और प्रार्थना

संत पापा ने कहा कि कार्मेलाईट मिस्टिक एवं लेखकों ने समझा था कि ईश्वर में होना और ईश्वर की चीजों में होना दोनों एक साथ नहीं चलते हैं। ईश्वर में जड़ नहीं होने और हजार तरह की चीजों में उलझे रहने से, कभी न कभी ऐसा समय आयेगा जब हम महसूस करेंगे कि हम उनसे बिछुड़ चुके हैं। संत मरिया मगदलेना दी पात्सी ने कलीसिया के नवीनीकरण के लिए लिखे पत्र में कहा है कि धर्मसमाजी जीवन में गुनगुनापन प्रवेश कर जाता है जब सुसमाचारी सलाहें दिनचर्या की गतिविधियाँ मात्र बन जाती हैं और येसु का प्रेम जीवन के केंद्र में नहीं रह जाता। इस तरह दुनियादारी भी घुसने लगती है जो कलीसिया के लिए खतरनाक प्रलोभन है।

संत पापा ने कहा, "मैं जानता हूँ कि यह प्रलोभन घुस चुका है और हमारे बीच गंभीर क्षति पहुँचाया है।" महासभा पवित्र आत्मा से शक्ति प्राप्त करने का शुभ अवसर है ताकि इन गडढ़ों में गिरने से बचा जा सके।

कार्मेलाईट धर्मसमाज ने अपने आप के "अंदर" जाना सिखलाया है। क्रूस के संत जॉन कहते हैं कि वहाँ ईश्वर का निवास है और वे निमंत्रण देते हैं कि हम वहीं उनकी खोज करें। कलीसिया के सच्चे नबी वे हैं जो नबी एलियाह की तरह निर्जन प्रदेश (एकान्त) से आते और पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होते हैं, जिन्होंने एकान्त में ईश्वर की आवाज सुनी थी, "तब उसे एक वाणी यह कहते हुए सुनाई पड़ी, ''एलियाह! तुम यहाँ क्या कर रहे हो?''(1 राजा 19,12) संत पापा ने उन्हें ईश्वर के साथ संबंध गहरा बनाने हेतु प्रोत्साहन दिया।

संत तेरेसा ने कहा था, मैं ईश्वर के बारे बात करने या उनके बारे सुनने से कभी नहीं थकती हूँ। हमारी दुनिया ईश्वर के लिए प्यासी है जिसको कार्मेलाईट भाई-बहनें, प्रार्थना करना, शोरगुल से बाहर निकलना और आध्यात्मिक सूखापन से उबरना, सिखा सकते हैं। यह कोई कोर्स नहीं है बल्कि इसके लिए विश्वास के व्यक्ति बनने की जरूरत है ईश्वर के मित्र बनने की, जो पवित्र आत्मा के रास्ते पर चलना जानता है।  

संत पापा ने कहा कि मौन और प्रार्थना द्वारा नवीकृत समुदाय एवं सच्चे मिशन की शुरूआत होती है अतः भाईचारा के अच्छे निर्माता के रूप में अपना विश्वास प्रभु पर रखें, गतिहीनता की जड़ता से ऊपर उठते हुए धर्मसमाजी समुदाय को मात्र एक काम करनेवाला संगठन तक ही सीमिन न करें, जो अंत में धार्मिक जीवन के मूल तत्वों को कमजोर कर देगा। सामुदायिक जीवन की सुन्दरता ही अपने आप में मौन, ईश्वर के लोगों के आकर्षण तथा पुनर्जीवित ख्रीस्त के आनन्द को प्रस्फूटित करता है। सच्चे कार्मेलाईट दूसरों में भाइयों को मदद एवं प्यार करने तथा उनके साथ अपने जीवन को बांटने के आनन्द को प्रकट करते हैं।

कोमलता और सहानुभूति

एक चिंतनशील व्यक्ति का हृदय सहानुभूति पूर्ण होता है। जब प्रेम कमजोर हो जाता है तब वह अपनी खुशबू खो देता है। एक चिंतनपूर्ण एवं रचनात्मक प्रेम उन लोगों के लिए मरहम है जो थके और क्षीण, परित्यक्त, ईश्वर के मौन हो जाने, आत्मा का खालीपन और प्रेम में टूटे हुए महसूस करते हैं। हमें उन्हें अच्छाई और सच्चाई की सुन्दर खुली खिड़की की ओर चिंतन करने के लिए जरूर प्रेरित करना चाहिए। संत पापा ने कहा कि जो ईश्वर को प्यार करता है उन्हें उनकी खोज गरीबों में करना चाहिए जिन्हें धन्य अंजेलो पौली ने येसु के भाई-बहन कहा है।

संत पापा ने कहा कि चिंतन केवल क्षणिक हो सकता है यदि यह उत्साह और उमंग तक ही सीमित हो जो हमें लोगों की खुशी और परेशानियों से दूर ले जाती है। हमें उस चिंतन पर विचार करना चाहिए जो सहानुभूतिपूर्ण न हो। येसु के घाव आज हमारे भाई-बहनों के शरीर में दिखाई पड़ते हैं जो अपमानित, कलंकित और दास के रूप में हैं। उन घावों का स्पर्श करने के द्वारा जीवन्त ईश्वर की पूजा करना संभव है। संत पापा ने उन्हें कोमल बनने हेतु प्रेरित किया।

अंत में संत पापा ने उन्हें धन्यवाद दिया तथा कार्मेल की कुंवारी मरियम से प्रार्थना की कि वे सदा उनका साथ दें तथा उनके साथ सहयोग करने वालों और उनकी आध्यात्मिकता को अपनाने वालों की रक्षा करें।

21 September 2019, 14:45