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संत पापा फ्रांसिस ने मोजाम्बिक के मापुतो,  कलीसियाई अधिकारियों के संग संत पापा फ्रांसिस ने मोजाम्बिक के मापुतो, कलीसियाई अधिकारियों के संग  (Vatican Media)

मोजाम्बिक मिलन की कलीसिया बनें, संत पापा फ्रांसिस

संत पापा फ्रांसिस ने मोजाम्बिक की अपनी प्रेरितिक यात्रा के पहले दिन मापुतो के मरियम महागरिजाघर में मोजाम्बिक कलीसिया के धर्माध्यक्षों, पुरोहितों, धर्मबंधुओं धर्मबहनों, गुरूकुल के विद्यार्थियों, प्रचारकों और लोकधर्मियों के समुदाय को अपना संदेश दिया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, गुरुवार, 5 सितम्बर 2019 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने माता मरियम के निष्कलंक महागिरजाघर में जमा हुए सभी लोगों के प्रति अपनी कृतज्ञता के भाव प्रकट करते हुए कहा कि हम एक साथ मिलकर अपनी बुलाहट की आग का आत्म-निरिक्षण करते हुए अपने हृदय में इसे पुनः प्रज्वलित करने की चाह रखते हैं। अपनी कमजोरियों और खम्मियों के बावजूद ईश्वर की कृपा में बने रहने और अपने जीवन की चुनौतियों को गंभीरता से लेने हेतु मैं आप सभों का धन्यवाद अदा करता हूँ।

मोजाम्बिक एक वीर कलीसिया

“हम वीरतापूर्ण कलीसिया के अंग हैं” जहाँ अपने दुःखों और कठिनाइयों के बावजूद आप अपनी आशा में बने हैं। संत पापा ने कहा कि आप का यह गौरव आपको विश्वास और आशा में बनाये रखते हुए अपनी “हाँ” को नवीकृत करने में मदद करता है। माता कलीसिया आप के प्रेममय प्रेरिताई पर आनंदित होती है। “प्रथम प्रेम” में लौटने की, आप की चाह से वह खुश होती है। पवित्र आत्मा आप सभों को विवेक, साहस और क्षमा के वरदानों से विभूषित करे जिससे आप उनकी योजना को अपने जीवन में स्वीकार सकें।

सच्चाई का सामना

संत पापा फ्रांसिस ने कहा कि हम अपने जीवन में सच्चाई का सामना करने हेतु बुलाये गये हैं। समय के साथ परिवर्तन के दौर में हम बहुत बार अपने लिए नये स्थान की खोज नहीं कर पाते हैं। हम अतीत “मिस्र के लीक” (गण.11.5) की याद करते और अपने सामने उपस्थित प्रतिज्ञात देश को भूल जाते हैं। यह हमें कठोर बना देता है। सुसमाचार की घोषणा करने के बदले हम एक उदास संदेश को प्रसारित करते जो किसी को प्रभावित नहीं करती है।

माता मरियम को समर्पित इस महागिरजाघर में हम एक परिवार के रुप में अपने जीवन की बातों को एक दूसरे के साथ साझा करने हेतु आते हैं। यह परिवार, मरियम द्वारा दूत संदेश को “हाँ” कहने से उत्पन्न होती है। उन्होंने अपने जीवन में पीछे मुढ़कर नहीं देखा। देहधारण के रहस्य को हम संत लूकस के सुसमाचार में पाते हैं। संत लूकस के इस चित्रण में हम अपने जीवन के सवालों का उत्तर पा सकते हैं।

संत पापा ने संत योहन बपतिस्ता औऱ येसु ख्रीस्त के जीवन पर तुलनात्मक चर्चा करते हुए कहा कि यह हमें अपने जीवन में ईश्वर के कार्यों को देखने में मदद करता है जहाँ हम अपने को येसु ख्रीस्त के साथ संयुक्त करते जो मानव बने।

आनंद का संदेश

आनंद के दो संदेशों की चर्चा करते हुए संत पापा ने कहा कि पहला यूदा, महत्वपूर्ण शहर येरुसलेम मंदिर के अन्दर होता है। एक पुरोहित को आनंद का सुसमाचार सुनाया जाता है वहीं देहधारण का संदेश गलीलिया के सुदूर छोटे नगर नाजरेत में सुनाया गया। यह एक गिरजाघर या धार्मिक स्थल नहीं वरन एक घर था, एक लोकधर्मी नारी रहती थी। किन चीजों में हम परिवर्तन को देखते हैंॽ सारी चीजें बदल गई हैं और इस परिवर्तन में हम अपने लिए एक गहरी पहचान को पाते हैं।

पुरोहित का अस्तित्व

संत पापा फ्रांसिस ने पुरोहिताई की चुनौती के बारे में पूछे गये सवाल के उत्तर में कहा कि हमें अपने महत्वूपर्ण स्थान और शाही स्थान से निकलकर उन स्थानों में जाने की जरूरत है जहाँ से हम आते हैं। ऐसा करने के द्वारा हम जकरियास औऱ मरियम की तरह होते हैं। संत पापा ने कहा, “यह कहना अपने में अतिशयोक्ति नहीं होगी कि पुरोहित अपने में सबसे छोटा है। यदि येसु ख्रीस्त अपनी निर्धनता से उसे धनी नहीं बनाते हैं तो वह अपने में सबसे गरीब है। यदि येसु उसे अपना मित्र नहीं बनाते तो वह अपने में सबसे अयोग्य सेवक बना रहता है, यदि येसु उसे धैर्य से शिक्षित नहीं करते तो जैसे कि उऩ्होंने पेत्रुस के साथ किया तो वह अपने में सबसे अज्ञानी बना रहता है। एक चरवाहे के रुप में येसु उसे यदि अपनी शक्ति से नहीं भरते तो वह अपनी चारगाह में सबसे कमजोर ख्रीस्तीय रहता है। यदि पुरोहित अपने में यूँ ही छोड़ दिया जाता तो उससे कमजोर और कोई नहीं है अतः एक पुरोहित को सभी प्रकार से जालों से बचे रहने हेतु हम माता मरियम से निवेदन करें, “मैं एक पुरोहित हूँ क्योंकि ईश्वर ने मेरी दीनता पर कृपा दृष्टि फेरी है।” (लूका. 1.48)।

हमारे जीवन का संदेह

जकरियस, दूत के संदेश में संदेह करता वहीं मरियम “हाँ” कहते हुए उसे स्वीकार करती है। वह पूर्ण विश्वास और बिना हिचकिचाहट में अपने को समर्पित करती है। ईश्वर के साथ अपने संबंध को लेकर हम जकरियस की तरह संघर्ष करते हैं क्या यह कार्य मेरे द्वारा पूरा होगा, ईश्वर मुझे अपनी आशीष देंगे, कलीसिया मेरी मेहनत को पहचानेगी इत्यादि। संत पापा ने कहा कि हम अपने लाभ के लिए कार्य न करें। हम दूसरों को अपनी करूणा प्रदर्शित करें। हम विवाहित दंपतियों के साथ आनंदित हों, बच्चों के साथ मुस्कुराये जो बपतिस्मा हेतु लाये जाते हैं, हम परिवारों के साथ चलें जो अपने जीवन में दुःख का अनुभव करते हैं, जो अपने प्रियजनों को दफनाते हैं हम उनके साथ शोक मनायें।

पुरोहित का कार्य थकान भरा

संत पापा ने कहा, “हमारे कार्य हमारे लिए थकान भरे होंगे। हम पुरोहितों के लिए लोगों का जीवन एक अखबार के समान है हम उन्हें देखते और जानते हैं कि उनके जीवन और हृदय में क्या हो रहा है। उनके दुःखों में अपने को सम्मलित करना हमें अपनी थकान की घड़ी में दिलासा प्रदान करती है। तुम सब इसे लो और खाओ... ये हमारे लिए येसु ख्रीस्त के शब्द हैं जिन्हें वे अपने लोगों की चिंता करते हुए सदैव कहते हैं। इस तरह हमारा पुरोहिताई जीवन ईश प्रजा की सेवा में व्यतीत होता है जहाँ हमें थकान की अनुभूति होती है।”

बुलाहटीय आत्म-चिंतन

अपनी बुलाहट का नवीनीकरण हमें अपनी थकान और चिंताओं पर आत्ममंथन करने का मांग करता है कहीं यह “दुनियादारी की आध्यात्मिकता” से प्रभावित तो नहीं है। हम अपने कार्यों में उन बातों की चिंता करें जो येसु ख्रीस्त की ओर से हमारे लिए आती हैं। संत पापा ने कहा कि क्या हम अपने जीवन की चिंता भरी परिस्थिति में भी अपनी पहचान और खुशी को बनाये रखते हैं।  

“भोगविलासिता” का हमारा जीवन क्या युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत होगा जिसके फलस्वरुप वे अपने लिए ख्रीस्त के मार्ग का चुनाव करें। रफ्तर दुनिया और दुनिया की चिंता हमारी आंतरिक शांति का दमन करती है परिणाम स्वरुप हम येसु को देखने और उनकी आवाज को सुनने में असमर्थ होते हैं। आप के जीवन में बहुत सारी आकर्षक चीजें आयेंगी जो आप को मोहित और उत्साह से भर देंगी यद्पि वे आप को खोखला, चिंतित और अकेलेपन में छोड़ देगी। आप इसके चुंगल में न पड़ें क्योंकि यह आप को दिशाहीन कर देगा और आप की मेहनत व्यर्थ चली जायेगी। आप शांति में चिंतन, प्रार्थना करते हुए येसु ख्रीस्त में अपनी बुलाहट को देखें।

एलिजाबेद और मरियम का मिलन

संत पापा ने कहा कि संत लूकस के द्वारा तुलनात्मक चर्चा को हम एलिजाबेद और मरियम के मिलन में अपनी चरम पर पहुँचता हुआ देखते हैं। मरियम अपनी उम्रदार चचेरी बहन से मिलती है जो हमें ईश्वर का अपनी चुनी हुई प्रजा से मिलन को दिखलाता है। आज भी हम मोजाम्बिक की नारियों को सुसमाचार प्रचार के उत्साह से भरा हुआ पाते हैं। हम उनके जीवन में इस बात की झलक पाते हैं कि मरियम की तरह वे अपने को दूसरों की सेवा में समर्पित करते हैं। वे अपने विश्वास और कार्यो के माध्यम दूसरों के जीवन में परिवर्तन लाते हैं।

दूसरी संस्कृतियाँ हमारी चुनौती

दूसरी संस्कृतियों को अपने में वहन करना सदा एक चुनौती रही है। स्थानीय कलीसिया के चाहिए कि वह इसके छोटे रुपों को अपने में वहन करे। हमारा मुख्य प्रयास यह रहे कि सुसमाचार का प्रचार अपने में उस विशेष संस्कृति के संग एक नया संश्लेषण उत्पन्न करे, जो बहुत धीरे-धीरे होता है जहाँ हम कई बार अपने में भयभीत रहते हैं। लेकिन यदि हम अपने में भय और संदेह को धारण किये रहें तो हमारा विकास कभी नहीं होगा।

मिलन दूरियाँ दूर करती हैं

नाजरेत और येरुसलेम की “दूरी” मरियम के “हाँ” कहने में कम और लुप्त हो जाती है। दूरी, प्रांत और हमारा एक दूसरे के साथ अलगाव देहधारण के आयाम को कम कर देता है। संत पापा ने कहा कि आप जो बड़े हैं इस बात का साक्ष्य देते हैं कि विभाजन और कलह युद्ध को जन्म देती है। आप भेंट करने हेतु सदैव तैयार रहें। मोजाम्बिक की कलीसिया को भेंटवार्ता की कलीसिया बनने का निमंत्रण दिया जाता है। यह आपसी लड़ाई, विभाजन और दूसरों के लिए असम्मान का कारण होने के बदले सुलाह का द्वार, सम्मान का स्थल, वार्ता और आपसी मिलन की संभावना बने।

बहुजातीय सांस्कृतिक मिलनः एक प्रक्रिया की मांग

अन्तरजातीय विवाह के बारे जो समुदायों को जोड़ने का बदले तोड़ता और हमारे बीच विभाजन कारण बनता है संत पापा ने कहा कि हमारे बीच देशों और जातियों के बीच, उत्तर और दक्षिण, पुरोहितों और धर्माध्यक्षों के बीच इसी तरह का एक संबंध है। बहुजातीय संस्कृति का मिलन एक प्रक्रिया की मांग करती है जो अपने में धीरे-धीरे और कठिन प्रयास के माध्यम संभंव होता है जिसे प्राप्त करने और एकता में लाने हेतु एक इच्छा शक्ति की आवश्यकता है। समाज के विकास हेतु यह जरूरी है कि हम इसमें न्याय, शांति और भ्रातृत्व की भावना को पायें, जिस भांति मरियम एलिजबेद के घर गई उसी तरह कलीसिया के रुप में हमें नई कठिनाई का सामना करने हेतु उपाय खोजने की जरुरत है न कि समास्याओं की उपस्थिति में हम कोढ़ग्रस्त हो जायें। हम पवित्र आत्मा की सहायता से एक राह की खोज करें और चुनौतियों का सामना करें क्योंकि वे हमारे लिए एक शिक्षक हैं जो हमें नये मार्गों में अभिमुख करते हैं।

05 September 2019, 16:41