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यूरोप के पूर्वी काथलिक धर्माध्यक्षों को संबोधित करते हुए संत पापा फ्राँसिस यूरोप के पूर्वी काथलिक धर्माध्यक्षों को संबोधित करते हुए संत पापा फ्राँसिस  

यूरोप के पूर्वी काथलिक धर्माध्यक्षों को संत पापा का संबोधन

संत पापा यूरोप के पूर्वी काथलिक धर्माध्यक्षों को वार्तालाप के कारीगर, सुलह के प्रवर्तक के रुप में आगे आने के लिए प्रेरित किया जिससे कि वे मुलाकात की सभ्यता का विकसित कर सकें।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 14 सितम्बर 2019 (रेई) : संत पापा फ्रांसिस ने शनिवार 14 सितम्बर को वाटिकन में यूरोप के करीब चालीस पूर्वी काथलिक धर्माध्यक्षों से मुलाकात की। यूरोप के धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के तत्वावधान में वार्षिक सभा का आयोजन इस वर्ष रोम में किया है।

संत पापा ने कार्डिनल बान्यास्को को उनके स्वागत भाषण के लिए धन्यवाद दिया। संत पापा ने कहा,“आपकी बैठक, यूरोप महादेश की काथलिक कलीसिया की समृद्ध अनुष्ठानिक विविधता का संकेत है, जो लैटिन परंपरा तक ही सीमित नहीं है। आप में से, बहुत लोग बीजान्टिन परंपरा के विभिन्न कलीसियाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और कुछ लोग यूक्रेन से हैं। आप में से कुछ मध्य पूर्व, भारत और अन्य क्षेत्रों के प्रतिनिधि भी हैं, जिन्हें यूरोपीय देशों ने स्वागत किया है।

काथलिक समन्वय

संत पापा ने कुछ महीने पहले अपनी रोमानिया की प्रेरितिक यात्रा के दौरान रोमानियाई ग्रीक काथलिक कलीसिया के सात शहीद धर्माध्यक्षों के धन्य घोषणा के समारोह को याद किया और कहा कि यह एक ऐसा अवसर था जहाँ पूरी काथलिक कलीसिया और संत पेत्रुस के उतराधिकारी,रोम के धर्माध्यक्ष के साथ संयुक्त रहने की निष्ठा को प्रदर्शित किया गया। यह निष्ठा आपके विश्वास, विशिष्ट और अमिट खजाने का एक अनमोल रत्न है। रोमानियाई शहीदों में से एक हमें इसकी याद दिलाती है। उनसे कहा गया था कि वह अपने काथलिक समन्वय को समाप्त कर दें। इसपर उन्होंने कहा, "मेरा विश्वास ही मेरा जीवन है"। कथलिक समन्वय आपकी विशेष पहचान का हिस्सा है, फिर भी यह किसी भी तरह से उस पहचान से अलग नहीं होता है। इसके विपरीत, यह अपनी पूर्ण पहचान में योगदान देता है।

मुलाकात की सभ्यता विकसित करें

संत पापा ने कहा कि वर्तमान समय में, जबकि बहुत अधिक असमानताएं और विभाजन शांति को खतरे में डालते हैं। हमें वार्तालाप के कारीगरों, सुलह के प्रवर्तकों के रुप में आगे आना है और मुलाकात की सभ्यता का विकास करना है जिससे कि हमारे समय को संघर्षों से बचाया जा सके। बहुत सारे लोग हिंसा के दुष्चक्र में फंसे हुए हैं और लगातार पारस्परिक पुनरावृत्ति करते हैं। ऐसी परिस्थिति में  प्रभु चाहते हैं कि आप प्रेम के सुसमाचार के उदारवाहक बनें। आप ‘सांत्वना के ईश्वर’ (2 कुरिं 1: 3) की तलाश में हैं, अतीत के घावों को ठीक करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, पूर्वाग्रहों और विभाजनों पर काबू पाने और सभी में आशा का संचार करते हैं। आप अपने गैर-काथलिक भाइयों और बहनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलें।”

शांति बहाल करने हेतु उठाये गये कदम

संत पापा ने शांति बहाल करने हेतु उठाये गये कदम और प्रार्थना में बिताये गये कुछ पलों को भी याद किया, जैसे पवित्र नगरी येरुसलेम और वाटिकन के उद्यान में शांति के लिए की गई प्रार्थना, लेसवोस द्वीप पर शरणार्थियों के साथ की गई बैठक, इटली के बारी में आयोजित मध्य पूर्व में शांति के लिए संवाद, जहाँ संत निकोलस और माता मरियम के संरक्षण में शांति के लिए विशेष प्रार्थना की गई थी। संत पापा ने कहा कि दूसरों के लिए और अपने सामान्य घर के लिए एक साथ मिलकर कुछ करें जिससे कि हम अपने दिल में काथलिक होने के भाव को बनायें रख सकेंगे।  

संत पापा ने उन्हें साहस के साथ, समन्वय की भावना में आगे बढ़ते रहने हेतु प्रेरित किया साथ ही उन्हें अपनी प्रार्थनाओं में निरंतर याद रखने का आश्वासन दिया। संत पापा ने कहा कि मेरे हृदय में आप के लिए विशेष जगह है।

14 September 2019, 16:53