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स्काऊट के युवाओं के साथ संत पापा स्काऊट के युवाओं के साथ संत पापा  (ANSA)

स्काऊट से संत पापा, सेवा को अपने जीवन का रास्ता बनायें

संत पापा ने स्काऊट से कहा कि वे सेवा का जीवन अपनाएँ। व्यक्ति जब देता है तभी प्राप्त करता है यही जीवन का रहस्य है। नवीनतम स्मार्ट फोन, सबसे तेज कार या फैशन वाला परिधान कभी भी प्यार करने और प्यार किये जाने का पूरा आनन्द नहीं दे सकते।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 3 अगस्त 2019 (रेई)˸ "दो और तुम्हें भी दिया जाएगा।" यह बात संत पापा फ्राँसिस ने येसु के शब्दों को दुहराते हुए शनिवार को यूरोप के स्काऊट से कही। उन्होंने शनिवार को वाटिकन के पौल षष्ठम सभागार में यूरोप के करीब 5 हजार स्काऊट को सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि समर्पण का अर्थ है अपना जीवन दूसरों को देना, सृष्टि की रक्षा करना।

संत पापा ने कहा, "स्वतंत्रता का अर्थ मोबाईल फोन के साथ कमरे में बंद हो जाना अथवा वास्तविकता से बचना नहीं है किन्तु यात्रा करना है दूसरों के साथ एक-एक कदम आगे बढ़ना और कभी नहीं रूकना है।" यूरोप के विभिन्न महान संतों के तीर्थस्थानों की एक सप्ताह की यात्रा करने के पश्चात् यूरोप के स्काऊट रोम पहुँचे।

संतों का उदाहरण

स्काऊट के आदर्श संत हैं – तारसुस के संत पौल, नोर्चा के संत बेनेडिक्ट, संत सिरिल और संत मेथोडियुस, असीसी के संत फ्राँसिस और सियेना की संत कैथरिन। संत पापा ने कहा कि उन संतों ने अपने जीवन में दूसरों से कुछ पाने का इंतजार नहीं किया किन्तु ईश्वर पर भरोसा रखा, अपने जीवन को दाँव पर रखा, जिसके द्वारा उन्होंने इतने महान कार्य सम्पन्न किये, जिनको हम शताब्दियों के बाद भी याद कर रहे हैं। उन्होंने अपना जीवन दूसरों को दिया न कि अपने लिए बचाए रखा।  

सुसमाचार, जीवन की राह पर मार्गदर्शक   

पाँच तीर्थस्थलों का दौरा करने के बाद रोम पहुँचे युवाओं को संत पापा ने येसु के पाँच शब्द बतलाये, जिनको वे अपने जीवन में हमेशा याद कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "सुसमाचार हमारे जीवन के रास्ते का सच्चा मार्गदर्शक है।" "दो और तुम्हें भी दिया जाएगा।" यह एक ऐसा समय है जिसमें व्यक्ति देने की अपेक्षा, पाना चाहता है। कई लोग सिर्फ इसलिए जीते हैं कि वे जो चाहते हैं उसे प्राप्त कर सकें, किन्तु वे कभी संतुष्ट नहीं होते, क्योंकि जब उन्हें एक चीज की प्राप्ति हो जाती है तब वे दूसरी चीज को पाने की लालसा रखते हैं और यह क्रम चलता रहता है। पाने में उन्हें परितृप्ति नहीं मिलती है। जितना मिलता है उतनी ही भूख बढ़ती जाती है और उस भूख मिटाये बिना चैन नहीं लगता। हृदय का विकास लेने से नहीं देने से होता है। लेने से यह भारी हो जाता है किन्तु देने से हल्का होता है।  

ऐप्स द्वारा खुशी नहीं आती

संत पापा ने स्काऊट के युवाओं को बतलाया कि येसु हमारे लिए यात्रा का आरम्भ बिन्दु निश्चित करते हैं। मगर देने का अर्थ क्या है? इसका अर्थ है थोड़ा रूक जाना और दुनिया की पीड़ा को कम करने का प्रयास करना। हम अपने जीवन को टेलीविजन देखते हुए आराम से व्यतीत नहीं कर सकते और न ही दूसरा ऐप डाऊनलॉड कर खुशी प्राप्त कर सकते हैं। ऐसा करने के द्वारा व्यक्ति अपनी असलियत को खोने की जोखिम उठाता है और एक फोटोकॉपी बन जाता है जैसा कि प्रभु सेवक कार्लो अकुतिस ने कहा है।

ईश्वर के सामने प्रत्येक व्यक्ति मूल्यवान

संत पापा ने कहा, हरेक व्यक्ति अनुठा तथा ईश्वर की नजरों में मूल्यवान होता है। अतः परिवर्तन लाने का प्रयास हरेक के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हम जिस चीज को देने के लिए इस दुनिया में आये हैं उसे कोई दूसरा नहीं दे सकता। संत पापा ने युवाओं को एक-दूसरे को बहुमूल्य कहने का प्रोत्साहन दिया।

उन्होंने कहा कि यदि आप सेतु का निर्माण करेंगे तो दूसरों को अपनी ओर आते हुए देखेंगे, दूसरी ओर, ऐसा नहीं करने पर आप हवा में अकेले, ख्वाबों में खोये हुए, साबुन के बुलबुले के समान समाप्त हो जायेंगे। अपने हाथों को देखें जो निर्माण करने, सेवा देने एवं दूसरों को देने के लिए है और कहें, मैं चिंता करना हूँ और दूसरे मेरी फिक्र करते हैं।

देने का पुरस्कार

संत पापा आश्वासन देते हैं कि देनेवाला व्यक्ति खाली हाथ नहीं रहता क्योंकि जब लगता है कि ईश्वर हमसे कुछ ले रहे हैं, तो यह इसीलिए कि वे हमें अधिक और अच्छी चीजें देंगे। गलत प्रतिज्ञाओं से मुक्त कर येसु हमें बाह्य नहीं किन्तु आंतरिक खुशी प्रदान करते हैं।

संत पापा ने कहा कि व्यक्ति जब देता है तभी प्राप्त करता है यही जीवन का रहस्य है। नवीनतम स्मार्ट फोन, सबसे तेज कार या फैशन वाला परिधान कभी भी प्यार करने और प्यार किये जाने का पूरा आनन्द नहीं दे सकते। संत पापा ने स्काऊट के "प्रस्थान" शब्द की सराहना की जिसके द्वारा वे सेवा को अपने जीवन का रास्ता मानते हैं, दूसरों के प्रति खुला और उदार होने के द्वारा वे भाईचारापूर्ण जीवन को अपनाते हैं।

सृष्टि

संत पापा ने कहा कि येसु के शब्द "दो और तुम्हें भी दिया जाएगा" यह सृष्टि के लिए भी लागू होता है। यदि हम इसकी देखभाल करते हैं तो कल भी हमारा घर बना रहेगा।"

सृष्टि एक खुली किताब है जो हमें शिक्षा देती है कि हम दुनिया में दूसरों से मुलाकात करने एवं एकता स्थापित करने के लिए हैं क्योंकि हम सभी ईश्वर और एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि स्काऊट का प्यार अपनी आम मातृभूमि, यूरोप के लिए न केवल चौकस प्रेक्षकों के रूप में बल्कि मेल-मिलाप कराने और समाज में समावेश लाने वालों की मांग करता है, जो नवीकृत यूरोप को जीवन दे सके।

 

03 August 2019, 17:39