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संत पापा जॉन पौल प्रथम के बचपन का घर संत पापा जॉन पौल प्रथम के बचपन का घर  

संत पापा जॉन पौल प्रथम के बचपन का घर दर्शकों के लिए खुलेगा

संत पापा जॉन पौल प्रथम (अल्बिनो लुचियानो) के बचपन के घर को 2 अगस्त से दर्शकों के लिए खोल दिया जाएगा।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 30 जुलाई 2019 (रेई)˸ शुक्रवार को संध्या 5 बजे संत पापा जॉन पौल प्रथम के बचपन के घर को, दर्शकों के लिए खोल दिया जाएगा। संत पापा जॉन पौल प्रथम का जन्म 17 अक्टूबर 1912 को  एक शानदार डोलोमाइट पर्वत पर बसे गाँव कानाले दागोरदो में हुआ था। तीर्थयात्री अब हर साल इस स्थान का दर्शन करने आते हैं।  

एक महत्वपूर्ण स्थान

एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि उनका घर अब धर्मप्रांत की सम्पति बन गयी है जिसका आधिकारिक रूप से उद्घाटन नहीं किया गया है। वितोरियो वेनेतो के धर्माध्यक्ष कोर्रादो पित्सोलो की प्रतिज्ञा अनुसार सब कुछ पूरा हो चुका है और जहाँ लुचियानो का जन्म एवं बपतिस्मा हुआ था, उस स्थान को तीर्थयात्रियों के लिए सार्वजनिक कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार यह एक महत्वपूर्ण स्थान है।  

स्थानीय अधिकारियों ने घर के प्रांगण की देखभाल करने के लिए माली की नियुक्ति कर दी है। पोप लुचियानो फाऊँडेशन ने अल्बिनो संग्रहालय एवं पल्ली गिरजाघर के दर्शन के लिए  तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों की मदद हेतु गाईड भी उपलब्ध करायी है।

संत पापा जॉन पौल प्रथम के लिए समर्पित दिवस

2 अगस्त को संत पापा जॉन पौल प्रथम के आवास को खोला जाएगा। उसी दिन कार्डिनल बेनियामिनो स्तेल्ला संत पापा जॉन पौल प्रथम की संत घोषणा के पोस्टुलेटर, एक किताब का विमोचन करेंगे।

किताब में अल्बिनो लुचियानो की जीवनी लिखी हुई है जिसमें 188 लोगों के द्वारा दिया गया साक्ष्य भी है। इसी किताब में संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें, संत पापा जॉन पौल प्रथम के निधन की घोषणा करने वाले डॉ. रेनातो बुत्सोनेत्ती एवं पोप जॉन पौल प्रथम के समय में संत पापा के आवास पर कार्यारत सिस्टर मारग्रेता मरिन के साक्ष्य भी हैं।

संत पापा जॉन पौल द्वितीय की विशेषता

पापा लुचियानो फाऊँडेशन के निदेशक लोरिस सेराफिनी ने वाटिकन न्यूज़ को बतलाया कि संत पापा जॉन पौल द्वितीय की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता थी दयालुता। उन्होंने इस दयालुता को गलत तरीके से दूसरों पर सहानुभूति प्रकट किये जाने से अलग व्यक्तिगत स्तर पर प्रकट किया। दयालुता के कारण पापा लुचियानो अपने द्वार पर दस्तक देने वाले सभी लोगों का स्वागत करते थे ताकि उनकी समस्याओं को समझ सकें और उनके लिए ईश्वर के प्रेम को प्रकट कर सकें। उन्होंने स्वयं कहा था कि पाप से घृणा किया जाना किन्तु पापी को स्वीकारा जाना चाहिए। अतः ईश्वर की दया का मनोभाव जिसपर कलीसिया की नींव डाली गयी है और संत पापा फ्राँसिस बहुत जोर देते हैं उसे वाटिकन द्वितीय महासभा के समय ही पहचाना जा चुका था। जिसके अनुसार कलीसिया न्याय करने की अपेक्षा स्वागत करने पर अधिक ध्यान देती है।

संत पापा जॉन पौल प्रथम

संत पापा जॉन पौल प्रथम ने 33 दिनों तक ही कलीसिया का परमाध्यक्षीय कार्यभार सँभाला था किन्तु उन्होंने इसी थोड़े समय में काथलिक कलीसिया में अमिट छाप छोड़ दिया।

उस छोटी अवधि में ही लोगों ने उन्हें ″स्माईलिंग पोप″ (मुस्कुराने वाले संत पापा) की संज्ञा दी थी। उन्होंने नौ भाषण एवं तीन संदेश दिये, तीन प्रेरितिक पत्र लिखे, चार अन्य आधिकारिक पत्र प्रेषित किया, दो प्रवचन दिये, पाँच रविवारों को देवदूत प्रार्थना का नेतृत्व किया तथा चार बुधवारों को आमदर्शन समारोह में भाग लिया। दूसरों के साथ मुलाकात में वे विश्वासी, विनम्र एवं दीन व्यक्ति के रूप में पहचाने जा सकते थे किन्तु साथ ही साथ कलीसिया की शिक्षा में वे कड़ाई भी बरतते थे। ईश्वर के प्रेम और पड़ोसी के प्रेम पर उनका विशेष ध्यान था।

संत पापा फ्राँसिस ने बुधवार 9 नवम्बर 2017 को संत पापा जॉन पौल प्रथम के वीरोचित सदगुणों को मान्यता देकर, उन्हें प्रभु सेवक घोषित किये जाने की स्वीकृति दी थी।

 

30 July 2019, 16:05